8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल आपको बता दें कि आठवें वेतन आयोग को लेकर नए प्रस्तावों पर चर्चा तेज हो गई है, जिनमें हर साल सैलरी बढ़ाने और नए फिटमेंट फैक्टर new (fitment factor) का फॉर्मूला शामिल है… तो चलिए आइए नीचे खबर में समझ लेते है इसका पूरा कैलकुलेशन-
आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। डाक कर्मचारियों के संगठन FNPO ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है, जिसमें मल्टी-लेयर फिटमेंट फैक्टर (3.0 से 3.25 तक) और हर साल 5% सैलरी इंक्रीमेंट की मांग शामिल है। अगर यह फॉर्मूला स्वीकार किया गया, तो सैलरी बढ़ोतरी का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
8वें वेतन आयोग में “हर साल सैलरी बढ़ने” की मांग अचानक क्यों तेज हो गई है?
जवाब: क्योंकि मौजूदा सिस्टम में सैलरी बढ़ रही है, लेकिन महंगाई की रफ्तार के मुकाबले यह बढ़ोतरी (salary hike) पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
असल कारण-
– DA महंगाई की भरपाई करता है, ग्रोथ (growth) नहीं देता
– 3% सालाना इंक्रीमेंट (increment) अब “नाम मात्र” लगने लगा है
– प्राइवेट और संगठित सेक्टर से वेतन अंतर बढ़ता जा रहा है
– इसी बैकग्राउंड में 8th CPC को सिर्फ “पे रिविजन” नहीं, बल्कि इनकम ग्रोथ रिफॉर्म (income growth reform) के तौर पर देखा जा रहा है।
8th Pay Commission होता क्या है-
वेतन आयोग की ABCD
– वेतन आयोग केंद्र सरकार (central government) बनाती है
– मकसद: सैलरी, पेंशन और अलाउंस (allowance) की समीक्षा
– आमतौर पर हर 10 साल में बनता है
– सातवां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था
अब आठवें वेतन आयोग की चर्चाएं इसलिए तेज हैं क्योंकि-
– 7th CPC को एक दशक पूरा हो रहा है
– सैलरी स्ट्रक्चर (salary structure) पर दबाव बढ़ चुका है
जानें कब शुरू हुआ वेतन आयोग का सिस्टम-
बता दें कि देश में पहला वेतन आयोग 1946 में बना था। इसके बाद आमतौर पर हर 10 साल में नया आयोग आया।
अब तक के वेतन आयोग पर एक नजर-
वेतन आयोग – लागू वर्ष – बड़ी खासियत
1st Pay Commission – 1947 स्वतंत्र भारत की पहली सैलरी व्यवस्था
2nd – 1959 – वेतन ढांचे में सुधार
3rd – 1973 – महंगाई भत्ते को मजबूत किया
4th – 1986 – पे स्केल में बड़ा बदलाव
5th – 1996 – DA का बड़ा रोल
6th – 2006 – पे बैंड + ग्रेड पे
7th – 2016 – पे मैट्रिक्स सिस्टम
8th (प्रस्तावित) – 2026-27 – मल्टी-लेयर फिटमेंट फैक्टर?
क्या होता है Fitment Factor-
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है।
उदाहरण-
– अगर बेसिक सैलरी ₹18,000 है
– और फिटमेंट फैक्टर 2.57 है
– नई बेसिक = ₹46,260
7वें वेतन आयोग में यही 2.57 लागू हुआ था।
नया प्रस्ताव क्या आया है-
FNPO का बड़ा दांव: Multi-Level Fitment Factor-
Federation of National Postal Organisation (FNPO) ने आठवें वेतन आयोग के लिए एक ही फिटमेंट फैक्टर की जगह मल्टी-लेयर सिस्टम का सुझाव दिया है।
FNPO का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर ढांचा-
Level 1 से Level 5 (Foundational Levels)
Fitment Factor: 3.00
कारण-
– सबसे ज्यादा रियल वेज लॉस
– सबसे कम सैलरी बेस
Level 6 से Level 12 (Middle Levels)-
Fitment Factor: 3.05 से 3.10
मकसद-
– प्रमोशन और सीनियरिटी (seniority) का फर्क बना रहे
– Pay Compression से बचाव
Level 13 से 15 (Senior Administrative Levels)
– Level 13/13A: 3.05
-Level 14/15: 3.15
Level 16 से ऊपर (Apex Levels)
– Level 16: 3.20
– Level 17-18: 3.25
FNPO का तर्क: ऊपरी लेवल पर थोड़ा ज्यादा फैक्टर इसलिए, ताकि हायरार्की और जिम्मेदारी का फर्क खत्म न हो।
पांच प्रतिशत Annual Increment की मांग क्यों अहम है?
अभी क्या है?
– सालाना इंक्रीमेंट: 3%
FNPO क्या चाहता है?
– इसे बढ़ाकर 5% किया जाए
ये किसलिए जरूरी है?
– 3% इंक्रीमेंट से ग्रोथ “दिखती नहीं”
– लंबे समय तक एक ही लेवल पर रुकने से असंतोष
– प्राइवेट सेक्टर (private sector) से कंपैरिजन में सरकार पीछे
5 प्रतिशत इंक्रीमेंट से-
– सैलरी प्रोग्रेशन (salary progession) साफ दिखेगी
– स्टैगनेशन कम होगा
– सरकारी नौकरी की आकर्षण शक्ति बढ़ेगी
क्या सातवें वेतन आयोग का Pay Matrix समाप्त होगा-
उत्तर: नहीं
FNPO ने स्पष्ट कहा है कि 7th CPC का Pay Matrix सिस्टम जारी रहना चाहिए।
क्यों?
– सैलरी फिक्सेशन में पारदर्शिता
– हर इंक्रीमेंट के बाद सटीक बेसिक पता
– कोर्ट केस (court case) और पे अनोमली कम
यानी नया वेतन आयोग आए, लेकिन सिस्टम वही रहे- फॉर्मूला बदले.
आपके लिए इसका क्या अर्थ है?
अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं, तो इसका मतलब क्या है?
– सैलरी सिर्फ एक बार नहीं, हर साल ज्यादा बढ़ सकती है
– लोअर लेवल कर्मचारियों को बड़ा फायदा
– प्रमोशन (promotion) और सीनियरिटी का फर्क बना रहेगा
– पेंशन बेस भी मजबूत होगा (क्योंकि बेसिक बढ़ेगी)
गौर रखने वाली बात-
ये सिर्फ मांगें हैं, अंतिम फैसला सरकार और 8th CPC पर होगा।
क्या ये मांगें मान ली जाएंगी?
– पहले कर्मचारी संगठनों की सिफारिशें आती हैं
– फिर 8th CPC इस पर विचार करता है
– आयोग डेटा, महंगाई, फिस्कल स्थिति देखकर फैसला करता है
पूरा प्रोसेस 2-3 साल का हो सकता है
जानें किसे फायदा/किसे नुकसान-
संभावित फायदे-
– Group C & D कर्मचारियों को बड़ा बूस्ट
– पेंशनर्स को लंबी अवधि में फायदा
– सरकारी जॉब की वैल्यू मजबूत
चुनौतियां-
-सरकार पर फिस्कल दबाव (Fiscal pressure on the government)
– राज्यों पर वेतन बोझ का असर
सैलरी सिस्टम में नया अध्याय-
अगर आठवें वेतन आयोग में मल्टी-लेयर फिटमेंट फैक्टर (Multi-Layer Fitment Factor), 5% सालाना इंक्रीमेंट और 7th CPC पे मैट्रिक्स (pay matrix) को शामिल किया जाता है, तो यह सिर्फ वेतन संशोधन नहीं होगा, बल्कि सरकारी सैलरी सिस्टम (government salary system) का एक नया अध्याय साबित होगा।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)-
आठवां वेतन आयोग क्या सभी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू होगा?
हां, आमतौर पर सभी केंद्रीय कर्मचारियों (central employees) और पेंशनर्स पर लागू होता है।
क्या हर वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बदलता है?
हां, हर आयोग में नया फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है।
क्या इसे राज्य सरकारें भी अपनाती हैं?
अधिकतर राज्य केंद्र के फैसले के बाद इसे अपनाते हैं।
क्या सैलरी बढ़ोतरी टैक्सेबल होगी?
हां, बढ़ी हुई सैलरी इनकम टैक्स के दायरे में आती है।
क्या आठवें वेतन आयोग में DA खत्म हो जाएगा?
DA खत्म नहीं होता, लेकिन उसे बेसिक में मर्ज किया जा सकता है।
कब लागू हो सकता है आठवां वेतन आयोग ?
2027 के आसपास लागू होने की संभावना मानी जाती है।
