केंद्र सरकार ने नवंबर की शुरुआत में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। यह फैक्टर सीधे यह तय करता है कि आपकी बेसिक सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ेगी। लेकिन फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है और पिछली आयोगों में यह कितना रहा, आइए जानें।
फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है?
फिटमेंट फैक्टर किसी निश्चित फॉर्मूले से तय नहीं होता। इसे तय करते समय कई आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है, जैसे महंगाई दर, CPI और CPI-IW इंडेक्स, सरकारी बजट, वेतन पर कुल खर्च, और प्राइवेट सेक्टर में समान पदों का वेतन। इसका मुख्य उद्देश्य सैलरी-स्ट्रक्चर को संतुलित करना और कर्मचारियों को उचित बढ़ोतरी देना होता है।
पिछली वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर
पिछले आयोगों के आंकड़े देखें तो 6वें वेतन आयोग ने प्रारंभ में 1.74 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया था, जिसे बाद में कैबिनेट ने 1.86 तक बढ़ा दिया। वहीं 7वें वेतन आयोग में सभी कर्मचारियों के लिए समान 2.57 फैक्टर लागू हुआ। यह इस वजह से रखा गया था क्योंकि 125% DA जोड़ने के बाद वेतन लगभग 2.25 गुना हो गया था और आयोग ने इसमें अतिरिक्त 14% की बढ़ोतरी जोड़कर कुल 2.57 का मल्टीप्लायर तय किया।
क्या हर लेवल के लिए अलग फैक्टर होगा?
8वें वेतन आयोग में भी संभावना यही है कि फिटमेंट फैक्टर सभी लेवल (1–18) के लिए समान रखा जाएगा। अलग-अलग लेवल के लिए रैशनलाइजेशन इंडेक्स अलग हो सकता है, लेकिन फैक्टर उससे स्वतंत्र होता है। ध्यान दें कि आयोग की सिफारिशें अनिवार्य नहीं होतीं। जैसे 6वें वेतन आयोग में सरकार ने सुझाव से ज्यादा फैक्टर लागू किया था, उसी तरह 8वें आयोग में भी कैबिनेट अपनी आर्थिक स्थिति और प्राथमिकताओं के अनुसार फैक्टर बढ़ा या घटा सकती है।
DA, इंक्रीमेंट और परिवार यूनिट का असर
बढ़ते DA और दो वार्षिक इंक्रीमेंट के कारण वर्तमान वेतन लगभग 20% तक बढ़ चुका है। उदाहरण के लिए, 58% DA, अनुमानित 18 महीने का 7% DA और दो इंक्रीमेंट के 7% को जोड़ने पर मौजूदा 1.58 का रेशियो लगभग 1.78 तक पहुंच जाता है। एक्सपर्ट का अनुमान है कि अगर परिवार यूनिट 3 से बढ़ाकर 3.5 किया गया तो फैक्टर लगभग 1.98 हो सकता है, और महंगाई को शामिल करने पर यह 2.13 तक जा सकता है। यदि परिवार यूनिट 4 हो जाए, तो फैक्टर 2.64 तक भी पहुँच सकता है।
सैलरी और पेंशन पर असर
फिटमेंट फैक्टर सीधे आपके बेसिक पे और पेंशन पर असर डालता है। उदाहरण के लिए:
- अगर किसी कर्मचारी का बेसिक पे ₹18,000 है, तो 1.83 फैक्टर पर यह ₹32,940 और 2.46 फैक्टर पर ₹44,280 तक बढ़ सकता है।
- जिनका बेसिक ₹50,000 है, उनका नया बेसिक 1.83 फैक्टर पर ₹91,500 और 2.46 फैक्टर पर ₹1,23,000 तक पहुंच सकता है।
- पेंशनरों के लिए भी यही नियम लागू होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी की पेंशन कैलकुलेशन का बेसिक ₹25,000 है और 8वें वेतन आयोग में 2.0 फैक्टर लागू होता है, तो नया बेसिक ₹50,000 और नई पेंशन ₹25,000 तय होगी।
कुल मिलाकर, फिटमेंट फैक्टर और इसका निर्धारण कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी और पेंशन को सीधे प्रभावित करता है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ इसका असर आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
