Gold Rate – इस साल के अंत तक सोने की कीमतों में लगभग दोगुनी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई महत्वपूर्ण फैक्टर्स (factors) हैं जो गोल्ड की मांग को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में उन पांच प्रमुख कारणों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं-
सोना-चांदी की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही हैं। MCX पर सोना करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि कॉमेक्स पर गोल्ड लगभग 4,950 डॉलर प्रति आउंस के आसपास ट्रेड कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रीसियस मेटल के लिए इस समय मजबूत स्ट्रक्चरल टेलविंड बना हुआ है। दशकों से चले आ रहे ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) और राजनीति में अनिश्चितता, साथ ही डॉलर के कमजोर होते दबदबे जैसे कारणों से एक सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड की मांग लगातार बढ़ रही है।
2026 में गोल्ड का आउटलुक कैसा रहेगा। क्या आने वाले समय में कीमतें और बढ़ेंगी या फिर बड़ा करेक्शन आ सकता है? प्रीसियस मेटल को लेकर स्ट्रक्चरल टेलविंड क्या हैं? आइए जानते है नीचे खबर में-
गोल्ड 7,040 डॉलर तक जा सकता है-
डोमेस्टिक ब्रोकरेज फर्म सैमको सिक्योरिटीज का कहना है कि गोल्ड का लॉन्ग टर्म आउटलुक काफी मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत (internation market gold price) 7,040 डॉलर प्रति आउंस तक जा सकती है, जबकि फिलहाल यह करीब 5,000 डॉलर के आसपास है। यानी मौजूदा स्तर से इसमें करीब डेढ़ गुना तक तेजी की संभावना जताई जा रही है। वहीं, गोल्डमैन सैक्स ने भी 2026 के लिए गोल्ड का टारगेट बढ़ाकर 5,400 डॉलर प्रति आउंस कर दिया है।
लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग पर रखें फोकस-
ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सितंबर 2025 में जब गोल्ड 3,540 डॉलर प्रति आउंस पर था, तब उसने 4,750 डॉलर का टारगेट दिया था, जिसे अब हासिल कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड का अंडरलाइंग टेक्निकल स्ट्रक्चर और लॉन्ग टर्म मजबूती अभी भी बनी हुई है। Fibonacci एक्सटेंशन एनालिसिस के आधार पर ब्रोकरेज ने अगला टारगेट 7,040 डॉलर प्रति आउंस बताया है। ऐसे में निवेशकों को शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग की बजाय गोल्ड को अपने लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने पर फोकस करना चाहिए।
क्यों बनी रहेगी गोल्ड में तेजी-
जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता, फिस्कल डेफिसिट को लेकर बढ़ता दबाव, सेंट्रल बैंकों की लगातार मजबूत खरीद और इंटरेस्ट रेट साइकिल जैसे फैक्टर गोल्ड के आउटलुक को और मजबूत बनाते हैं। हालांकि बीच-बीच में कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर गोल्ड में अपट्रेंड लंबे समय तक बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
HDFC सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोना-चांदी के लिए इस समय मजबूत स्ट्रक्चरल टेलविंड बना हुआ है। ग्लोबल सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी से डिमांड को सपोर्ट मिल रहा है। वहीं, ETF में लगातार हो रहे इनफ्लो से भी मांग मजबूत बनी हुई है। ट्रेड डील से जुड़ी अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल तनाव (Geopolitical tensions) के चलते फिस्कल पॉलिसी में बदलाव हो रहे हैं, जिससे निवेशक जोखिम से बचने के लिए गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व की तरफ से इंटरेस्ट रेट (interest rate) में कटौती भी गोल्ड के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
गोल्ड ने 2025 में दिया सुपरहिट रिटर्न-
यही कारण है कि 2025 में स्पॉट गोल्ड ने करीब 65% और MCX गोल्ड ने लगभग 61% का रिटर्न दिया। इसी दौरान रुपये के मुकाबले डॉलर करीब 5% मजबूत हुआ, जबकि दुनिया की प्रमुख करेंसी के सामने डॉलर की ताकत दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स करीब 9% गिरा। सिल्वर ने तो जबरदस्त प्रदर्शन किया-2025 में स्पॉट सिल्वर ने 148% और MCX सिल्वर ने 145% तक का रिटर्न दिया। इतने दमदार रिटर्न के बावजूद HDFC सिक्योरिटीज का मानना है कि अभी भी कई ऐसे फैक्टर मौजूद हैं जो सोने की कीमतों को सपोर्ट करते रहेंगे, इसलिए 2026 में भी गोल्ड में तेजी बने रहने की उम्मीद है।
डी-डॉलराइजेशन का असर भी दिख रहा है-
ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता, एनर्जी मार्केट में नॉन-डॉलर कॉन्ट्रैक्ट्स का बढ़ता चलन, हेज के तौर पर गोल्ड की बढ़ती मांग, ग्लोबल एक्सपोर्ट और आउटपुट में अमेरिका का घटता मार्केट शेयर, साथ ही दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों के फॉरेक्स रिजर्व में USD का कम होता हिस्सा-ये सभी संकेत डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) की ओर इशारा करते हैं। दुनिया भर में डॉलर पर निर्भरता घटाने और रिजर्व करेंसी के तौर पर नॉन-डॉलर डायवर्सिफिकेशन का ट्रेंड (The trend of non-dollar diversification) बढ़ रहा है। यही कारण है कि ये तमाम फैक्टर गोल्ड के लिए मजबूत स्ट्रक्चरल डिमांड आउटलुक तैयार कर रहे हैं।
फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड का बढ़ता शेयर-
गौरतलब है कि 2022 से लगातार हर साल दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों द्वारा 1,000 टन से ज्यादा सोने की खरीद की जा रही है और आने वाले वर्षों में भी यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, 1996 के बाद पहली बार 2024 में सेंट्रल बैंकों के फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड (Gold in the forex reserves of central banks) का हिस्सा अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा हो गया है। जहां अमेरिकी ट्रेजरी का शेयर लगातार डाउनवर्ड ट्रेंड में है, वहीं गोल्ड रिजर्व अपवर्ड ट्रेंड में बना हुआ है। अमेरिकी डेट इंस्ट्रूमेंट्स (US debt instruments) से जुड़े बढ़ते जोखिम के चलते उन पर निर्भरता घटाई जा रही है, जिससे गोल्ड की मांग को और मजबूती मिल रही है।
रेट कट और बॉन्ड यील्ड में गिरावट का असर-
इसके अलावा फेडरल रिजर्व (federal reserve) की ओर से इंटरेस्ट रेट में कटौती की जा रही है, जिसके चलते बॉन्ड यील्ड में गिरावट देखने को मिल रही है। साथ ही डॉलर की मजबूती भी कमजोर पड़ रही है। 2025 में डॉलर इंडेक्स में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई, जो दूसरी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की कमजोरी को दिखाती है। ये सभी फैक्टर गोल्ड के लिए पॉजिटिव माने जा रहे हैं।
MCX गोल्ड के लिए कहां है सपोर्ट और क्या है अगला टारगेट-
HDFC सिक्योरिटीज ने कहा कि गोल्ड का आउटलुक बुलिश है ऐसे में अगर किसी कारण गिरावट आती है तो एक्यूमुलेशन किया जा सकता है। कॉमेक्स गोल्ड के लिए अगला टारगेट 5108, 5380, 5629 डॉलर है जबकि सपोर्ट 4125, 3938, 3847, 3632 डॉलर पर है। MCX पर गोल्ड का टारगेट 157561, 162500, 169980 रुपए प्रति दस ग्राम है। वहीं, करेक्शन आने पर 124045, 120965, 113900 रुपए प्रति दस ग्राम पर है. लॉन्ग टर्म के लिए गोल्ड बुलिश ट्रेंड में है।
ब्रोकरेज की पसंद-
– SBI Gold ETF
– HDFC Gold ETF
ड्यूटी कट से शॉर्ट टर्म में गिरावट संभव-
बजट 2026 में अगर सरकार गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती (Reduction in import duty on gold) करती है, तो कीमतों में कुछ समय के लिए गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह गिरावट शॉर्ट टर्म के लिए ही मानी जा रही है। ऐसे में HDFC सिक्योरिटीज ने गोल्ड को लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो (Gold should be included in the long term portfolio) का हिस्सा बनाने की सलाह दी है। निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो (portfolio) का करीब 10% गोल्ड और सिल्वर में लगा सकते हैं, जिसे अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है। निवेश के विकल्प के तौर पर ब्रोकरेज ने SBI Gold ETF और HDFC Gold ETF को बेहतर बताया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)-
2025 में गोल्छ ने कितना रिटर्न दिया?
साल 2025 में गोल्ड ने गोल्डन रिटर्न दिया। नेट आधार पर करीब 65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
2026 के लिए गोल्ड आउटलुक कैसा है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक 2026 में भी सोने में तेजी जारी रहेगी। गोल्डमैन सैश (goldman sachs) ने 540 डॉलर का टारगेट दिया है।
सोने में तेजी के मुख्य कारण क्या हैं?
डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी, सेंट्रल बैंकों (central bank) की तरफ से खरीदारी, जियो पॉलिटिकल अनरेस्ट, डी-डॉलराइजेशन जैसे फैक्टर्स अहम रहेंगे।
सोने में निवेश को लेकर क्या राय है?
भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) इस समय दबाव में है और ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) व स्टॉक मार्केट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में सेफ हेवन एसेट के तौर पर गोल्ड बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और निवेशकों को स्थिरता देने का काम कर सकता है।
इतनी बड़ी तेजी के बाद 2026 में सोने में निवेश करना चाहिए या नहीं?
2025 में 65% का शानदार रिटर्न देने के बाद गोल्ड की कीमत (gold price) करीब 5,000 डॉलर पर है। सैमको सिक्योरिटीज ने इसे लॉन्ग टर्म के लिए 7,040 डॉलर तक पहुंचने का बड़ा टारगेट दिया है।
