Employees : ईपीएफओ ने कर्मचारियों की पेंशन को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। अब मासिक पेंशन पाने के लिए दो जरूरी शर्तें तय की गई हैं। इस बदलाव से कर्मचारियों को अपने भविष्य की योजना बनाने में आसानी होगी और पेंशन का लाभ (pension benefit) समझना पहले से कहीं आसान हो गया है… इस अपडेट से जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी स्लिप में हर महीने पीएफ कटौती दिखती है, लेकिन पेंशन का हिस्सा अक्सर ध्यान नहीं आता। EPF पासबुक में पीएफ का बैलेंस और ब्याज साफ दिखाई देता है, लेकिन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की जानकारी समझ में नहीं आती। यही वजह है कि रिटायरमेंट के समय पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठते हैं।
वेतन सीमा और पेंशन नियमों को लेकर हाल ही में चर्चा होने के चलते यह जानना जरूरी है कि ईपीएफओ की पेंशन योजना कैसे काम करती है और इसका लाभ किन शर्तों पर मिलता है।
ये दो जरूरी शर्तें-
ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मासिक पेंशन पाने के लिए दो जरूरी शर्तें हैं। पहली शर्त यह है कि कर्मचारी को कम से कम 10 साल पेंशन योग्य सेवा पूरी करनी होगी। इसमें सिर्फ नौकरी के साल नहीं गिने जाते, बल्कि पीएफ का ट्रांसफर होना भी जरूरी है। अगर किसी ने नौकरी बदलते समय पीएफ की रकम निकाल (Withdrawal of PF amount while changing job) ली, तो वह अवधि पेंशन सेवा में नहीं गिनी जाएगी।
दूसरी जरूरी शर्त उम्र से जुड़ी है। पूर्ण पेंशन पाने के लिए कर्मचारी की उम्र 58 साल होनी चाहिए। यानी, 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करने और 58 साल की उम्र होने पर ही कर्मचारी आजीवन मासिक पेंशन का हकदार बनता है।
सैलरी से EPS में कटौती कितनी होती है-
अधिकांश कर्मचारियों को लगता है कि उनकी पूरी पीएफ कटौती (pf deduction) उनके खाते में जमा होती है, लेकिन असल में हालात थोड़े अलग हैं। कर्मचारी की सैलरी से कटने वाला हिस्सा पूरी तरह EPF में जाता है, लेकिन नियोक्ता के योगदान का 8.33% EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है। यह राशि सरकार द्वारा तय वेतन सीमा (Salary limit fixed by the government) के हिसाब से होती है, न कि आपकी असली सैलरी के अनुसार। इसलिए अधिक वेतन वाले कर्मचारियों की पेंशन भी एक तय सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ पाती। यह पैसा आपके व्यक्तिगत खाते में नहीं जाता, बल्कि पेंशन फंड में जमा होता है और रिटायरमेंट के बाद आपको मासिक पेंशन के रूप में मिलता है।
50 साल की उम्र में पेंशन लेने पर रकम क्यों कम होती है-
ईपीएफओ के नियमों (EPFO Rules) के अनुसार कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद पेंशन लेना शुरू कर सकता है, लेकिन इसे अर्ली पेंशन माना जाता है। अगर कोई 58 साल से पहले पेंशन लेना शुरू करता है, तो हर साल के हिसाब से पेंशन की राशि में कटौती होती है। यह कटौती स्थायी होती है और जीवनभर कम पेंशन मिलती है। वहीं, अगर कर्मचारी 58 साल के बाद भी पेंशन न लेकर 60 साल तक इंतजार करता है, तो उसे ज्यादा पेंशन मिलने का फायदा हो सकता है।
एकमुश्त पेंशन निकालने का विकल्प-
कई कर्मचारियों को चिंता रहती है कि अगर उनकी नौकरी 10 साल से पहले खत्म हो जाए तो पेंशन (pension) का पैसा चला जाएगा। ऐसा नहीं है। अगर किसी कर्मचारी की कुल सेवा 10 साल से कम है, तो वह मासिक पेंशन का हकदार नहीं बनता, लेकिन उसकी जमा रकम सुरक्षित रहती है। नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी एकमुश्त निकासी (Employee Lump Sum Withdrawal) का विकल्प ले सकता है। इसके लिए ईपीएफओ एक तय सर्विस टेबल (EPFO has a fixed service table) का इस्तेमाल करता है, जिसमें नौकरी के वर्षों के हिसाब से एक फैक्टर तय किया जाता है और उसे वेतन से गुणा करके राशि दी जाती है।
