Pay Commission : 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फैसला नलिया गया है। बता दें कि सरकार अब जल्द ही कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) को लागू करने जा रही है। इस वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों को कई खास तरह की सुविधा मिलने वाली है। आइए जानते हैं 8वें वेतन आयोग से जुड़ी पूरी जानकारी।
अगर आप भी एक केंद्रीय कर्मचारी है तो ये खबर आपके काफी काम की हो सकती है। सरकार अब जल्द ही नए वेतन आयोग को लागू करेगी। इस वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों (Update for Employees) को कई तरह की खास सुविधाएं मिलने वाली है। साथ ही में कर्मचारियों की सैलरी में भी तगड़ा उछाल आएगा। खबर के माध्यम से जानते हैं 8वें वेतन आयोग से जुड़े इस अपडेट के बारे में पूरी डिटेल।
8वें वेतन आयोग को लेकर संगठन ने की मांग
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों (Update for employees) के संगठनों की मांगें लगातार सामने आ रही हैं। ठीक इसी कड़ी में अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी संघ ने भी कुछ अहम प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत पटेलगुरुवार (12 मार्च 2026) को शिव गोपाल मिश्रा से मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक (New Pay Commission) में वे चाह रहे हैं कि उनकी प्रमुख मांगों को संयुक्त परामर्श तंत्र की राष्ट्रीय परिषद के साझा मेमोरेंडम में शामिल कर दिया जाएगा। इसको जल्द ही 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई को सौंप दिया जाएगा।
जानिये क्या है कर्मचारियों की मांग
फेडरेशन की सबसे बड़ी मांग ये है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े सभी आदेश केंद्र शासित प्रदेशों (Update for UT Employees) और केंद्रीय स्वायत्त निकायों (CAB) के कर्मचारियों पर भी तुरंत लागू कर दिया जाए। फिलहाल कई मामलों में ऐसा देखने को मिल रहा है कि केंद्र सरकार के आदेश इन कर्मचारियों (Pay Commission News) तक या तो देर से पहुंचते हैं या लागू ही नहीं होते। उदाहरण के तौर पर 2021 का पेंशन आदेश और 2025 की यूनिफाइड पेंशन स्कीम का आदेश अभी तक कई CAB कर्मचारियों पर लागू नहीं हुआ है। संगठन का मानना है कि 8वें वेतन आयोग को इस असमानता को खत्म कर दिया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा फैसला
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी फेडरेशन के द्वारा भी अहम मांग की जा रही है। संगठन चाह रहा है कि UT और CAB कर्मचारियों को भी केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना की सुविधा मिल जाएं। फिलहाल जिन कर्मचारियों (Update for employees) की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के जरिए नहीं हुई है, उन्हें CGHS का लाभ नहीं मिलता है और उन्हें राज्य या स्थानीय स्वास्थ्य योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ जाता है। फेडरेशन का मानना है कि कई कर्मचारी नौकरी के दौरान अलग-अलग राज्यों में रहते हैं और रिटायरमेंट (retirement Plan) के बाद अपने गृह राज्य लौट जाते हैं, ऐसे में उनको कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती। CGHS सुविधा मिलने से उन्हें देशभर में इलाज की सुविधा मिल सकती है।
डिटेल में इन चीजों को किया गया है शामिल
फेडरेशन ने केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षकों के लिए छुट्टियों में भी बढ़ोतरी की मांग कर दी है। फिलहाल उन्हें साल में सिर्फ 8 कैजुअल लीव (CL) और 10 अर्न्ड लीव (EL) मिल जाती हैं, जिसको संगठन बहुत कम मानता है। उन्होंने मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के जरिए CL बढ़ाकर 14 और EL को 30 दिन किया जाएगा, इसकी वजह से शिक्षकों को भी अन्य कर्मचारियों की तरह पर्याप्त छुट्टियां मिल सकती है।
पैरेंटल केयर लीव” या “फैमिली केयर लीव की मांग
इसके अलावा संगठन ने पुरुष कर्मचारियों के लिए एक साल की “पैरेंटल केयर लीव” या “फैमिली केयर लीव” की भी मांग करी है। फिलहाल महिलाओं को बच्चों की देखभाल के लिए दो साल की चाइल्ड केयर लीव (CCL Leave for Women employees) दी जाती है। हालांकि पुरुष कर्मचारियों के पास परिवार या बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए कोई भी लंबी छुट्टी का विकल्प नहीं होता है। ऐसे में फेडरेशन का मानना है कि गंभीर बीमारी या विशेष परिस्थितियों में पुरुष कर्मचारियों (Women employees Latest Update) को भी एक साल की छुट्टी दी जानी चाहिए।
पुरुष कर्मचारियों को भी मिलेगी छूट्टी
इसके साथ संगठन ने पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को देखते हुए पुरुष कर्मचारियों को 15 दिन की अतिरिक्त छुट्टी देने की भी मांग कर रहा है। फिलहाल के तौर पर उन्हें 15 दिन की पितृत्व अवकाश (paternity leave) दिया जाता है, हालांकि परिवार से जुड़े अन्य जरूरी संस्कार या धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अलग से छुट्टी नहीं दी जाती है। फेडरेशन मा मानना है कि 8वां वेतन आयोग इस पर भी सकारात्मक फैसला ले रहा है। फिलहाल आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनरों और यूनियनों से वेतन, (basic salary Hike) पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े 18 सवालों पर सुझाव की मांग की है। कई कर्मचारी संगठन अपने-अपने प्रस्ताव को भेज रहे हैं।
