Property Right’s Latest Update : आए दिन कोर्ट कचहरी में संपत्ति से जुड़े कई विवाद देखने को मिल जाते हैं। हाल ही में पिता की संपत्ति (father’s property) से जुड़ा एक विवाद देखने को मिला था। इसको लेकर सरकार ने क्लियर कर दिया है कि पिता की संपत्ति में किसको कितना हक मिलेगा। आइए जानते हैं इसको लेकर बनाये गए कानून के बारे में।
पिता की संपत्ति को लेकर अक्सर परिवारों में भ्रम और विवाद की स्थिति देखने को मिल जाती है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि पिता की संपत्ति (Unregistered will validity India) पर किसको कितना हक मिलता है। हाल ही में इसको लेकर कोर्ट ने अपडेट जारी किया है और इससे जुड़े सभी सवालों का जवाब दे दिया है। आज हम आपको इस खबर के माध्यम से प्रॉपर्टी (Property rules) से जुड़े इस नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।
जानिये क्या है पूरा मामला
हाल ही में कोर्ट में एक मामला सामने आया, जिसमें पिता की संपत्ति (Property Rights) को लेकर विवाद देखने को मिल रहा है। मामले में एक परिवार में, पिता का 2022 में निधन हो गया था। उनके पांच बेटे और छह बेटियां थीं। वहीं उन्होंने मृत्यु से पहले, अपनी संपत्ति अपने बच्चों को देने के लिए वसीयत लिख दी थी। हालांकि वसीयत पंजीकृत नहीं हुई थी। इस वजह से उनके कुछ भाई-बहनों ने उनकी मृत्यु के बाद अदालत का रुख किया। उन्होंने तर्क देते हुए बताया कि 2005 के अधिनियम के मुताबिक उन्हें भी संपत्ति (Property inheritance law India) में बराबर का हिस्सा चाहिए। इस वजह से, परिवार में संपत्ति विवाद और भी गहरा हो गया।
ऐसे मिलता है संपत्ति पर हक
इस स्थिति में ये जानना काफी ज्यादा जरूरी है कि पिता को यह संपत्ति कैसे मिली है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, (Hindu Succession Act) 1956 के मुताबिक, पिता द्वारा अर्जित संपत्ति को व्यक्तिगत संपत्ति माना जाता है। ये संपत्ति पैतृक संपत्ति नहीं बनती। इसको संयुक्त परिवार की संपत्ति भी नहीं माना जाता। इस वजह से पिता को वसीयत के माध्यम से अपनी इच्छा के मुताबिक संपत्ति आवंटित करने का अधिकार दिया जाता है। अगर यही संपत्ति पिता (Hindu Succession Act 1956) को उनके पिता और दादा-दादी से प्राप्त होती है, तो सभी उत्तराधिकारियों का इस पर अधिकार दिया जाता है।
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम ने दी जानकारी
ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या वसीयत का पंजीकरण कराना चाहिए या फिर नहीं। कानूनी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (Will registration rules) के मुताबिक, वसीयत के पंजीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। इसका ये मतलब है कि अपंजीकृत वसीयत भी कानूनी रूप से मान्य होती है। अगर ये साबित नहीं हो पाता कि वसीयत फर्जी है या जबरदस्ती लिखी गई है, तो अदालत (Property dispute legal rights) में इसके मान्य होने की उम्मीद ज्यादा हो जाती है। यही वजह है कि कई माता-पिता आज भी अपनी संपत्ति अपने वारिसों को वसीयत के रूप में देते हैं। कुछ लोग तो अपनी वसीयत को रजिस्टर कार्यालय में अपने नाम से रजिस्टर भी करवा लेते हैं।
लोगों के मन में उठ रहा है ये सवाल
इसके साथ ही में एक और सवाल उठ रहा है कि 2005 के संशोधन अधिनियम के मुताबिक, पुत्रों और पुत्रियों दोनों को संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हो गया है। हालांकि, अगर पिता अपनी निजी संपत्ति (Daughters property rights India) के संबंध में वसीयत लिखते हैं, तो संपत्ति उन्हीं लोगों को मिलती है जिनका उल्लेख उन्होंने किया है। अगर पिता बिना वसीयत लिखे मर जाते हैं, तो फिर सभी पुत्रों और पुत्रियों को बराबर का हिस्सा मिल जाता है।
वसीयत में होना चाहिए संपत्ति का उल्लेख
इसके साथ ही में कुछ मामलों में, पिता अपनी वसीयत में अपनी सारी संपत्ति का उल्लेख नहीं करते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर वे सिर्फ एक व्यक्ति को घर देते हैं और अपनी जमीन के बारे में वसीयत (property rights India) नहीं लिखते हैं, तो वसीयत में शामिल न की गई संपत्ति कानूनी रूप से सभी बच्चों को बराबर-बराबर मिल जाएगी। इसी तरह सभी बेटों और बेटियों को संपत्ति में हिस्सा मिलेगा। हालांकि, बाकी के बच्चों को वसीयत में लिखी गई संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं दिया जाता है।
वसीयत को स्पष्ट लिखना है जरूरी
ऐसे में ये जानना काफी ज्यादा जरूरी है कि वसीयत भी वैध होती है। हालांकि, कानूनी एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि भविष्य में विवादों से बचने के लिए वसीयत (property rights) को स्पष्ट रूप से लिखना और आवश्यकता पड़ने पर उसे पंजीकृत कराना काफी ज्यादा बेहतर हो जाएगा। ऐसा करने से पुत्र-पुत्रियों के बीच संपत्ति विवाद नहीं होंगे।
