वित्त मंत्रालय 1 दिसंबर 2025 को लोकसभा में स्पष्ट करेगा कि क्या महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की योजना है। यह सवाल सांसद आनंद भदौरिया ने उठाया है, जिनका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को तुरंत राहत दिलाना है। इसके साथ ही सरकार 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी शर्तों पर भी जानकारी साझा करेगी।
8th Pay Commission: ताजा अपडेट
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें अब 1 दिसंबर पर टिकी हैं। इस दिन संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार से सीधे सवाल पूछा जाएगा कि क्या महंगाई भत्ते को बेसिक वेतन में जोड़ा जाएगा। वित्त मंत्रालय इस पर लिखित में जवाब देगा, जो कर्मचारियों की जेब और तुरंत राहत से जुड़ा है।
संसद में उठाए गए सवाल
लोकसभा की वेबसाइट के अनुसार, सांसद आनंद भदौरिया ने वित्त मंत्रालय के सामने पांच अहम सवाल रखे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या मौजूदा DA और DR को बेसिक पे या पेंशन में मर्ज करने की योजना है ताकि कर्मचारियों को तुरंत राहत मिल सके। इसके अलावा उन्होंने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसकी पूरी जानकारी भी मांगी है।
महंगाई का 30 साल का मुद्दा
सांसद भदौरिया ने महंगाई के लंबी अवधि के असर को भी सवाल में शामिल किया है। उनका कहना है कि पिछले 30 सालों में महंगाई बहुत बढ़ चुकी है और वर्तमान DA वास्तविक रिटेल इन्फ्लेशन के अनुरूप नहीं है। इसलिए उनका सवाल है कि क्या सरकार इस अंतर को पाटने के लिए DA को बेसिक सैलरी में जोड़ने का प्रस्ताव रखती है। अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो उसके पीछे क्या कारण हैं।
वेतन आयोग का रूल और परंपरा
सरकार ने पहले ही 8वें वेतन आयोग के गठन और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी कर दिए हैं। आमतौर पर केंद्रीय वेतन आयोग DA को बेसिक पे या पेंशन में मर्ज करता है। 7वें वेतन आयोग के दौरान भी यह परंपरा निभाई गई थी।
7वें वेतन आयोग का दृष्टिकोण
7वें वेतन आयोग ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि जब भी आयोग सिफारिशें सौंपता है, DA को बेसिक पे के साथ मर्ज करना अनिवार्य है। इसी आधार पर नई सैलरी और पेंशन की गणना की जाती है। महंगाई भत्ता कर्मचारियों के ‘रियल पे’ यानी वास्तविक वेतन को सुरक्षित रखने में मदद करता है और यह CPI-IW (इंडस्ट्रियल वर्कर्स) पर आधारित होता है।
अब सभी की निगाहें 1 दिसंबर को लोकसभा में वित्त मंत्रालय के जवाब पर लगी हैं, जो यह तय करेगा कि कर्मचारियों को तत्काल राहत मिलेगी या नहीं।
