Property Rights : आमतौर पर प्रोपर्टी से जुड़े नियमों और कानूनों को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव होता है। इसी कड़ी में आज हम आपको अपनी इस खबर में ये बताने जा रहे है कि आखिर पिता की संपत्ति (fathers property) में पत्नी और बच्चों को कितना अधिकार होता है… आइए नीचे खबर में जान लेते है इससे जुड़ा कानूनी प्रावधान-
एक व्यक्ति को पिता से विरासत में जमीन मिली थी, जिसे उसने बाद में बेच दिया। इस मामले ने घर में विवाद को जन्म दिया। पत्नी ने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया और कहा कि पति नशे के आदी हैं और शराब का खर्चा निकालने के लिए जमीन बेच रहे हैं। पत्नी ने साफ कहा कि वह ऐसा होने नहीं देगी।
ध्यान रहे, हिंदू उत्तराधिकार कानून (hindu succession law), 1956 की धारा 8 के तहत किसी पुरुष हिंदू की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पर सबसे पहला और बराबर अधिकार उसकी विधवा और पुत्र-पुत्रियों का होता है।
विरासत की जमीन पर विवाद-
छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1969 में व्यक्ति के पिता ने परिवार में संपत्ति का बंटवारा (father divided the property among the family) किया था। इसके बाद 1982 में उन्होंने फिर से अपने भाइयों के बीच बंटवारा किया। दोनों बंटवारों की रजिस्ट्री पूरी करवाई गई थी। 1982 के दस्तावेजों के मुताबिक, पिता को 6.82 हेक्टेयर जमीन मिली थी।
व्यक्ति के पिता की मृत्यु (fathers death) के बाद यह जमीन उनके तीन बेटों में बराबर-बराबर बांट दी गई। व्यक्ति ने अपने हिस्से की जमीन ही बेच दी, और खरीदार ने डील के अनुसार इसके लिए 1.29 लाख रुपये अदा किए। हालांकि, विक्रेता की पत्नी और बच्चों ने जमीन बिक्री के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। इसके जवाब में खरीदार ने भी दो FIR दर्ज करवा दी।
पिता से मिली संपत्ति पर व्यक्तिगत अधिकार-
रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन बिक्री का विवाद बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court takes up land sale dispute) तक पहुंच गया। हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि जमीन व्यक्ति को उसके पिता से मिली है, इसलिए केवल वही उसका वैध हकदार (legal entitlement) है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन का मालिक अकेला वही है, इसलिए उसे बेचने से कोई रोक नहीं सकता। वहीं, पत्नी का दावा था कि पुश्तैनी जमीन (ancestral land) होने के कारण उसका और बच्चों का भी उस पर हक है।
विरासत में मिली संपत्ति का अधिकार-
हाई कोर्ट ने कानून और सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत पिता से मिली संपत्ति पर केवल वंशज का व्यक्तिगत अधिकार होता है, परिवार के अन्य सदस्यों का नहीं। यानी, पिता से मिली संपत्ति बच्चों की व्यक्तिगत संपत्ति बन जाती है और पुश्तैनी नहीं रहती। इसी तर्क के आधार पर हाई कोर्ट (High court) ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया, जबकि विक्रेता की पत्नी और बच्चों का दावा खारिज कर दिया गया।
