Gold Silver Price Down : सोने और चांदी की कीमतें पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रही थी, लेकिन 29 जनवरी रात 9:00 के बाद कीमतों में काफी ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। चलिए खबर के माध्यम से जानते हैं सोने चांदी की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है।
2025 में सोने और चांदी की कीमतों में काफी ज्यादा उछाल देखने को मिला, 2026 की शुरुआत में भी कीमतों में तेजी बरकरार रही। बीते शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में काफी ज्यादा उछाल देखने को मिला लेकिन रात 9:00 बजे के बाद कीमतों में अचानक गिरावट आ गई। 30 जनवरी को भी सोने और चांदी की कीमतों में भयंकर गिरावट देखने को मिली। सोने की कीमत (Gold Price) में 12% तथा चांदी में 26% की गिरावट नजर आई। प्लैटिनम में भी 18% कि कल गिरावट नजर आई है। कीमतों में आई इस गिरावट की वजह (Gold Rate Down) से निवेशकों के पसीने छूट गए हैं।
यूके के निवेश बैंक (UK investment banks) पैनम्योर लिबेरम के कमोडिटीज विश्लेषक टॉम प्राइस ने मीडिया रिपोर्ट्स में कहा, “यह मार्केट के उच्चे लेवल पर पहुंचने का एक क्लासिक उदाहरण है। इसमें भ्रम और अनिश्चितता है। हर कोई स्पष्टता की तलाश कर रहा है।”
ट्रेडिंग सर्विस से जुड़े ग्रुप MKS पैम्प की विश्लेषक निकी शील्स का कहना है कि 29 और 30 जनवरी को हुए ये भयंकर बदलाव महीनें के आखिर में आए है, जिनकी वजह से जनवरी को “कीमती धातुओं के इतिहास का सबसे अधिक अस्थिर महीना” कहा जा सकता है। वैश्विक उतार-चढ़ाव, वेनेज़ुएला से लेकर ग्रीनलैंड और ईरान तक और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (US President Trump)की अनिश्चितता को लेकर बढ़ती चिंता ने इन्वेस्टर्स को कीमती धातुओं की तरफ भागने पर मजबूर कर दिया।
निकी शील्स का कहना है कि फिलहाल हो रही कई घटनाएं अकल्पनीय है क्योकि पिछलें दिनों हुई तेजी और अब अचानक गिरावट (Silver Rate Down) काफी तेजी से हुई है।
पिक्टेट एसेट मैनेजमेंट के सीनियर मल्टी-एसेट स्ट्रैटिजिस्ट अरुण साई ने मीडिया रिपोर्ट्स में कहा, “पहले जिस तरह से कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, उसे देखते हुए ऊंची अस्थिरता की उम्मीद की जानी चाहिए।”
कंपनी अपने इस आकलन पर कायम है कि केंद्रीय बैंक रिजर्व प्रबंधकों और अन्य निवेशकों की ओर से निवेश में विविधीकरण के कारण सोने को फायदा मिलता रहेगा।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग द्वारा बताया गया है कि जनवरी महीनें के अंत में आई ये गिरावट 1980 के दशक की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट है। चांदी की कीमतों में अचानक आई इस गिरावट ने हर किसी को चौका दिया है।
इस मुनाफावसूली का असर पूरे मेटल बाजार पर पड़ा। शेयर मार्केट के एक्सपर्टस की तरफ से कहा जा रहा है कि इन धातुओं में तेज मुनाफे के बाद कीमतों (Gold Or Silver Rate Hike) में क्रैश की संभावना थी और कई रिपोर्टस ने इसे बहाना बना दिया।
अचानक गिरावट की वजह….
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों ने मार्केट (Reason for the market drop) को लगातार चिंतित रखा है। बीतें 1साल में सोने के भावों में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कीमती धातुओं में निवेशकों की भारी मांग देखी गई, जिससे एक के बाद एक रिकॉर्ड बने। इस उछाल ने अनुभवी ट्रेडरों को भी हैरान कर दिया और कीमतों में काफी बदलाव दिखा।
जनवरी महीनें में इस रुझान में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है। इन्वेस्ट करने वालों ने करेंसी की घट रही कीमत, फेडरल रिजर्व की आजादी की चिंता, ट्रेड वॉर तथा भू-राजनीतिक तनाव के बीच पारंपरिक सेफ ऑप्शनों की तरफ रुख किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस महागिरावट की वैसे तो कई वजह बताई जा रही है, लेकिन ब्लूमबर्ग ने ओवरसीज-चाइनीज बैंकिंग कोर के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग के हवाले से कहा कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नामांकन की खबर इस इस बड़ी गिरावट (Reason for the silver drop) की एक वजह बनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की तरफ से फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नाम की घोषणा की है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी ट्रंप की इस घोषणा का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की तरफ से कहा गया है कि कि मुश्किल समय में दुनिया के सबसे अहम केंद्रीय बैंक के नेतृत्व के लिए केविन एक अच्छा चुनाव हैं।
क्रिस्टोफर वोंग की तरफ से कहा गया है की ये ठीक उसी तरह का बहाना है जिसका इंजतार मार्केट इस तरह के बदलाव के लिए करती रहती है। कई एक्सपर्टस की तरफ से यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि निवेशकों ने इस मौके का फायदा मुनाफावसूली के लिए उठाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के बताए अनुसार, ज्यादातर निवेशकों का मानना है कि केविन वार्श (Kevin Warsh) के नेतृत्व वाला फेड, जिन्हें अन्य संभावित उम्मीदवारों की तुलना में बेहद पारंपरिक अर्थशास्त्री माना जाता है, महंगाई पर काफी तेज नियंत्रण रखेगा। डॉलर का कमजोर पड़ना भी सोने में बढ़ते निवेश का एक कारण माना जा रहा है।
ब्लूमबर्ग के अनुसयार, सोने और चांदी की कीमतों (Gold and silver prices) में आई इस तगड़ी गिरावट के बाद भी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिसका कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और स्वीडिश क्रोना जैसी कमोडिटी करेंसी में बिकवाली रही है।
डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से फेडरल रिजर्व के चेयरमैन (Federal Reserve Chairman) के लिए केविन वार्श के नाम की घोषणा की खबर के बाद से ही डॉलर में तेज़ी देखने को मिली। आपको बता दे कि फिलहाल फेड चेयर जेरोम पॉवेल का कार्यकाल इस साल पांचवे महीनें में खत्म हो रहा है और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने सीनेट डेमोक्रेट्स के साथ अस्थायी समझौता कर लिया, जिसकी वजह से एक और अमेरिकी सरकारी शटडाउन का खतरा टल गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से बातचीत करने को लेकर भी कहा है, जिसकी वजह से मध्य-पूर्व में तनाव कम हो गया है।
RSI हो गया था ज्यादा
ब्लूमबर्ग की तरफ से बताया गया है कि सोने और चांदी की कीमतों (Gold News) में आई इस भयंकर तेजी की वजह ये भी है कि दोनों धातुएं ‘ओवरबॉट’ श्रेणी में आ गई थीं। इनका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 90 तक पहुंच गया, जो दशकों में सबसे ऊंचा स्तर है। RSI अगर 70 से ज्यादा हो जाता है तो मतलब है कि इनमें बेहद ज्यादा खरीदारी की जा चुकी है और कीमत भी हद से ज्यादा बढ़ गई है व इसमें करेक्शन की जरूरत है।
आपको बता दे कि 30 जनवरी को गिरावट के बाद भी सोने ने महीने भर में 13 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया, वहीं चांदी महीने (Silver News) में 19 प्रतिशत तेज रही।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर
भारत में सोने, चांदी के ETF (Gold and silver ETFs) और कॉपर के शेयर काफी तेजी से गिरे है। कीमतों में आई इस गिरावट की वजह से कई बड़ी-बड़ी माइनिंग कंपनियों के शेयरों में भी बदलाव (Changes in company share prices) आया है।
न्यूयॉर्क ट्रेडिंग की बात करे तो बैरिक माइनिंग कॉर्प, न्यूमोंट कॉर्प तथा एग्निको ईगल माइंस जैसी कई गोल्ड कंपनियों के शेयरों में 10% से ज्यादा गिर गए है।
न्यूयॉर्क में स्पॉट गोल्ड 8.9% डाउन आकर 4,894.23 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
चांदी 26% कम होकर 85.20 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई, वहीं प्लैटिनम और पैलेडियम में भी तेज गिरावट नजर आई।
ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स 0.9 % उछला।
लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबा 13,157.50 डॉलर प्रति टन के भाव पर क्लोज हुआ और 28 जनवरी को यह 14,000 डॉलर प्रति टन को क्रॉस कर गया था, जोकि 2008 के बाद पहली इतनी बड़ी तेजी देखी गई थी और इसके बाद इसमें गिरावट भी दिखी।
डॉलर मजबूत होने की वजह से दुसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए कमोडिटी महंगी हो जाती है, क्योंकि इनके रेट डॉलर में तय होती है।
ब्लूमबर्ग की तरफ से मिली गई जानकारी के अनुसार, , हेरायस प्रेशस मेटल्स में ट्रेडिंग हेड डोमिनिक स्परजेल द्वारा कहा गया है कि मार्केट में हलचल बेहद ज्यादा है बीतें कल 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक लेवल कई बार टूटते दिखें। डोमिनिक स्परजेल के अनुसार भविष्य में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकती है।
सोने की कीमतों में आई तेजी (Gold Rate Hike) का कारण चीनी निवेशक रहे है और उनकी तेज स्पीड़ से खरीदारी को देखते हुए शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज को कीमती और औद्योगिक धातुओं में उछाल को रोकने के लिए कई उपाय करने पड़े थे।
