High Court News : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डिपुटेशन पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डिपुटेशन पर रहने वाले कर्मचारी (employee) को हमेशा उनके मूल विभाग का ही वेतनमान मिलेगा… कोर्ट की ओर से आए इस फैसले को विस्तार से जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने डिपुटेशन पर कार्यरत कर्मचारियों को उच्च वेतन और सेवा लाभ देने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि डिपुटेशन कर्मचारी (deputation employee) को वही वेतनमान मिलेगा जो उनके मूल विभाग में लागू है। साथ ही, आवश्यक योग्यता पूरी न होने पर किसी कर्मचारी को उच्च पद का वेतन नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने आजाद सिंह की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने 2 जनवरी 2024 और 17 नवंबर 2025 के आदेशों को रद्द करने तथा 9 मार्च 2004 से 12 जुलाई 2009 तक की डिपुटेशन अवधि के लिए 4000-6000 रुपये (संशोधित 5200-20200, ग्रेड पे 2400) वेतन, वरिष्ठता और एसीपी सहित अन्य लाभ देने की मांग की थी।
अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता को 2004 में हैफेड में स्टोर कीपर के रूप में डिपुटेशन पर भेजा गया और बाद में उनका समायोजन किया गया। याचिकाकर्ता का दावा था कि उन्हें 2022 में संबंधित वेतनमान का लाभ मिला था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को यह लाभ प्रदान किया जा चुका है।
राज्य सरकार (state government) ने अदालत को बताया कि डिपुटेशन अवधि में याचिकाकर्ता ने वेतन को लेकर कोई आपत्ति नहीं की और पहली बार उच्च वेतनमान की मांग 2017 में की गई। इसके अलावा, जिस पद का वेतनमान मांगा गया, उसके लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (Educational qualification) और अनुभव उस समय याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध नहीं थे।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि डिपुटेशन पर रहने वाले कर्मचारी का लियन उसके मूल विभाग में ही बना रहता है, इसलिए सामान्यतः उसी विभाग का वेतनमान लागू होता है। ‘लियन’ का अर्थ है किसी कर्मचारी का अपने मूल पद पर स्थायी अधिकार, जो तब तक समाप्त नहीं होता जब तक वह किसी अन्य पद पर स्थायी रूप से नियुक्त न हो जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि 2016 के सेवा नियमों के आधार पर 2022 में दिया गया लाभ उस समय की डिपुटेशन अवधि (2004-2009) पर लागू नहीं हो सकता था।
सभी तथ्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने पाया कि याचिका में कोई आधार नहीं है और इसे खारिज कर दिया। साथ ही, संबंधित सभी लंबित आवेदन भी स्वतः निरस्त माने जाएंगे।
