Income Tax – बजट 2026-27 से पहले संकेत मिल रहे हैं कि सरकार नई टैक्स व्यवस्था को और ज्यादा आकर्षक बनाने की तैयारी में है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा टैक्सपेयर्स को नई प्रणाली (New system for taxpayers) की ओर लाना है। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और कुछ सीमित छूटें जोड़ने जैसे बदलावों पर विचार किया जा सकता है… इस रिपोर्ट से जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले हफ्ते केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट में पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पुरानी टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है, बल्कि नई व्यवस्था को और आकर्षक बनाकर लोगों को इसकी ओर आकर्षित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में इस दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, बल्कि धीरे-धीरे नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।
सीए डॉ. सुरेश सुराना मीडिया से बातचीत पर कहा कि, “सरकार अचानक बदलाव लागू करने की बजाय नई टैक्स व्यवस्था को और अधिक प्रोत्साहित करके टैक्सपेयर्स (taxpayers update) को इसकी ओर आकर्षित करना जारी रखेगी।” उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का सवाल फिलहाल नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे किए जाने वाले बदलाव नई व्यवस्था की अपील बढ़ा सकते हैं।
नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था के बीच अंतर-
नई टैक्स व्यवस्था 2020-21 से लागू हुई है, जिसमें टैक्स दरें कम हैं, लेकिन अधिकांश टैक्स छूट (एक्ज़ेम्प्शन) उपलब्ध नहीं होतीं। पिछले साल के बजट में नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया, जबकि पुरानी व्यवस्था में यह अभी भी 50,000 रुपये ही है। 2023-24 में लगभग 72% यानी 5.27 करोड़ टैक्सपेयर्स ने नई व्यवस्था को अपनाया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की कोशिश सफल हो रही है।
इसके बावजूद करीब 28 फीसदी (लगभग 2 करोड़) लोग अभी भी पुरानी टैक्स व्यवस्था (old tax system) का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस), होम लोन का ब्याज (2 लाख रुपये तक) और सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाली बड़ी टैक्स छूटें हैं। खासकर बड़े शहरों में रहने वाले और निवेश करके बचत करने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए पुरानी व्यवस्था आज भी ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नई व्यवस्था में रिटायरमेंट सेविंग्स और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्चों पर कोई खास छूट नहीं मिलती।
टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार नई टैक्स व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर नई व्यवस्था में हेल्थ इंश्योरेंस या होम लोन (home loan) के ब्याज जैसी चुनिंदा टैक्स छूटें शामिल की जाएं, तो यह और भी लोकप्रिय हो सकती है। कुल मिलाकर, आने वाले बजट का उद्देश्य पुरानी व्यवस्था को बनाए रखते हुए नई व्यवस्था को टैक्सपेयर्स की पहली पसंद बनाना होगा।
जानें सरकार की मंशा-
एनपीवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के डायरेक्ट टैक्स पार्टनर अक्षय जैन ने कहा, “इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 के तहत पुरानी टैक्स व्यवस्था उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद बनी हुई है, जिनके पास स्ट्रक्चर्ड इन्वेस्टमेंट (Structured Investment), हाउसिंग लोन और अन्य एलिजिबल डिडक्शन मौजूद हैं।”
नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स दरें कम हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी आय 5 लाख रुपये है, तो नई व्यवस्था में टैक्स की देनदारी कम हो सकती है। लेकिन अगर आप होम लोन लेते हैं या हेल्थ इंश्योरेंस (health insurance) खरीदते हैं, तो पुरानी व्यवस्था में इन खर्चों पर टैक्स छूट मिलती है, जिससे कुल टैक्स कम हो जाता है। नई व्यवस्था में ऐसी छूटें मौजूद नहीं हैं, इसलिए जिन लोगों को ये लाभ मिलता है, वे अभी भी पुरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग नई टैक्स व्यवस्था अपनाएं। इसी दिशा में इसे और आसान और फायदेमंद बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन (standard deduction) बढ़ाना भी इसी पहल का हिस्सा है। स्टैंडर्ड डिडक्शन वह राशि है जिसे आपकी कुल आय से टैक्स की गणना (tax calculation)करने से पहले घटा दिया जाता है, और इसे बढ़ाने से टैक्स देनदारी कम हो जाती है।
भविष्य में यह संभावना है कि नई टैक्स व्यवस्था (new tax system) में और कुछ छूटें शामिल की जाएं। इससे यह उन लोगों के लिए भी आकर्षक हो जाएगी जो फिलहाल पुरानी व्यवस्था का लाभ उठाते हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसी टैक्स प्रणाली बनाना है जो सरल हो और लोगों को बचत के लिए प्रोत्साहित करे। अब देखना यह होगा कि बजट 2026-27 में इस दिशा में कौन से कदम उठाए जाते हैं।
