PM Kisan – अगर किसानों ने समय रहते यह जरूरी काम नहीं किया, तो उनके खाते में सरकारी योजनाओं की रकम आना बंद हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) के बिना न सिर्फ किसान सम्मान निधि से वंचित होना पड़ेगा, बल्कि आपदाओं में मिलने वाला मुआवजा भी नहीं मिल पाएगा। इसलिए तय समय सीमा से पहले यह प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी है-
हिमाचल प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे डिजिटल सर्वे में मंडी जिले के करीब 50% किसानों ने भाग नहीं लिया है। 1,73,301 पंजीकृत किसानों में से अब तक सिर्फ 92,592 किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है, जबकि 80,709 से अधिक किसानों ने अभी तक सर्वे नहीं कराया है।
ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को 20 फरवरी तक का समय दिया है। यदि इस समय तक डिजिटल सर्वे पूरा कर पंजीकरण नहीं कराया गया, तो वे सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे और पीएम सम्मान किसान निधि जैसी योजनाओं से भी वंचित रह सकते हैं।
केंद्र सरकार की ओर से एग्रीस्टैक कंपनी के तहत चल रहे डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।
वंचित होना पड़ सकता है योजनाओं से-
यदि किसान इस तय समय सीमा में अपनी फसलों का विवरण दर्ज नहीं कराते हैं, तो उन्हें भविष्य में केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और किसान सम्मान निधि सहित अन्य लाभों से पूरी तरह वंचित रहना पड़ सकता है।
केवल डिजिटल रिकॉर्ड वाले किसानों को मिलेगा फायदा-
कृषि विभाग ने साफ किया है कि भविष्य में खेती से जुड़ी सभी सरकारी मदद डिजिटल रिकॉर्ड पर ही आधारित होगी। इसके अलावा, ओलावृष्टि, सूखा या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में फसल नुकसान का मुआवजा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
खाद, बीज, कीटनाशक और आधुनिक कृषि उपकरणों (modern agricultural equipment) पर मिलने वाली सरकारी छूट बंद हो सकती है। किसान क्रेडिट कार्ड (kisan credit card) और कृषि ऋण प्राप्त करने में भारी तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
जानें क्या कहते हैं अधिकारी-
सभी किसानों से अनुरोध है कि वे डिजिटल फसल सर्वेक्षण (digital crop survey) के लिए अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। किसी भी असुविधा से बचने के लिए 20 फरवरी से पहले सर्वे पूरा कराना जरूरी है। यह प्रक्रिया पारदर्शी खेती (transparent farming) और सरकारी लाभों के त्वरित वितरण के लिए अनिवार्य है। देरी होने पर भविष्य में लाभों से वंचित होना पड़ सकता है।
-डा. रामचंद्र चौधरी, उपनिदेशक, कृषि विभाग, मंडी
