Credit Card – आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन बिल भुगतान को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। सही समय पर पेमेंट (payment) करना क्यों जरूरी है और इससे जुड़ी कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखनी चाहिए, यह जानना हर कार्ड यूज़र के लिए जरूरी हो गया है… तो चलिए आइए जान लेते है आज इस खबर में-
आज डेबिट कार्ड की तरह ही लोग क्रेडिट कार्ड का भी खूब इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन क्रेडिट कार्ड की पेमेंट को लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन बनी रहती है, क्योंकि भुगतान का समय सीधे आपके क्रेडिट स्कोर (credit score) को प्रभावित करता है। ऐसे में एक आम सवाल उठता है कि क्या क्रेडिट कार्ड की पेमेंट (credit card payment) के लिए ड्यू डेट तक इंतजार करना सही होता है या नहीं?
जानें कब करनी चाहिए पेमेंट-
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड की पेमेंट समय पर होना सबसे अहम है। चाहे आप स्टेटमेंट जनरेट होते ही भुगतान कर दें या फिर ड्यू डेट पर पेमेंट (due date payment) करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। समय पर भुगतान करने पर आपका क्रेडिट स्कोर पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
लेकिन अगर आप लेट पेमेंट करते हैं, तो इसका सीधा असर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (credit histroy) पर पड़ता है और क्रेडिट स्कोर भी गिर सकता है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की वित्तीय परेशानी न हो।
पूरा करें भुगतान-
क्रेडिट कार्ड बिल का केवल न्यूनतम अमाउंट (minimum amount) ही नहीं, बल्कि पूरा बकाया भुगतान करना बेहतर होता है। सिर्फ मिनिमम अमाउंट चुकाने से आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए हर महीने पूरे बिल की पेमेंट (bill payment) करना न भूलें।
क्रेडिट कार्ड लिमिट का 30% से ज्यादा इस्तेमाल न करें-
क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट (Full credit card limit) यानी 100 फीसदी उपयोग करने से बचना चाहिए। आमतौर पर सलाह दी जाती है कि कार्ड की कुल लिमिट का 30 फीसदी तक ही इस्तेमाल करें। इससे आप जरूरत से ज्यादा कर्ज में फंसने से बचते हैं और आपका क्रेडिट स्कोर भी बेहतर बना रहता है।
जुटाएं इमरजेंसी फंड-
क्रेडिट कार्ड के भरोसे ही न रहें, बल्कि हमेशा इमरजेंसी फंड (emergency fund) भी तैयार रखें। इससे भविष्य में किसी भी अचानक आने वाली परेशानी का सामना आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर रकम इमरजेंसी फंड के रूप में बैंक खाते में रखना चाहिए।
