इलाहाबाद हाई कोर्ट की तरफ से बड़ा फैसला दिया गया है। सरकारी कर्मचारियों को सजा होने पर नौकरी के मामले में फैसला आया है। सरकारी कर्मचारियों को अपनी नौकरी पर यह यकीन होता है कि उन्हें हटाया नहीं जाएगा। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया है। आईए जानते हैं क्या है पूरा मामला –
सरकारी कर्मचारियों को सजा होने पर उसकी नौकरी चली जाएगी या नहीं। क्या सजा पूरी होने के बाद उसकी नौकरी वापस मिल जाएगी। सरकारी नौकरी को लेकर कर्मचारियों के मन में तमाम सवाल रहते हैं। एक सरकारी कर्मचारी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है, जिसमें कुछ हद तक कई सवालों का जवाब मिल गया है।
कोर्ट के फैसले बन जाते हैं नजीर
बहुत सारे मामले ऐसे होते हैं जो लगातार चर्चा में रहते हैं। जिनमें लोगों को असमंजस की स्थिति बनी रहती है। बहुत बार मामले अदालतों तक पहुंच जाते हैं। हाल ही में अदालत में एक फैसला (Allahabad high court) दिया गया है, यह फैसला एक नजीर के तौर पर काम करेगा। वैसे भी अदालत के फैसले बहुत सारे केसेज में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
अध्यापक को कर दिया बर्खास्त
मामला 1999 का है, जहां एक अध्यापक की नियुक्ति प्राइमरी स्कूल में सहायक टीचर के पद पर की गई थी। 2017 में अध्यापक का प्रमोशन भी हुआ था। इसी दौरान दहेज हत्या के केस में अध्यापक को सजा हो गई। 2009 में दर्ज केस में सत्र न्यायालय की ओर से अध्यापक को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनको बर्खास्त कर दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा मामला
अध्यापक को बर्खास्त किए जाने के बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high court Decision) में पहुंचा। इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से इस पर बड़ा निर्णय दिया गया है। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है कि क्या किसी को सजा होने के बाद उसको नौकरी से नहीं हटाया जा सकता है।
क्या दिया इलाहाबाद हाईकोर्ट में फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad high court latest verdict) की ओर से फैसला दिया गया कि कोर्ट से सजा मिलने के बाद किसी सरकारी कर्मचारियों को पद से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। बर्खास्त करने के लिए लेटर को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजा होने के बाद ना तो खुद से बर्खास्त किया जा सकता है ना ही रैंक कम किया जा सकता है। इसके लिए विभागीय जांच बहुत जरूरी है। विभागीय जांच के बिना कार्रवाई बिल्कुल नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया। इसमें सरकारी कर्मचारियों (Allahabad high court on employees) को अनुच्छेद 311(2) के तहत किसी सरकारी सेवक को न बर्खास्त किया जा सकता और न ही रैंक कम किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले के दौरान कहा की कानपुर देहात के सरकारी स्कूल के टीचर की बर्खास्तगी को अवैध माना जाए और इसे रद्द किया जाए।
नए सिरे से आदेश पारित करने के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से अनुच्छेद 311(2) के अनुसार 2 महीने के अंदर नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस मंजीव शुक्ल ने की। याचिकाकर्ता मनोज कटिहार की याचिका पर फैसला सुनाया गया। फैसले के वक्त कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की बहाली नए आदेश पर निर्भर करेगी।
