मिडिल ईस्ट युद्ध से गैस दाम ढाई गुना बढ़े, लेकिन अदाणी टोटल गैस ने CNG-PNG कीमतें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्थिर रखीं। 70% घरेलू गैस से कार-रसोई बजट सुरक्षित। औद्योगिक ग्राहकों पर 40% सीमा के बाद 119 रुपये/यूनिट स्पॉट रेट। CEO: “आमजन के हित पहले।” लाखों यूजर्स को फायदा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार में उथल-पुथल मच गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रुकने और गैस सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक कीमतें ढाई गुना तक उछल चुकी हैं- 10 डॉलर से बढ़कर 25 डॉलर प्रति यूनिट। ऐसे में भारत में CNG और PNG महंगे होने की आशंका थी, लेकिन अदाणी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने आम घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कंपनी ने CNG (वाहनों के लिए) और PNG (घरेलू रसोई गैस) की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, जबकि औद्योगिक ग्राहकों पर सख्ती बरती है।
जनवरी की कटौती और घरेलू राहत
यह फैसला तब आया है जब जनवरी 2026 में PNGRB के टैरिफ रिफॉर्म के बाद ATGL ने पहले ही CNG-PNG दाम 0.50 से 4 रुपये तक घटाए थे। गुजरात, महाराष्ट्र, MP जैसे राज्यों में CNG 1.90 रुपये/किग्रा सस्ता हुआ, वहीं PNG 1.10-4 रुपये/SCM तक कम हुई। NCR, UP, राजस्थान, पंजाब-हरियाणा में भी इसी तरह की कटौती हुई। मध्य-पूर्वी क्षेत्रों में CNG 4.05 रुपये/किग्रा तक सस्ती मिली।
ATGL की कुल गैस आपूर्ति का 70% घरेलू स्रोतों से आता है, जो सीधे CNG स्टेशनों और PNG पाइपलाइनों को सप्लाई होता है। कंपनी के अनुसार, इन ग्राहकों के लिए दरें अपरिवर्तित रहेंगी, जिससे दिल्ली-NCR सहित लाखों परिवारों और वाहन चालकों का बजट बचेगा।
औद्योगिक ग्राहकों पर नई नीति
दूसरी ओर, 30% आयातित गैस पर निर्भर कमर्शियल-औद्योगिक ग्राहकों को झटका लगा है। मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित स्पॉट मार्केट दरें 119 रुपये/यूनिट तक पहुंच गई हैं। ATGL ने नीति साफ कर दी- औद्योगिक इकाइयों को अपनी औसत जरूरत का मात्र 40% ही पुरानी दरों (लगभग 40 रुपये/यूनिट) पर मिलेगा। अतिरिक्त मात्रा पर स्पॉट रेट चुकानी पड़ेंगी, जो MSMEs और फैक्ट्रियों के लिए चुनौती बनेगी। कंपनी का तर्क है कि यह कदम सप्लाई चेन को स्थिर रखने और घरेलू प्राथमिकता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
विशेषज्ञ विश्लेषण और CEO बयान
विशेषज्ञों का मानना है कि ATGL का यह कदम उपभोक्ता-केंद्रित रणनीति दर्शाता है। पश्चिम एशिया युद्ध (इजरायल-ईरान तनाव और हूती हमलों) ने LNG जहाजों को रीडायरेक्ट किया, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर दबाव बढ़ा। फिर भी, ATGL ने घरेलू उत्पादन (रिलायंस और ONGC जैसे स्रोतों) पर निर्भरता बढ़ाकर संकट टाला। CEO सुजल शाह ने कहा, “चुनौतीपूर्ण समय में भी हम आमजन के हितों की रक्षा करेंगे और बिना रुके सप्लाई देंगे।”
उपभोक्ताओं पर प्रभाव
यह राहत खासतौर पर दिल्ली, अहमदाबाद, भोपाल जैसे ATGL के 50+ शहरों में लाखों यूजर्स के लिए मायने रखती है। जहां पेट्रोल-डीजल 100 रुपये/लीटर को पार कर चुके हैं, वहां CNG की स्थिरता वाहन मालिकों को सस्ता विकल्प देती है। PNG यूजर्स को रसोई खर्च में स्थिरता मिलेगी, जो मध्यम वर्ग के लिए वरदान है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन लागत बढ़ने से उपभोक्ता वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
कुल मिलाकर, ATGL ने भू-राजनीतिक तूफान में स्थिरता का संदेश दिया है। सरकार की गैस सेल्फ-सफिशिएंसी नीति यहां कारगर साबित हो रही है। क्या यह ट्रेंड बाकी कंपनियां (IGL, MGL) अपनाएंगी? आने वाले दिन बताएंगे।
