कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जापान के कृषि विशेषज्ञों का एक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। ये दौरा उत्तर प्रदेश सरकार और जापान के बीच हुए समझौते का हिस्सा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने खुद प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और शाकभाजी अनुभाग कल्याणपुर का भ्रमण कराया। जापानी पक्ष के सलाहकार डॉ. इशिकावा कोजी ने बताया कि उनका मकसद जापान की उन्नत कृषि तकनीक को भारत लाकर किसानों की कमाई बढ़ाना है। इससे खेती मजबूत होगी और गांवों की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
प्रतिनिधिमंडल में जापान के दूतावास के अधिकारी ओता मसामी, कुबोता कंपनी के अमन और टोमैटेक कंपनी के अकिनोरी कोजाकी जैसे लोग शामिल थे। विश्वविद्यालय की तरफ से निदेशक शोध डॉ. आरके यादव, डॉ. पीके सिंह, डॉ. केशव आर्य समेत कई वैज्ञानिक मौजूद रहे। सबने मिलकर शोध परीक्षणों और नई तकनीकों पर बात की।
जापानी सूक्ष्म पोषक तत्वों से 40 फीसदी ज्यादा पैदावार
दौरे के दौरान जापानी कंपनी टोमैटेक के शोध परीक्षणों को देखा गया। ये परीक्षण फूलगोभी और मूली की फसलों पर सूक्ष्म पोषक तत्वों के असर को जानने के लिए चल रहे हैं। कंपनी के अकिनोरी कोजाकी ने बताया कि उनके खास उर्वरकों के इस्तेमाल से सब्जियों की पैदावार में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। ये उर्वरक पौधों को जरूरी मिनरल्स देते हैं, जिससे फल बड़े, स्वादिष्ट और ज्यादा होते हैं। यूपी की मिट्टी और मौसम में ये तकनीक सफल रही तो किसान भाइयों को बड़ा फायदा होगा।
हाइड्रोपोनिक तकनीक से मीठे चेरी टमाटर, दोगुनी कमाई
सबसे दिलचस्प रहा पॉलीहाउस में लगी जापानी आईमेक हाइड्रोपोनिक तकनीक का अवलोकन। डॉ. आरके यादव ने बताया कि इस तरीके से चेरी टमाटर उगाए जा रहे हैं, जो आम टमाटर से दोगुने मीठे हैं। बाजार में इनकी कीमत 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रही है। मिट्टी के बिना पानी और पोषक तत्वों के घोल में पौधे उगते हैं, इससे पानी की बचत होती है और पैदावार ज्यादा। अगर ये तकनीक यूपी के मौसम में पूरी तरह फिट बैठी तो पहले विश्वविद्यालय के खेतों में बड़ा स्तर पर अपनाई जाएगी, फिर किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
वर्किंग ग्रुप बनाकर काम तेज
प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि परियोजना को जल्दी अमल में लाने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनेगा। इसमें जापान के अधिकारी, कंपनियों के लोग, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये ग्रुप कार्ययोजना बनाएगा और समय-समय पर आगे की रणनीति तय करेगा। कुल मिलाकर ये सहयोग यूपी के सब्जी किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। नई तकनीक से लागत कम होगी, पैदावार बढ़ेगी और बाजार में अच्छे दाम मिलेंगे।
