भारत और अमेरिका के रिश्ते हमेशा से दुनिया की राजनीति में अहम माने जाते रहे हैं। जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे तो उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकियां बेहद चर्चा में थीं। शुरुआती दौर में दोनों नेताओं के रिश्तों को “ब्रोमांस” तक कहा गया। बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक-दूसरे की मौजूदगी, Howdy Modi और Namaste Trump जैसे आयोजन इस दोस्ती की मिसाल बने।
लेकिन समय के साथ यह दोस्ती दरारों में बदलती गई। अब हालात ऐसे हैं कि दोनों के बीच न केवल टैरिफ विवाद ने खाई पैदा की, बल्कि फोन कॉल तक का जवाब न देने की स्थिति आ गई। आखिर किन वजहों से मोदी-ट्रंप के रिश्तों में यह ठंडापन आया? आइए समझते हैं 5 बड़ी वजहें।
1. कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप का बयान (जुलाई 2019)
जुलाई 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता की गुजारिश की है। भारत सरकार ने तुरंत इसका खंडन किया। यह बयान भारत के लिए चौंकाने वाला था क्योंकि कश्मीर हमेशा से भारत का आंतरिक मामला माना जाता है। यही वह पल था जिसने रिश्तों में पहली दरार डाली।
2. 2024 की अमेरिका यात्रा और कमला हैरिस से मुलाकात न होना
2024 में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान ट्रंप और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात न हो पाना भी रिश्तों में ठंडक लाने वाला बड़ा कारण बना। यह एक ऐसा अवसर था जब भारत और अमेरिका के रिश्ते और गहरे हो सकते थे, लेकिन इस चूक ने दोनों देशों की राजनीतिक समीकरण पर असर डाला।
3. व्यापार समझौते पर मतभेद
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से एक व्यापक व्यापार समझौते की कोशिश चल रही थी। लेकिन टैरिफ, मार्केट एक्सेस और अमेरिकी कंपनियों के हितों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद लगातार गहराते गए। ट्रंप प्रशासन की कड़ी नीतियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया। मोदी सरकार ने घरेलू उद्योगों के हितों को प्राथमिकता दी, जिसके चलते यह समझौता कभी साकार नहीं हो पाया।
4. भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर श्रेय लेने की होड़
ट्रंप कई मौकों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने का श्रेय लेने की कोशिश करते रहे। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से दावा किया कि भारत-पाक वार्ता में उनकी मध्यस्थता से प्रगति हुई है। जबकि भारत ने हमेशा ऐसे दावों को नकारा और स्पष्ट किया कि यह उसका द्विपक्षीय मुद्दा है। इससे दोनों नेताओं के बीच अविश्वास की खाई और गहरी होती गई।
5. G7 के बाद पाकिस्तानी जनरल से मुलाकात और व्हाइट हाउस का विवाद
जी-7 सम्मेलन के बाद ट्रंप ने पाकिस्तानी जनरल असीम मुनीर से मुलाकात की, जिसे भारत ने अच्छे संकेत के रूप में नहीं देखा। इसके अलावा व्हाइट हाउस से मोदी को भेजे गए विशेष निमंत्रण को पीएम मोदी ने अस्वीकार कर दिया। इसे ट्रंप प्रशासन ने अपमान की तरह लिया, और रिश्ते और बिगड़ गए।
निष्कर्ष
शुरुआत में मोदी और ट्रंप के बीच जो तालमेल नजर आया था, वह अब इतिहास बन चुका है। ब्रोमांस की जगह अब अविश्वास और टकराव ने ले ली है। टैरिफ विवाद, कश्मीर मुद्दा और पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की नीति, इन सभी ने मिलकर रिश्तों की दिशा बदल दी।
भारत और अमेरिका दोनों ही रणनीतिक रूप से एक-दूसरे के लिए बेहद अहम हैं। लेकिन मोदी-ट्रंप समीकरण इस बात की मिसाल हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते भी देशों के बीच संबंधों पर गहरा असर डालते हैं।