Haryana – हरियाणा के इस गांव को देशभर में विशेष पहचान मिली है। केंद्र सरकार ने इसे भारत की 15 आइकॉनिक साइट्स की सूची में शामिल किया है। सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस स्थल को अब वैश्विक धरोहर (world Heritage) के तौर पर विकसित किया जाएगा… इससे जुड़ी पूरी जानकारी जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
हरियाणा के हिसार जिले का राखीगढ़ी गांव दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शामिल सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात केंद्र माना जाता है। सरकार ने इसे वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इस पहल से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास होगा।
राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद उपमंडल में स्थित है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने संसद में बताया कि यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पाथ-वे (रास्तों) का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, राखीगढ़ी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए नियमित रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस पहल का उद्देश्य राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र (Historical Tourist Center) के रूप में स्थापित करना है।
6 हजार साल पुरानी सभ्यता के चौंकाने वाले साक्ष्य-
राखीगढ़ी में हुई खुदाई (Excavation at Rakhigarhi) के दौरान ऐसे प्रमाण सामने आए हैं जो इसे मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष खड़ा करते हैं। यहां एक साथ 60 मानव कंकाल मिले हैं, जिनके डीएनए परीक्षण से पता चलता है कि यह सभ्यता लगभग 5.5 से 6 हजार वर्ष पुरानी है। उत्खनन में मिट्टी और पत्थरों पर अंकित प्राचीन लिपियां, पक्की ईंटों से बने मकान (houses made of baked bricks) और अत्यंत विकसित ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी व्यवस्था) मिले हैं, जो उस दौर की उन्नत जीवनशैली को दर्शाते हैं। करीब 550 हेक्टेयर में फैले नौ टीलों में से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) फिलहाल पांच टीलों पर सक्रिय रूप से शोध और खुदाई कर रहा है।
नदी के किनारे बसा था यह समृद्ध नगर-
इतिहासकारों के अनुसार यह समृद्ध सभ्यता पवित्र सरस्वती नदी के तट पर विकसित हुई थी। सरस्वती की सहायक नदी दृष्टवती राखीगढ़ी के निकट से प्रवाहित होती थी, जिसने यहां के जीवन और बसावट को आधार दिया। वर्ष 1997-98 में अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में पहली बार यहां व्यवस्थित खुदाई शुरू हुई, जिसके दौरान मिले मानव कंकाल आज दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में संरक्षित (Preserved in the National Museum) हैं और उस प्राचीन सभ्यता की कहानी बयां करते हैं।
विकास की नई दिशा-
एशियाई पुरातत्व विभाग (ASI) के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल के निर्देशन में हाल की खुदाइयों में शंख की चूड़ियां, तांबे की वस्तुएं, मोहरें और कच्चे मनके प्राप्त हुए हैं। राखीगढ़ी को आइकॉनिक साइट (Rakhigarhi is an iconic site) घोषित किए जाने से न केवल इसकी वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। साथ ही, यह स्थल देश-विदेश के शोधकर्ताओं (researchers) के लिए अध्ययन और अनुसंधान की नई संभावनाओं का केंद्र बनेगा।
