वित्त मंत्रालय ने संसद में लिखित जवाबों में यह साफ किया है कि लोन लेने वालों के लिए CIBIL स्कोर का महत्व क्या है, और क्या सरकार इसे किसी नई संस्था से बदलने वाली है।
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🔹 CIBIL स्कोर क्यों ज़रूरी है?
मंत्री के मुताबिक, RBI बैंकों को निर्देश देता है कि वे उधार लेने वाले की जानकारी अलग-अलग स्रोतों से जांचें। इसमें CIBIL जैसी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों (CICs) का डेटा भी शामिल है।
- बैंक देखते हैं कि ग्राहक ने पहले लोन की किस्तें समय पर चुकाई हैं या नहीं।
- कहीं लोन सेटल, रीस्ट्रक्चर या लिखा-खर्चा (write-off) तो नहीं हुआ।
👉 इससे बैंक को उधार देने का सही फैसला लेने में मदद मिलती है।
🔹 क्या बिना CIBIL स्कोर के लोन मिल सकता है?
RBI ने न्यूनतम स्कोर तय नहीं किया है।
- लोन देने का फैसला बैंक अपनी नीतियों के हिसाब से करते हैं।
- क्रेडिट रिपोर्ट सिर्फ एक आधार होती है, पूरा निर्णय उसी पर नहीं होता।
- पहली बार लोन लेने वालों को केवल स्कोर न होने की वजह से मना नहीं किया जा सकता।
🔹 CIBIL स्कोर की फीस कितनी है?
- RBI के नियमों के अनुसार, अपनी क्रेडिट रिपोर्ट लेने पर ₹100 से ज्यादा शुल्क नहीं लिया जा सकता।
- हर CIC को साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर ई-फॉर्मेट में देना अनिवार्य है।
🔹 CIBIL क्या करता है?
- CIBIL एक क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी है जिसे RBI नियंत्रित करता है।
- इसका काम ग्राहकों का वित्तीय और क्रेडिट रिकॉर्ड इकट्ठा करना, उसका विश्लेषण करना और बैंकों को उपलब्ध कराना है।
- CICs को डेटा कम से कम 7 साल तक सुरक्षित रखना होता है।
🔹 क्या सरकार CIBIL को बदलेगी?
2024 के बजट में सरकार ने National Financial Information Registry (NFIR) बनाने का ऐलान किया था, ताकि सभी वित्तीय जानकारी एक जगह उपलब्ध हो।
👉 लेकिन अभी सरकार के पास CIBIL को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
🔹 ग्राहकों की सुरक्षा के लिए RBI के कदम
- हर ग्राहक को साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर मिलना चाहिए।
- CIC में आंतरिक लोकपाल (Internal Ombudsman) होना चाहिए।
- जरूरत पड़ने पर ग्राहक RBI Ombudsman के पास जा सकते हैं।
- जब भी किसी का क्रेडिट रिपोर्ट चेक हो, ग्राहक को SMS/ईमेल अलर्ट मिलना चाहिए।
- यदि कोई किस्त बकाया हो या डिफॉल्ट हो, तो ग्राहक को संदेश भेजना जरूरी है।
- CICs को हर 6 महीने में ग्राहक शिकायतों की समीक्षा करनी होगी।