Silver – पिछले कुछ समय में सिल्वर की कीमतों में लगातार तेजी ने निवेशकों को अच्छा खासा मुनाफा दिलाया है। डेटा के मुताबिक, सिल्वर ETF में निवेश करने वालों को एक साल में करीब 270 फीसदी का रिटर्न मिला है। बढ़ती कीमतों और निवेश में आसानी ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बना दिया है… आइए नीचे खबर में जान लेते है इससे जुड़ी पूरी डिटेल-
पिछले कुछ महीनों से निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा चांदी की हो रही है। इसकी वजह चांदी की कीमतों में लगातार जारी (silver price hike) तेजी है। सोने की तरह चांदी का इस्तेमाल पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए किया जाता है। जिन निवेशकों ने सिल्वर ETF में निवेश किया था, उन्हें अब अच्छे रिटर्न मिल रहे हैं।
सिल्वर में एक साल में 270% रिटर्न, निवेशक बने मालामाल-
Ace MF के डेटा के अनुसार, सिल्वर ETF ने एक साल में निवेशकों को 270 फीसदी से अधिक रिटर्न दिए हैं। वहीं, तीन साल में इसका रिटर्न 70 फीसदी रहा है। हाल के वर्षों में सिल्वर ETF में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि फिजिकल सिल्वर (physical silver) की तुलना में इसमें निवेश करना आसान और पारदर्शी होता है, और निवेश डीमैट अकाउंट (demat account) में दिखाई देता है।
सिल्वर ETF ने निवेशकों को दिया सबसे ऊंचा रिटर्न-
निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF एयूएम के मामले में पहले स्थान पर है और इसने एक साल में 272 फीसदी रिटर्न दिया है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग 28,944 करोड़ रुपये है। ICICI Prudential Silver ETF ने 274 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसका AUM 14,828 करोड़ रुपये है। इसके अलावा HDFC, SBI और Kotak सिल्वर ETF ने भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।
चांदी की लगातार बढ़ रहीइंडस्ट्रियल डिमांड-
चांदी की खासियत यह है कि इसे निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए तो इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह कई इंडस्ट्रीज में भी काम आती है। सोलर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स (electronics) और टेक्नोलॉजी (technology) जैसे सेक्टर्स में इसका इस्तेमाल होता है। पिछले कुछ सालों में सप्लाई डिमांड के मुकाबले कम होने के कारण कीमतों में तेजी आई है। इस मौके का फायदा उठाते हुए निवेशक सिल्वर ETF में निवेश कर रहे हैं, जिससे गोल्ड और सिल्वर का कुल AUM 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
सिल्वर ETF में निवेश से पहले टैक्स नियमों को समझना जरूरी-
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को सिल्वर ETF में निवेश से पहले टैक्स नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। टैक्स के लिहाज से सिल्वर ETF को लिस्टेड सिक्योरिटीज माना जाता है। इसे 12 महीने बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (long term capital gains) टैक्स लागू होता है, जिसमें मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है और इंडेक्सेशन का लाभ (Benefits of indexation) नहीं मिलता। 12 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होता है, जो निवेशक के आयकर स्लैब के अनुसार होता है।
