IT New Rules : आयकर रिटर्न को लेकर हाल ही में एक बड़ा अपडेट जारी कर दिया गया है। बता दें कि अब आयकर रिटर्न (income tax return) को लेकर डेडलाइन जारी कर दी गई है। ऐसे में ये अपडेट इनकम टैक्स वालों के लिए जान लेना काफी ज्यादा जरूरी है। खबर के माध्यम से जानिये इस बारे में पूरी जानकारी।
इनकम टैक्स भरने वालों के लिए हाल ही में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। बता दें कि आयकर विभाग की ओर से इनकम टैक्स रिटर्न को फाइल करने की डेडलाइन (ITR filing Deadline) को जारी कर दिया गया है। ऐसे में अब तय समयसीमा तक आईटीआर को फाइल करना काफी ज्यादा जरूरी है वरना आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में।
स्टैगर्ड टाइमलाइन का ये है मतलब-
स्टैगर्ड टाइमलाइन का मतलब ये होता है कि अब सभी टैक्सपेयर्स को एक ही तारीख पर ITR फाइल करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार (ITR Latest Update) ने इसे इस तरह से डिजाइन कर दिया है कि अलग-अलग कैटेगरी के लोग अपनी सुविधा और अकाउंट्स तैयार करने के समय के मुताबिक ITR को फाइल कर सकते हैं। इसका सीधा मकसद टैक्स रिटर्न फाइलिंग के दबाव को कम (tax return filing) करना है और गलती की संभावना को घटाना है।
इन लोगों को मिली 31 अगस्त की डेडलाइन-
नए नियमों के मुताबिक, 31 अगस्त तक ITR फाइल (ITR file) करने की छूट सिर्फ उन टैक्सपेयर्स को मिल रही है। जिन भी टैक्सपेयरर्स के अकांउट का ऑडिट नहीं हुआ है उनके लिए ये डेडलाइन बनाई गई है। इसमें मुख्यतः छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर, प्रोफेशनल और ट्रस्ट्स को शामिल किया गया है। इन लोगों को अकाउंट फाइनल (account final) करने और टैक्स रिपोर्ट तैयार करने में थोड़ा ज्यादा समय चाहिए होगा।
सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए हुए ये बदलाव-
सैलरीड कर्मचारियों के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म की फाइलिंग (ITR Form Filing) की डेट को 31 जुलाई तय किया गया है। इसका मतलब है कि अगर आप सिर्फ सैलरी पर टैक्स देते हैं तो आपको कोई अतिरिक्त समय नहीं मिलने वाला है। इस वजह से ये गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि सभी के लिए डेडलाइन को बढ़ा दिया गया है। सरकार ने ये साफ कर दिया है कि कि ये एक्सटेंशन सिर्फ चुनिंदा कैटेगरी के टैक्सपेयर्स (Update for Taxpayers) के लिए लागू किया गया है।
नॉन-ऑडिट बिजनेस में लिया ये फैसला-
बता दें कि नॉन-ऑडिट बिजनेस केस वे होते हैं जिनके कारोबार या पेशे का टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से कम के होते हैं या फिर जो प्रेजंप्टिव टैक्सेशन के अंतर्गत आते हैं। इन मामलों में टैक्स ऑडिट (tax audit) कराना जरूरी नहीं होता है। इस वजह से सरकार ने इन टैक्सपेयर्स को 31 अगस्त तक ITR फाइल करने का ऑप्शन दे दिया है। इसकी वजह से उन्हें अकाउंट फाइनल करने में पर्याप्त समय मिलेगा।
ट्रस्ट्स को मिल गई राहत-
ट्रस्ट्स, जो चैरिटेबल, धार्मिक या निजी उद्देश्यों के लिए बनाए जाते हैं, अगर उनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है, तो वे भी अब 31 अगस्त तक ITR (ITR Filing) को फाइल कर सकते हैं। इसकी वजह से ट्रस्ट्स को कंप्लायंस में आसानी होने वाली है। जल्दबाजी में गलतियां होने की संभावना कम हो रही है।
छोटे कारोबारी और फ्रीलांसर को होगा फायदा-
छोटे कारोबारी और फ्रीलांसर अक्सर अपनी आय और खर्च का विवरण तैयार करने में ज्यादा समय को लेते हैं। नए नियमों से इन्हें अकाउंट्स और टैक्स रिटर्न (tax return) तैयार करने का अतिरिक्त समय मिलने वाला है। इसका लाभ ये होगा कि लोग जल्दी-जल्दी गलतियां नहीं करेंगे और सही तरीके से टैक्स को भी जमा कर सकेंगे।
सरकार का ये है मकसद-
सरकार का उद्देश्य सपष्ट है कि वे टैक्सपेयर्स पर फाइलिंग (ITR Filing Rules) का दबाव कम करना चाहते हैं और कंप्लायंस को आसान बनाना चाहते हैं। स्टैगर्ड टाइमलाइन के जरिए लोग अपनी सुविधा मुताबिक ITR फाइल कर सकते हैं। ये बदलाव छोटे व्यापारियों, प्रोफेशनल और ट्रस्ट्स के लिए खासतौर पर लाभकारी रहने वाला है। ये नया नियम इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 263(1)(c) के तहत लागू किया गया है। ये 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला है। टैक्स ईयर 2026-27 से इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके साथ ही में पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 में भी इसी तरह के बदलावों को कयिा जाने वाला है। इसकी वजह से ट्रांजिशन आसान हो जाएगा। अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, तो आपकी डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी। वहीं, छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर या नॉन-ऑडिट ट्रस्ट (Non-audit trusts) से जुड़े लोगों को अब 31 अगस्त तक ITR फाइल करने का समय मिलने वाला है। इस वजह से ये समझना जरूरी है कि आप किस कैटेगरी में आते हैं, ताकि पेनल्टी और किसी परेशानी से बचा जा सकता है।
ऐसे करें आईटीआर फाइल करने की तैयारी-
ITR फाइल करते समय इस बात का ध्यान देना काफी ज्यादा जरूरी है कि 31 अगस्त की नई डेडलाइन सिर्फ नॉन-ऑडिट केस और ट्रस्ट्स के लिए ली गई है। बाकी सभी टैक्सपेयर्स को पुरानी डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक ही रिटर्न फाइल करना होगा। इस वजह से अपनी कैटेगरी जानकर ही ITR (Update for taxpayers) को फाइल करना होगा। समय रहते सही दस्तावेज तैयार को रखें। इस बदलाव से छोटे कारोबारियों और ट्रस्ट्स को काफी लाभ होने वाला है। हालांकि सैलरीड कर्मचारियों (Update for employess) के लिए स्थिति वही रहने वाली है। सरकार ने इसे इस तरह से बना दिया है कि हर टैक्सपेयर अपनी तैयारी के हिसाब से समय का लाभ उठा सकते हैं और गलती की संभावना कम हो जाएगी।
