किसान भाइयों, हमारे खेतों की मेहनत देश की रीढ़ है, लेकिन कर्ज का बोझ अक्सर इस मेहनत पर भारी पड़ता है। महाराष्ट्र में एक बार फिर किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा सुर्खियों में है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने हाल ही में साफ़ कहा कि सरकार सिर्फ़ उन जरूरतमंद किसानों का कर्ज माफ करेगी, जो वाकई मुश्किल में हैं। जो लोग खेती की आड़ में फार्महाउस या बंगले बना रहे हैं, उन्हें इस राहत का कोई हक़ नहीं। इस बयान ने न सिर्फ़ राजनीति को गरमाया है, बल्कि किसानों के बीच भी उम्मीद की किरण जगाई है। आइए, इस खबर की सच्चाई और सरकार की योजना को समझें।
सिर्फ़ जरूरतमंदों को राहत
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 15 अगस्त 2025 को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में वादा किया था कि कर्ज माफी सिर्फ़ उन किसानों को मिलेगी, जिन्हें इसकी सख्त ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि कई लोग खेती के लिए लिए गए कर्ज का दुरुपयोग करके बंगले और फार्महाउस बना रहे हैं। ऐसे लोगों को राहत देने का कोई औचित्य नहीं। बावनकुले ने जोर देकर कहा कि सरकार का ध्यान उन गरीब किसानों पर है, जिनके खेतों में उपज नहीं हो रही या जो कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या के कगार पर हैं। ये बयान उन किसानों के लिए राहत की साँस है, जो सालों से कर्ज के जाल में फँसे हैं।
सर्वे से तय होंगे हकदार
कर्ज माफी को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने व्यक्तिगत सर्वे की योजना बनाई है। बावनकुले ने बताया कि सरकार एकमुश्त कर्ज माफी की जगह उन किसानों को चिह्नित कर रही है, जो वास्तव में संकट में हैं। हाल ही में हुए विधानमंडल के मॉनसून सत्र में विपक्ष ने सरकार से कर्ज माफी की समय-सीमा और दायरे पर सवाल उठाए थे। जवाब में, सरकार ने एक समिति गठित की है, जो कर्ज माफी की व्यवहार्यता और लागू करने के तरीके पर अध्ययन कर रही है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार अंतिम फैसला लेगी। ये कदम सुनिश्चित करेगा कि राहत सही हाथों तक पहुँचे।
राजनीति का गरमाया मुद्दा
कर्ज माफी का मुद्दा महाराष्ट्र में हमेशा से संवेदनशील रहा है। पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान महायुति सरकार (भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना, और अजित पवार की राकांपा) ने किसानों के लिए कर्ज माफी का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के छह महीने बाद भी इस वादे पर अमल नहीं हुआ, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिला। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महायुति ने कर्ज माफी का वादा करके किसानों का वोट लिया, लेकिन अब उन्हें कर्ज चुकाने को कहा जा रहा है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मार्च 2025 में कहा था कि राज्य की वित्तीय स्थिति कर्ज माफी की इजाज़त नहीं देती।
किसानों का दर्द, विपक्ष का शोर
महाराष्ट्र में 2023 में 2,851 किसानों ने कर्ज और खराब फसल की वजह से आत्महत्या की थी, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। विपक्षी दल, खासकर महा विकास अघाडी (MVA), सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। “फडणवीस ने वादा किया था कि सातबारा कोरा होगा, लेकिन किसान आज भी कर्ज के जाल में हैं।” दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि पुरानी कर्ज माफी योजनाएँ, जैसे 2017 की छत्रपति शिवाजी महाराज योजना और 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले योजना, पूरी तरह लागू नहीं हो पाईं। तकनीकी समस्याओं और डेटा ट्रांसफर की दिक्कतों ने इन योजनाओं को अटका दिया।
कर्ज माफी एक अस्थायी राहत हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक किसानों की समस्याओं का हल नहीं। सरकार को चाहिए कि कर्ज माफी के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, फसल बीमा का समय पर भुगतान, और सही जलवायु पूर्वानुमान जैसे कदम उठाए। नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके मिट्टी जाँच और फसल प्रबंधन की सलाह लें। ये छोटे कदम किसानों की आर्थिक स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं।
महाराष्ट्र के किसान भाई कर्ज माफी की आस में हैं, लेकिन सरकार का रुख साफ़ है, राहत सिर्फ़ जरूरतमंदों को। बावनकुले का बयान और सर्वे की योजना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसका असर तभी होगा जब ये जल्दी और पारदर्शी तरीके से लागू हो। विपक्ष का दबाव और किसानों का दर्द सरकार को तेज़ी से काम करने के लिए मजबूर कर रहा है।