Delhi News : दिल्ली में वाहन चालकों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में कुछ वाहनों को वर्जित कर दिया गया है। इस नए नियम का सीधा प्रभाव वाहन चालकों पर पड़ने वाला है। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।
दिल्ली सरकार ने हाल ही में वाहन चालकों के लिए एक बड़ा अपडेट लिया है। बता दें कि अब दिल्ली में कुछ खास तरह के वाहनों के प्रवेश को वर्जित कर दिया गया है। इसकी वजह से वाहन (Vehicals ban) चालकों पर बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है। अरज हम आपको इस खबर के माध्यम से दिल्ली सरकार के इस अपडेट के बारे में बताने जा रहे हैं। खबर के माध्यम से जानिये इस बारे में।
वाहनों की तकनीकी में तेजी से हो रहा है बदलाव
वाहनों की तकनीक में जिस तरह से तेजी से बदलाव दर्ज किया जा रहा है, उसको देखकर ये लग रहा है कि कार खरीदकर उसे लंबे समय तक चलाना अब बीती बात हो गई है। ऐसे में लग रहा है कि BS-6 वाहनों की शुरुआत कल ही की बात हो, हालांकि अभी से इसकी डेडलाइन को भी तय किया जा चुका है। दिल्ली-एनसीआर में जल्द ही BS-6 वाहनों की एंट्री पर बैन लगा दिया जाएगा। जबकि BS-4 वाहनों के लिए दिल्ली-एनसीआर अब बस कुछ साल का ही ठिकाना बचा है।
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लिया फैसला
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (pollution in Delhi NCR) को कम करने के लिए एयर सीएक्यूएम द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल जल्द ही BS-1, BS-2 और BS-3 वाहनों को तुरंत हटाने, अगले 5 साल में BS-4 वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने और BS-6 दोपहिया व कारों को क्रमशः साल 2035 और साल 2040 तक हटाने का प्रस्ताव दे सकता है। इसका सीधा मतलब ये है कि बीएस-6 वाहनों के लिए दिल्ली-एनसीआर अब बस 15 साल का घर बचा है। यानी कि अगर आज कोई BS-6 वाहन खरीदना चाह रहे हैं तो फिर उनको सोच समझकर पैसों को निवेश करना होगा।
पैनल ने दिया फीडबैक
एक्सपर्ट्स ने फीडबैक के लिए ड्राफ्ट रोडमैप को भी साझा किया है। पैनल ने वायु प्रदूषण से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान दे दिया है, इसमें ये पाया जा रहा है कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI of Delhi) 250 से ऊपर चला जाता है, तब एक नवजात शिशु रोजाना 10-15 सिगरेट के बराबर प्रदूषण सांस में लेता है। इसके साथ साथ, केमिस्ट दुकानों पर नेब्युलाइजर और इनहेलर दवाओं (Nebulizer and inhaler medications) की बिक्री में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
रिपोर्ट को पैश करने का ये है मकसद
पैनल की चर्चाओं से जुड़े लोगों ने जानकारी देते हुए बताया है कि प्रस्ताव का फोकस नए पेट्रोल और डीजल (petrol diesel rate) वाहनों की खरीद को हतोत्साहित करने, आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और सीमित करने, स्वच्छ वाहनों की ओर बदलाव को बढ़ावा देने और उत्सर्जन मॉनिटरिंग को बेहतर करने पर है। ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक, जीरो टेलपाइप एमिशन (ZTE) वाहनों की रजिस्ट्रेशन के लिए समयसीमा तय की जानी चाहिए। इसमें इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन फ्यूल-सेल वाहन को शामिल किया गया है। चूंकि, कामर्शियल वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं, पैनल का मानना है कि अप्रैल 2027 के बाद रजिस्टर होने वाले सभी नए कमर्शियल दोपहिया और टैक्सी वाहन ZTE होने चाहिए।
इस दिन से लागू हो जाएगा ZTE
अप्रैल 2028 से दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR New Rules) में रजिस्टर होने वाले नए लाइट गुड्स वाहन जैसे पिकअप वैन और मिनी-ट्रक भी ZTE होने जरूरी है। ड्राफ्ट प्रस्ताव में अप्रैल 2030 से केवल इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन का समर्थन किया जा रहा है। एक सूत्र ने जानकारी देते हुए बताया है कि बीएस-6 दोपहिया और कारों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए 10-15 साल का ट्रांजिशन पीरियड प्रस्तावित किया जा रहा है। हाल के सालों में इन्हें खरीदने वाले लोगों को नुकसान न हो। पैनल वाहन निर्माताओं को जीरो-एमिशन वाहनों (ZEVs) की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने पर विचार किया जा रहा है। इस साल के अंत से शुरू होने वाले पीक AQI सीजन में बीएस-4 वाहनों के यूज को सीमित करने और 2035 के बाद बीएस-6 वाहनों पर भी रोक लगाने का समर्थन किया जा रहा है।
चार्जिंग वाहनों को मिलेगा अधिकार
इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-एनसीआर में राइट टू चार्ज (right to charge act) जैसा कानूनी ढांचा भी लागू किया जा सकता है। उम्मीद लगाई जा रही है कि घरों और कार्यस्थलों पर पर्याप्त चार्जिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, पैनल ‘राइट टू चार्ज’ के लिए कानूनी ढांचा बनाने का सुझाव दिया जा सकता है। पैनल सभी श्रेणियों के वाहन मालिकों को स्वच्छ वाहन खरीदने के लिए सब्सिडी देने की सिफारिश भी कर सकता है। इसके साथ ही में पैनल ने ऑन-रोड वाहन उत्सर्जन की मॉनिटरिंग के लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (pollution under control) व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
फिलहाल चल रहा है पायलट प्रोजेक्ट
एनसीआर में फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसमें चुने हुए स्थानों पर रिमोट सेंसिंग डिवाइस से ऐसे टेस्ट किए जा रहे हैं। ये डिवाइस इंफ्रारेड (Delhi News ) और अल्ट्रावायलेट लाइट का यूज कर गुजरते वाहनों से निकलने वाले असली प्रदूषकों जैसे NOx, CO, HC और PM को बिना वाहन रोके मापते हैं। इसके साथ ही में भारत में ऐसे टेस्ट की सटीकता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि शहर की सड़कों पर वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी रखना मुश्किल है, इससे किसी खास वाहन (Vehicals ban in India) के उत्सर्जन को सही तरीके से मापना कठिन बनकर सामने आ रहा है। इसके साथ ही सिस्टम किस तरह किसी एक वाहन के उत्सर्जन को बाकी वाहनों के प्रदूषण से अलग करके आकलन करेगा, यह भी एक बड़ी समस्या है।
