8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशखबरी है। दरअसल आपको बता दें कि आठवें वेतन आयोग के तहत ऐतिहासिक वेतन और पेंशन बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इस बीच संगठनों का कहना है कि अब केवल मामूली बढ़ोतरी नहीं, बल्कि इतिहास की सबसे बड़ी सैलरी और पेंशन बढ़ोतरी होनी चाहिए… तो चलिए आइए नीचे खबर में एक नजर डालते है आंकड़ों पर-
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है। आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इस बार कर्मचारी संगठनों की मांगें पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रही हैं। महंगाई, बढ़ते घरेलू खर्च और वेतन संशोधन में हो रही देरी से कर्मचारियों में नाराजगी साफ दिख रही है।
संगठनों का कहना है कि अब केवल मामूली बढ़ोतरी नहीं, बल्कि इतिहास की सबसे बड़ी सैलरी और पेंशन बढ़ोतरी होनी चाहिए, ताकि वास्तविक आय में सुधार हो सके।
जानें क्या है मांग-
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग फिटमेंट फैक्टर को 3.0 से बढ़ाकर 3.25 करने की है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) ने यह प्रस्ताव रखा है। यदि सरकार 3.25 फैक्टर को मानती है, तो मौजूदा ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग ₹58,500 तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही कर्मचारी सालाना 5% इन्क्रीमेंट (increment) की भी मांग कर रहे हैं, क्योंकि मौजूदा वेतन ढांचा बढ़ती महंगाई के सामने कमजोर पड़ चुका है।
इस बार कर्मचारी संगठन समान फिटमेंट फैक्टर (fitment factor) की बजाय ग्रेडेड यानी स्तरवार फिटमेंट स्ट्रक्चर की मांग कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, लेवल 1 से 5 के लिए 3.0, लेवल 6 से 12 के लिए 3.05-3.10, लेवल 14-15 के लिए 3.15 और सबसे ऊंचे लेवल 17-18 के लिए 3.25 फिटमेंट फैक्टर रखा जाए। कर्मचारियों का कहना है कि इससे जूनियर और सीनियर स्टाफ के वेतन में संतुलन आएगा और लंबे समय से चली आ रही विसंगतियां दूर होंगी।
अगर सातवें वेतन आयोग (7th pay commission) के समय 2.57 का फिटमेंट फैक्टर (fitment fator) लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय हुआ था। उस वक्त यह बढ़ोतरी पर्याप्त मानी गई थी, लेकिन अब कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने उस बढ़ोतरी की पूरी भरपाई कर दी है। इसलिए आठवें वेतन आयोग (8th pay commission) को वर्तमान आर्थिक स्थिति और आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए 12 फरवरी 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (Confederation of Central Government Employees and Workers) ने इस संबंध में कैबिनेट सचिव को औपचारिक नोटिस सौंपा है। संगठनों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह हड़ताल वेतन, पेंशन, सेवा शर्तों और श्रम सुधारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
डीए का 50% बेसिक पे में मर्ज करने की मांग-
कर्मचारियों की मांगों की सूची लंबी है। इसमें 50% डीए को बेसिक पे में मर्ज करना, 1 जनवरी 2026 से 20% अंतरिम राहत, NPS/UPS को खत्म कर OPS बहाल करना, कोविड काल के 18 महीने फ्रीज किए गए डीए का भुगतान, कम्यूटेड पेंशन की जल्दी बहाली, खाली पदों पर भर्ती और ठेकेदारी व्यवस्था खत्म (Recruitment to vacant posts and abolition of contractual system) करना शामिल है।
इसके अलावा न्यूनतम पेंशन ₹9,000 करने, जरूरी सामानों से GST हटाने और निजीकरण का विरोध जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेती है या यह मामला लंबी बातचीत में उलझ जाता है।
