अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ का असर भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसमें क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGS) को मजबूत करना, कोलेट्रल-फ्री लोन की सीमा बढ़ाना और कर्मचारियों को प्रत्यक्ष आय सहायता (Direct Income Support) देने जैसी योजनाएं शामिल हो सकती हैं।
MSME सेक्टर को मिलेगी राहत
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का पहला फोकस अप्रत्यक्ष सहायता पर होगा। इसके तहत क्रेडिट गारंटी योजना के जरिए एमएसएमई को आसान वित्तीय मदद दिलाने पर काम हो रहा है। साथ ही बिना गिरवी (Collateral Free) ऋण सीमा को मौजूदा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक किया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस प्रस्ताव पर काम कर रहा है और उम्मीद है कि यह योजना सितंबर की शुरुआत तक लागू हो जाएगी।
क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGS) की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। इसका संचालन क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) करता है। इस योजना के तहत यदि कोई एमएसएमई इकाई ऋण चुकाने में असमर्थ रहती है, तो ट्रस्ट बैंक और वित्तीय संस्थानों को बकाया राशि का 75% से 90% तक भुगतान करता है।
कर्मचारियों के लिए डायरेक्ट इनकम सपोर्ट
सरकार एमएसएमई में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए भी विशेष योजना पर विचार कर रही है। प्रत्यक्ष आय सहायता योजना (Direct Income Support) लाकर, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यदि टैरिफ का असर नौकरी पर पड़ता है तो प्रभावित कर्मचारियों को आर्थिक सहारा मिल सके। यह कदम रोजगार सुरक्षा की दिशा में सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से बढ़ेगी ताकत
सूत्रों के अनुसार, सरकार 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित 25,000 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत एक पैकेज तैयार कर रही है। इसमें सस्ते ऋण, निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच और ऊंचे टैरिफ के असर को कम करने जैसे उपाय शामिल होंगे। इस पैकेज को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने की संभावना है।
निर्यातकों को सरकार का भरोसा
28 अगस्त को भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (FIEO) के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और टैरिफ वृद्धि से उत्पन्न चुनौतियों को रखा। वित्त मंत्री ने निर्यातकों को आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा फोकस रोजगार और श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा पर है। साथ ही उद्योग जगत से अपील की कि वे भी कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाएं कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनकी नौकरियों पर कोई खतरा नहीं आएगा।
FIEO की चिंता
FIEO अध्यक्ष एस.सी. राल्हन ने कहा कि बढ़ते टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके चलते बाजार पहुंच सीमित हो रही है और रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से तत्काल और सुविचारित कदम उठाने की मांग की।
निष्कर्ष
अमेरिका के टैरिफ भारत के लिए एक बड़ी चुनौती हैं, लेकिन सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि वह एमएसएमई क्षेत्र और निर्यातकों को हरसंभव सहारा देगी। आने वाले हफ्तों में कोलेट्रल-फ्री लोन सीमा बढ़ाने, डायरेक्ट इनकम सपोर्ट योजना और एक्सपोर्ट प्रमोशन पैकेज जैसे कदम इस दिशा में अहम साबित हो सकते हैं।