1 एकड़ की जमीन से कम खर्चे में लाखों की कमाई करना चाहते हैं तो चलिए आपको आईटी इंजीनियर का जुगाड़ बताते हैं-
किसान की सफलता की कहानी
पढ़ाई करके लोग नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं और नौकरी मिलने के बाद उसी में लगे रहते हैं। लेकिन यहां पर आपको एक ऐसे किसान की कहानी बताने जा रहे हैं जो की पढ़ाई करके आईटी इंजीनियर बन गए। लेकिन फिर उन्होंने खेती शुरू कर दी। दरअसल, कोरोना काल में जब उन्हें वर्क फ्रॉम होम करना पड़ा तो ऐसे में खेती का जुनून चढ़ गया। जिसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती करने का फैसला लिया। लेकिन उनके पिताजी जो की एक शिक्षक थे और रिटायर हो चुके थे और अब वह खेती करते थे लेकिन रासायनिक खेती करते थे। तो उन्होंने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया।
उन्हें लगा की जैविक खेती में फायदा नहीं होगा। तो इसलिए नवरत्न तिवारी जो की एक आईटी इंजीनियर है, उन्होंने जमीन लीज पर लेना शुरू किया और 2 साल तक जमीन बदलते रहे। आखिरी में उन्हें इस खेती से इतना अच्छा तजुर्बा हो गया कि बीते वर्ष उन्होंने एक एकड़ की जमीन से चार लाख की कमाई कर ली है, और इस साल वह बताते हैं कि 6 लाख से ज्यादा उन्हें मुनाफा होगा। तो चलिए आपको बताते हैं वह कौन सी फसलों की खेती इस साल कर रहे हैं, और फिर जानेंगे कि खाद का पैसा बचाने के लिए क्या करते हैं, किस तरीके से खेती करते हैं।
मल्टीलेयर फार्मिंग से फायदा ही फायदा
दरअसल, किसान मल्टी लेयर फार्मिंग करते हैं। जिसमें कई सारी फसलों को एक साथ लगाया जाता है। पिछले साल उन्होंने तीन फसलों को लगाया था। लेकिन इस बार उन्होंने एक साथ पांच फसलों की खेती खेती की है। जिसमें एक एकड़ की जमीन में उन्होंने मक्का, लोबिया और ककड़ी की खेती की है। जिसमें लोबिया उन्होंने दोनों फसलों को नाइट्रोजन देने के लिए और मल्चिंग के लिए लगाया है। इसके अलावा दूसरे जमीन में उन्होंने पपीता, परवल और कुंदरू की खेती की है।
इसके अलावा अदरक और गर्मी में धनिया की खेती भी करते हैं, तो चलिए आपको बताते हैं वह कौन सा तरीका अपनाते हैं जिससे खेती की लागत कम होती है, मुनाफा ज्यादा होता है।
खेती का यह तरीका बचाता है पैसा
जैविक खेती करते हैं, जिसमें पैसे की बचत होती है। रासायनिक खाद और कीटनाशक पर खर्च नहीं होता वह। जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं। जिससे मिट्टी उपजाऊ होती है। मिट्टी में केंचुआ की संख्या बढ़ती है, जो की जैविक खाद बनाते हैं। वह बताते हैं कि ड्रिप का इस्तेमाल करते हैं जिससे पानी की बचत होती है, और ड्रिप से जीवामृत भी देते हैं।
बेड बनाकर खेती करते हैं। जिससे पौधों को बरसात में ज्यादा पानी नहीं मिलता है, और बीच-बीच में जो नाली रहती है, वह पानी जमीन के भीतर चला जाता है। पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं होता है, तो किसानों को बेड बनाकर ही सब्जियों की खेती करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने बेल वाली सब्जियों को सपोर्ट देने के लिए बांस और तार लगाया हुआ है।