DA Hike – केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस महीने के अंत तक डीए/डीआर बढ़ोतरी की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लाभ करीब 1.18 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिल सकता है… इस अपडेट से जुड़ी पूरी जानकारी जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए इस महीने के अंत तक महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) बढ़ाने की घोषणा होने की संभावना है। केंद्रीय कैबिनेट (central cabinet) की मंजूरी के बाद होली से पहले इसका ऐलान किया जा सकता है। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि इस बार डीए/डीआर में दो से तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है।
डीए/डीआर में प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद इसकी मौजूदा दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत के पार जा सकती है। नियमों के अनुसार, जब डीए/डीआर 50 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो उसे मूल वेतन और पेंशन में विलय (merger into pension) किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार ने इस विलय से इनकार कर दिया है। ऐसे में अगले चार वर्षों तक करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों को हर महीने लगभग 10 प्रतिशत तक के वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
नियमों के तहत डीए/डीआर में बढ़ोतरी हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई से की जाती है। पिछले वर्ष जुलाई में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 146.5 रहा था, जो अगस्त में 147.1, सितंबर में 147.3, अक्टूबर में 147.7 और नवंबर में बढ़कर 148.2 पर पहुंच गया। दिसंबर में भी यह सूचकांक 148.2 पर ही दर्ज किया गया। वहीं, दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति दर 3.13 प्रतिशत रही, जबकि नवंबर में यह 2.56 प्रतिशत थी।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labor and Employment) के अधीन श्रम ब्यूरो देश के 88 औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों में स्थित 317 बाजारों से एकत्र किए गए खुदरा मूल्यों के आधार पर हर महीने औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) तैयार करता है। आमतौर पर केंद्र सरकार डीए/डीआर की घोषणा दो से तीन महीने की देरी से, यानी होली और दीवाली के आसपास करती है।
नियमों के अनुसार, जब डीए/डीआर की दर 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाती है, तो इसे मूल वेतन और पेंशन में विलय किया जाना चाहिए। हालांकि, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary) संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार ऐसा कोई विलय नहीं करेगी। वहीं, ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (National President Dr. Manjeet Singh Patel) का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार पहले ही कर्मचारियों का हर महीने करीब दस प्रतिशत पैसा बचा चुकी है।
पिछले दो वर्षों से कर्मचारियों के वेतन में करीब दस प्रतिशत की कटौती जैसा असर पड़ रहा है और पेंशनरों को भी इसी तरह नुकसान उठाना पड़ रहा है। आठवें वेतन आयोग (8th pay commission update) के लागू होने की उम्मीद भी अब कम से कम दो साल बाद ही जताई जा रही है। ऐसे हालात में कर्मचारियों को करीब चार वर्षों तक हर महीने दस प्रतिशत वेतन का आर्थिक नुकसान सहना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2024 को डीए 50 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका था, इसके बावजूद इसे मूल वेतन में मर्ज नहीं किया गया। वहीं, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी अब दो साल बाद ही लागू होने की संभावना है। इस मुद्दे को लेकर कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स (Confederation of Central Government Employees and Workers) के महासचिव एस.बी. यादव ने पिछले वर्ष कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था।
पत्र में उन्होंने महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (डीए/डीआर) की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले कैलकुलेटर में बदलाव की मांग की थी। उनका कहना था कि डीए की दर तय करने के लिए 12 महीने के औसत की जगह तीन महीने के औसत को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को परिवर्तनीय डीए मिलेगा और उन्हें हर तीन महीने में वास्तविक मूल्य वृद्धि का मुआवजा (compensation for actual price increases) मिल सकेगा।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (public sector banks) के कर्मचारियों का डीए इसी आधार पर तय किया जाता है। इसके अलावा, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग से ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक’ तैयार करने की भी मांग उठाई गई है। एस.बी. यादव के अनुसार, बैंकिंग कर्मचारियों (banking employees) का डीए हर साल प्रत्येक तिमाही-फरवरी-अप्रैल, मई-जुलाई, अगस्त-अक्टूबर और नवंबर-जनवरी-में संशोधित होता है। ऐसे में यदि जनवरी में महंगाई बढ़ती है, तो उसकी आंशिक भरपाई बैंक कर्मियों को 12 महीने इंतजार किए बिना मिल जाती है।
डीए की गणना (DA Calculation) और भुगतान छह महीने के बजाय हर तीन महीने में किया जाना चाहिए। कॉन्फेडरेशन के महासचिव ने अपने पत्र में यह भी कहा था कि कर्मचारियों को पॉइंट-टू-पॉइंट डीए (Point-to-point DA to employees) दिया जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में डीए को न्यूनतम स्तर पर राउंड ऑफ (DA rounded off to the lowest level) कर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कर्मचारी 42.90 प्रतिशत डीए के पात्र होते हैं, तो उन्हें केवल 42 प्रतिशत डीए ही स्वीकृत किया जाता है।
0.9 प्रतिशत डीए की कटौती के कारण केंद्रीय कर्मचारियों (central employees) को छह महीने तक इसका लाभ नहीं मिल पाता। इसी वजह से केंद्र सरकार के कर्मियों (central government personnel) को भी पॉइंट-टू-पॉइंट डीए दिए जाने की मांग उठाई गई है। बैंकों और एलआईसी (LIC) के कर्मचारियों को पहले से ही पॉइंट-टू-पॉइंट डीए का लाभ मिलता है। इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Pensioners) के लिए अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करने की भी मांग की गई है।
