नौकरी-बिजनेस के लिए शहरों में बसने वाले लाखों किरायेदारों को मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के तहत मजबूत सुरक्षा मिली है। बिना कोर्ट ऑर्डर बेदखली नहीं, मेंटेनेंस मालिक की जिम्मेदारी, घर में पूर्ण निजता, रिन्यूअल से इंकार, रसीद का हक, नोटिस पीरियड, डिपॉजिट वापसी, वारिसों को अधिकार, लिखित एग्रीमेंट व बेसिक सुविधाएं सुनिश्चित। विवादमुक्त रहने के लिए ये जान लें!
नौकरी, बिजनेस या पढ़ाई के लिए गांव-शहर छोड़कर महानगरों में बसना आजकल आम बात है। लेकिन घर खरीदने की हैसियत हर किसी की नहीं, इसलिए लाखों लोग किराए के मकानों में रहते हैं। यहां नियमों का पालन जितना जरूरी है, उतने ही किरायेदारों के कानूनी अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं। मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 और राज्य स्तरीय रेंट कंट्रोल कानूनों के तहत किरायेदारों को मजबूत सुरक्षा मिली है। ये अधिकार मकान मालिक की मनमानी रोकते हैं और विवादों से बचाते हैं। आइए जानें भारत में किरायेदारों के 10 धमाकेदार अधिकार, जो हर किराये पर रहने वाले को पता होने चाहिए।
बिना वैध कारण बेदखली नहीं
रेंट एग्रीमेंट की तय अवधि (ज्यादातर 11 महीने) तक मकान मालिक आपको बिना कोर्ट ऑर्डर के नहीं निकाल सकता। केवल किराया न देना, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना या संरचनात्मक बदलाव जैसे कारणों पर ही बेदखली संभव है। मरम्मत, बिक्री या मालिक की मौत पर भी उचित नोटिस जरूरी। यह अधिकार किरायेदारों को स्थिरता देता है।
जरूरी मेंटेनेंस मकान मालिक की जिम्मेदारी
घर रहने लायक होना चाहिए पानी, बिजली, गैस कनेक्शन चालू रखना मालिक का कर्तव्य। लीकेज, प्लंबिंग या छत की मरम्मत भी उनकी जिम्मेदारी। यूटिलिटी बिल किरायेदार भरें, लेकिन मालिक कनेक्शन नहीं काट सकता। देरी पर म्युनिसिपल अथॉरिटी ही कार्रवाई करेगी।
घर में पूर्ण निजता का अधिकार
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बाद मालिक बिना अनुमति घर में नहीं घुस सकता। इमरजेंसी (आग, बाढ़) को छोड़कर एक्स्ट्रा चाबी से एंट्री प्रतिबंधित। बार-बार परेशानी या ताला बदलना अपराध है, जिस पर एफआईआर दर्ज हो सकती है।
रेंट रिन्यूअल से इंकार का हक
एग्रीमेंट रिन्यूअल वैकल्पिक है। नया किराया (आमतौर पर 10% बढ़ोतरी) मंजूर न हो तो नोटिस देकर घर खाली करें। जबरदस्ती रिन्यूअल नहीं कराया जा सकता; मोलभाव या कानूनी सहायता लें।
किराया रसीद अनिवार्य
कैश, चेक या ट्रांसफर से भुगतान पर रसीद लें- राशि, तारीख और साइन के साथ। यह भविष्य के विवादों से बचाव है। रसीद न देने पर किराया डिफॉल्ट का दावा अमान्य।
नोटिस पीरियड जरूरी
खाली करने के लिए कम से कम 1 महीने का लिखित नोटिस दें/लें। एग्रीमेंट में उल्लिखित पीरियड ही मान्य; एकदम बेदखली अवैध। किरायेदार भी नोटिस जारी कर सकता है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट पर दावा
3 महीने के किराए बराबर डिपॉजिट एग्रीमेंट समाप्ति पर बिना ब्याज लौटना चाहिए। केवल वास्तविक नुकसान (पेंटिंग आदि) पर कटौती; अनुचित रोकने पर रेंट अथॉरिटी में शिकायत।
कानूनी वारिसों को अधिकार
मुख्य किरायेदार की मौत पर पति/पत्नी, बच्चे या विधवा बहू को किरायेदारी मिलती है, बशर्ते वे साथ रह रहे हों। यह उत्तराधिकार किरायेदारों की सुरक्षा बढ़ाता है।
लिखित एग्रीमेंट का अधिकार
मौखिक अवैध; स्टांप ड्यूटी चुकाकर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट लें। किराया, डिपॉजिट, मरम्मत, नोटिस सब स्पष्ट लिखें। बिना इसके मालिक मनमानी कर सकता है।
बेसिक सुविधाओं की गारंटी
पानी, बिजली, कॉमन एरिया एक्सेस कट नहीं सकता, भले झगड़ा हो। शिकायत पर मालिक दबाव नहीं बना सकता। असुरक्षित घर पर तत्काल शिकायत का अधिकार।
ये अधिकार किरायेदारों को गैर-कानूनी बेदखली और शोषण से बचाते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां भी हैं, समय पर किराया, प्रॉपर्टी की देखभाल। मकान मालिक-किरायेदार दोनों को संतुलन बनाना चाहिए। विवाद पर स्थानीय रेंट कंट्रोलर या वकील से संपर्क करें, क्योंकि राज्यवार कानून भिन्न हैं। दिल्ली में डीडीए नियम लागू। अच्छा रिश्ता ही शांति सुनिश्चित करता है, आज किरायेदार, कल मालिक आप हो सकते हैं!
