केंद्र सरकार ने हाल ही में 8th Pay Commission के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को नोटिफाई कर दिया है, लेकिन उसमें लागू होने की तारीख का उल्लेख नहीं होने से अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनधारकों में चिंता बढ़ रही है। आइए जानें इस मुद्दे की पूरी स्थिति…
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📌 क्या है मामला?
- सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए ToR जारी किए।
- लेकिन जारी दस्तावेज़ में यह नहीं लिखा गया कि ये सिफारिशें कब से लागू होंगी।
- पिछले पैनल (4वें से 7वें) की पद्धति देखकर कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नया आयोग 01 जनवरी 2026 से लागू होगा।
- इस बार इस तारिख का उल्लेख न होने से गुस्सा और अनिश्चितता की स्थिति बनी है।
⏳ पिछली पैनलों की प्रक्रिया क्या रही?
- केंद्रीय वेतन आयोग लगभग हर 10 साल में नियुक्त होता रहा है।
- उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं।
- इसी कारण कर्मचारी मान चुके थे कि 8वां आयोग भी स्पष्टीकरण के साथ उसी तरह 2026 की शुरुआत से लागू होगा।
📬 कर्मचारी व पेंशनर्स संगठनों का रुख
- बड़े कर्मचारी संगठन जैसे All India Defence Employees Federation (AIDEF), Confederation of Central Government Employees & Workers (CCGEW) और Bharat Pensioners Society (BPS) ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखा है।
- इन्हें शिकायत है कि ToR में पेंशनर्स एवं कर्मचारियों के हितों से जुड़े जरूरी प्रावधान शामिल नहीं हैं।
✅ BPS की प्रमुख मांगें
- आयोग की सिफारिशें 01 जनवरी 2026 से लागू हों।
- ToR में “नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम की अनफंडेड कॉस्ट” जैसे शब्द हटाए जाएँ।
- Old Pension Scheme (OPS) की बहाली और New Pension Scheme (NPS) व UPS का पुनरीक्षण हो।
- सभी स्वायत्त निकायों तथा GDS (ग्रामीण डाक सेवा) को भी लाभ मिले।
- कर्मचारियों को 20 % अंतरिम राहत दी जाए।
- स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो, खासकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए।
🔍 निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग के ToR जारी होना एक अहम कदम है, लेकिन लागू होने की तारीख और संपूर्ण प्रावधानों का अभाव कर्मचारियों व पेंशनर्स में असमंजस और बेचैनी पैदा कर रहा है। अब सरकार की तरफ से स्पष्टता और जल्द कार्रवाई की उम्मीद बन गई है।
