अगर किसान ऐसी गेहूं की वैरायटी लगाना चाहते हैं, जिसकी कीमत सामान्य गेहूं से करीब तीन गुना ज्यादा, तो आज इसी खास गेहूं के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।
गेहूं की सोना मोती वैरायटी
धान और गेहूं की कई तरह की वैरायटी बाजार में उपलब्ध हैं। अगर गेहूं की कीमत की बात करें, तो मध्य प्रदेश में इस समय गेहूं का एमएसपी किसानों को ₹2600 प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। मंडी में बेहतर गुणवत्ता वाले गेहूं का भाव ₹2500 से ₹3000 या ₹3200 प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। लेकिन यहां जिस गेहूं की वैरायटी की बात कर रहे हैं, उसका भाव ₹8000 प्रति क्विंटल तक मिलता है। दरअसल, यह 4000 साल पुरानी सोना मोती गेहूं की देसी वैरायटी है।
यह शुगर फ्री मानी जाती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए इसकी रोटी काफी फायदेमंद होती है। इस गेहूं से बनी रोटी खाने से शुगर कंट्रोल में मदद मिलती है। इसी कारण इस वैरायटी की कीमत ज्यादा होती है। इसमें फोलिक एसिड की मात्रा भी अच्छी होती है, जो सामान्य गेहूं में नहीं पाई जाती। आइए जानते हैं कि इसके बीज कहां मिलते हैं, कौन किसान इसकी खेती कर रहे हैं और खाद पर खर्च कैसे बचाया जा रहा है।
सोना मोती गेहूं की खेती कहां हो रही है
गेहूं एक पारंपरिक फसल है, लेकिन इसकी उन्नत और देसी वैरायटी की जानकारी कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों को देते रहते हैं। आज राजस्थान के भरतपुर जिले के नगला चुरामन गांव के किसान हरभान सिंह की बात कर रहे हैं। उन्होंने इस गेहूं की खेती की जानकारी काफी पहले प्राप्त की थी। शुरुआत में उन्हें केवल 25 ग्राम बीज मिला था। उस 25 ग्राम बीज से उन्होंने 6 किलो तक उत्पादन किया। धीरे-धीरे बीज बढ़ता गया और आज वह लगभग 3 एकड़ में सोना मोती गेहूं की खेती कर रहे हैं।
किसान बताते हैं कि सामान्य गेहूं की तुलना में इसका उत्पादन लगभग आधा होता है, लेकिन कीमत तीन गुना ज्यादा मिलती है, इसलिए कुल मिलाकर मुनाफा अधिक होता है। साथ ही इसकी खेती में खर्च भी कम आता है, क्योंकि इसमें पूरी तरह जैविक खाद का उपयोग किया जाता है। किसी भी तरह का रासायनिक खाद या कीटनाशक इसमें नहीं डाला जाता।
गेहूं की फसल के लिए घर पर खाद कैसे बनाएं
किसान बताते हैं कि गेहूं की फसल के लिए घर पर ही जैविक खाद और स्प्रे तैयार किया जा सकता है। इसके लिए 5 किलो सामान्य मिट्टी लें, बंजर जमीन की मिट्टी भी ली जा सकती है। इसके बाद 250-250 ग्राम कपूर, फिटकरी और हल्दी लें। एक किलो गुड़ और 200 लीटर पानी मिलाएं।
इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर 48 घंटे तक ढककर रखें। इसके बाद इस घोल को खेत में स्प्रे करें। इससे फसल में झुलसा रोग जैसे रोग नहीं लगते, मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और उत्पादन सुरक्षित रहता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सोना मोती या किसी भी गेहूं की खेती में खरपतवार नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए 3 साल में एक बार हल से गहरी जुताई करनी चाहिए। इससे खरपतवार अपने आप कम हो जाती है और खरपतवार नाशक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। इससे खेती का खर्च और भी कम हो जाता है।
सोना मोती गेहूं के बीज कहां मिलेंगे
सोना मोती गेहूं एक देसी वैरायटी है, जिसकी जैविक खेती करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। किसान बताते हैं कि वह इसकी बिक्री मंडी में नहीं करते। वे सीधे उपभोक्ताओं को ऑनलाइन और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए गेहूं बेचते हैं। दूसरे राज्यों से भी लोग उनके पास गेहूं और बीज खरीदने आते हैं।
उन्होंने कई राज्यों में इसके बीज की बिक्री की है। इस गेहूं की बालियां मजबूत होती हैं और दाना पौष्टिक होता है। अगर पशुओं के चारे के लिए इसकी खेती की जाए, तो इसका भूसा भी पशुओं के लिए काफी लाभदायक माना जाता है।
किसान सरकार से भी मांग कर रहे हैं कि जैविक खेती करने वाले किसानों को उचित बाजार उपलब्ध कराया जाए। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में जैविक बाजार शुरू हो रहे हैं, जहां किसान अपने जैविक उत्पाद सीधे बेच सकते हैं। अगर सोना मोती गेहूं के बीज चाहिए, तो किसान हरभान सिंह से संपर्क कर सकते हैं। मोबाइल नंबर है 6378443388। यह गेहूं कई बीमारियों से बचाने में सहायक है और खेती के खर्च को भी कम करता है।
