कस्तूरी भिंडी की खेती करके महिलाएं कम पैदावार में भी खेती से अधिक आमदनी कमा रही हैं। आइए जानते हैं कस्तूरी भिंडी की खेती का समय, तरीका और इसकी कीमत।
कस्तूरी भिंडी की कीमत कितनी रही है
कस्तूरी भिंडी एक औषधीय फसल है। इससे सुगंधित बीज निकलते हैं, जिनका इस्तेमाल इत्र और आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में किया जाता है। कस्तूरी भिंडी की खेती में किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में कस्तूरी भिंडी की खेती की जा रही है। खंडवा जिले की महिलाएं आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और कस्तूरी भिंडी की खेती करके अच्छी कमाई कर रही हैं। बता दें कि कस्तूरी भिंडी की कीमत 25,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। आइए जानते हैं कि इससे कितना उत्पादन मिल रहा है।
कस्तूरी भिंडी की फसल से कितना उत्पादन मिलता है
कस्तूरी भिंडी की फसल से उत्पादन के बारे में महिला किसानों का कहना है कि एक एकड़ से 7 से 10 क्विंटल तक बीज मिलता है, जो अच्छी कीमतों पर बिकता है। इससे कस्तूरी भिंडी की खेती उनकी आय का बेहतर साधन बन चुकी है, और वे आगे भी इसकी खेती करने जा रही हैं।
कस्तूरी भिंडी की खेती का समय
महिलाओं ने कस्तूरी भिंडी की खेती जून–जुलाई में की थी, जो अब तैयार हो चुकी है। अब वे फरवरी–मार्च में फिर से इसकी खेती कर सकती हैं। कस्तूरी भिंडी की फसल 120 से 140 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी खेती के लिए जैविक खाद, जैसे गोबर खाद, का इस्तेमाल किया जाता है। बुवाई कतारों में की जाती है, जिसमें कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखी जाती है। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई की जाती है और आगे चलकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जाती है।
कस्तूरी भिंडी की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। खेत में पानी निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए, यानी खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। खरपतवार नियंत्रण के लिए खेत की तैयारी के समय दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए। कस्तूरी भिंडी की पत्तियां, कच्चे फल और बीज का उपयोग खाने में भी किया जाता है।
