नए साल की शुरुआत के साथ-साथ उर्वरक सब्सिडी सिस्टम में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसमें अब पहले से अधिक फायदा किसानों और खाद कंपनियों दोनों को मिलेगा।
उर्वरक सब्सिडी सिस्टम क्या है
किसानों को खाद कम दामों में मिल सके, इसके लिए सरकार सब्सिडी पर उर्वरक उपलब्ध कराती है। इसी प्रक्रिया को उर्वरक सब्सिडी सिस्टम कहा जाता है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ इस सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब उर्वरक सब्सिडी सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है।
सरकार ने ऑनलाइन प्रोसेस करने वाली एकीकृत ई-बिल प्रणाली की शुरुआत की है, जिसके तहत सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी को शामिल किया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब खाद कंपनियों द्वारा सब्सिडी का क्लेम, भुगतान और निगरानी, सभी कार्य एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे। आइए जानते हैं इससे होने वाले फायदे।
ई-बिल प्रणाली से उर्वरक सब्सिडी सिस्टम में क्या बदलाव होगा
ई-बिल प्रणाली के लागू होने से उर्वरक सब्सिडी सिस्टम में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। अब सभी तरह के लेनदेन डिजिटल होंगे और पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के विजन को इस व्यवस्था में साफ तौर पर देखा जा सकता है।
उर्वरक सब्सिडी सिस्टम में पैसों का लेनदेन भी अब पूरी तरह डिजिटल होगा, जिससे कंपनियों के साथ-साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा। सब्सिडी के डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कागजी बिलों की जरूरत खत्म हो जाएगी। वित्तीय कार्यप्रणाली आधुनिक बनेगी।
कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक सभी तरह के भुगतान एक ही सिस्टम पर ट्रैक किए जा सकेंगे, जिससे निगरानी बेहतर होगी। अब सब्सिडी का भुगतान समय पर हो सकेगा। यदि भुगतान में देरी होती है या किसी तरह की शंका होती है, तो दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। भुगतान सुरक्षित होगा, उसे ट्रेस किया जा सकेगा और ऑडिट करना भी आसान हो जाएगा। जिससे समय पर काम होंगे
