8th Pay Commission : सरकार हर दस साल में बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों को वित्तीय तौर पर राहत देने के लिए नया वेतन आयोग लागू करती है। अब तक सात वेतन आयोग का कार्य काल पूरा हो चुका है और अब ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों में आठवें वतन आयोग (8th Pay Commission ) को लेकर इंतजार बना हुआ है। अब हाल ही में सरकार ने कर्मचारियों को बड़ी जानकारी दी है। आइए खबर में जानते हैं इस बारे में-
जब भी नया वेतन लागू किया जाता है तो इससे कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल आएगा। केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स काफी बेसब्री से 8वें वेतन आयोग लागू के लागू होने के इंतजार में हैं। अब हाल ही में कर्मचारियों (Central Employees News) के लिए सरकार ने नए पे कमीशन से जुड़ा बड़ा अपडेट दिया है। सरकार ने संसद में नया पे कमीशन कब लागू होगा इस बारे में जानकारी साझा की है।
8वें सेंट्रल पे कमीशन के स्टेटस से जुड़े जवाब
सरकार का कहना है कि वैसे तो 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) पहले ही आधिकारिक रुप से बन गया है और एक तय टाइमफ्रेम में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने वाला है। वहीं, संसद के सदस्यों की ओर से रिव्यू के अंतर्गत खास एरिया और पैनल के प्रपोजल को लागू करने के रोडमैप पर स्पष्टता की मांग की हैं। दो दिन पहले यह स्पष्टीकरण लिखित जवाब में दिया गया है, जहां फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से 8वें सेंट्रल पे कमीशन के स्टेटस (pay commission status), स्कोप, टाइमलाइन और फिस्कल असर पर कुछ सवालों के बारे में जवाब दिए हैं।
संसद ने नए पे कमीशन को लेकर मांगी स्पष्टता
बता दें कि संसद में सदस्यों की ओर से यह मुद्दा उठाते हुए कहा है कि सरकार से कमीशन के मौजूदा स्टेटस के साथ ही असल में वह क्या जांच करेगा और उसकी सिफारिशें कितनी जल्दी एम्प्लॉइज और पेंशनर्स के लिए फायदे में तब्दील होंगी, इन सबके बारे में बताने को कहा है।
कुछ खास सवालों में सांसदों ने CPC द्वारा रिव्यू (MPs reviewed by the CPC) के अंतर्गत कई चीजें शामिल है। इनमे खास एरिया, जिसमें पे स्केल, अलाउंस और पेंशन स्ट्रक्चर में प्रपोजड बदलाव शामिल हैं और साथ ही सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार का रोडमैप के बारे में जानकारी मांगी है।
कर्मचारी यूनियंस यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनकी सैलरी और पेंशन में बदलाव कब से लागू किए जाएंगे।
कब हुआ था 8वें सेंट्रल पे कमीशन का गठन
वित्त मंत्रालय ने जवाब देते हुए स्पष्टीकरण दिया है कि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का कहना है कि सरकार की ओर से पहला फॉर्मल कदम पहले ही उठाया गया है। ऐसे में मंत्री ने जवाब देते हुए कहा है कि सरकार की ओर से 8वें सेंट्रल पे कमीशन (8th Central Pay Commission) का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया है। उनका कहना है कि कमीशन को यह काम सौपां गया है कि वह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के सैलरी, अलाउंस, पेंशन और इससे जुड़े दूसरे सर्विस मामलों की जांच करें और उसे एक साफ डेडलाइन दी गई है। जवाब के मुताबिक संभावना है कि 8वें CPC अपने गठन के 18 महीने के अंदर अपनी सिफारिशों को सौंप देगा।
बता दें कि इससे रिपोर्ट जमा करने का समय में इजाफा हुआ है, हालांकि सरकार की ओर से इस स्टेज पर किसी अंतरिम माइलस्टोन या लागू करने के फेज के बारे में भी नहीं बताया है।
रिपोर्ट सौपें जाने पर होगी बजट प्लानिंग
सांसदों ने यह भी सवाल किया है कि क्या सरकार की ओर से यूनियन बजट पर पे कमीशन की सिफारिशों को लागू करने के असर को लेकर अंदाजा लगाया है। सरकार ने इसके जवाब में कहा है कि अभी लागत के बारे में नंबर लगाना थोड़ा जल्दबाजी का काम होगा। मंत्री का कहना है कि 8th CPC द्वारा सिफारिशें किए जाने और सरकार द्वारा स्वीकार करने के बाद ही 8th CPC का फिस्कल (8th CPC Fiscal) का क्या असर रहा है, इन सबका सही पता चल सकेगा।
इससे यह तो क्लियर हो गया है कि कमीशन द्वारा रिपोर्ट सौपें (Submit report by commission) जाने पर बजट प्लानिंग होगी और सरकार की ओर से यह आखिरी फैसला लिया जाएगा कि किन सिफारिशों को स्वीकार किया जाए।
कब तक आएगी कमीशन की रिपोर्ट
सबसे पहले तो आप यह जान लें कि आठवें वेतन आयोग (eighth pay commission) को नवंबर 2025 में नोटिफाई किया गया था, जो 7वें वेतन आयोग के तकरीबन एक दशक बाद हुआ हैं, जिसके काम में कई बदलाव शामिल है। जैसे कि सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए पे स्केल, अलाउंस, पेंशन स्ट्रक्चर और संबंधित सर्विस कंडीशंस आदि शामिल है। सरकार ने जो 18 महीने की टाइमलाइन दी है, उस हिसाब से कमीशन की रिपोर्ट 2027 में आ सकती है, जब तक कि प्रोसेस में तेजी नहीं आ जाती है।
सैलरी और पेंशन से जुड़े मामलों पर मांग हुई तेज
जैसे ही कमीशन की ओर से काम में तेजी लाई जा रही है। वैसे-वैसे कर्मचारी यूनियंस को सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) की ओर से आज देशभर में एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है, जिसमें सैलरी और पेंशन से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई की मांग की गई है।
इस दौरान जो मांगे की गई है। उन मांगो में 20 प्रतिशत अंतरिम राहत, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज करना और नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) को समाप्त करके पुरानी पेंशन स्कीम (old pension scheme) लागू करना शामिल हैं यूनियनों की ओर से 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारियों के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस के लिए भी दबाव डाल रही हैं।
एडमिनिस्ट्रेटिव सेवाओं में आ सकती है रुकावट
बता दें कि यह हड़ताल सेंट्रल ट्रेड यूनियनों (Central Trade Unions) के बड़े विरोध के साथ ही नए लेबर कोड के अगेंस्ट की जारी ही है, जिससे सरकारी ऑफिस और एडमिनिस्ट्रेटिव सेवाओं में रुकावट के आसार बढ़े है। कुछ बैंकों की ओर से पहले ही ग्राहकों को हड़ताल के दिन सेवा पर जो प्रभाव पड़ता है, उसके प्रति आगाह किया है। संसद ने जो जवाब मांगा हैं और नियनों द्वारा सड़कों पर दबाव बढ़ाने के साथ आगामी महीनों में 8वें वेतन आयोग के काम की गति तेज की जा सकती है।
