Haryana News : हरियाणा में रेलवे की विकास की गति को तेज करते हुए दो नई रेलवे लाइन को मंजूरी दे दी गई है। अब जल्द ही हरियाणा में दो नई रेलवे लाइनों (two new railway lines) की सौगात मिलने वाली है। रेलवे के इस नए प्रोजेक्ट से तकरीबन 6 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। आइए खबर के माध्यम से जानते हैं कि हरियाणा में ये दो नई रेलवे लाइनें कहां बिछाए जाएंगी।
हरियाणा में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अब हाल ही में हरियाणा (Haryana News ) में दो नई रेलवे लाइनों को शासन की ओर से हरी झंडी दिखा दी गई है। इस नई रेलवे लाइन के बिछाए जाने से यात्रियों को सुविधा मिल सकेगी और इस रेलवे प्रोजेक्ट पर 6 हजार करोड़ की लागत आ सकती है। आइए खबर के माध्यम से विस्तार से जानते हैं इस बारे में –
कहां बिछाई जाएगी ये दोनों रेलवे लाइन
केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली-जम्मू मार्ग (Delhi-Jammu route) पर मौजुद दिल्ली से अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने को हरी झंडी दिखा दी गई है। यह रेल लाइन 194 किलोमीटर लंबी बनाई जाएगी और इस प्रोजेक्ट पर तकरीबन 5983 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई है। इस प्रोजेक्ट को अगले 4 सालों में पूरा करने का प्लान है।
इस रेलखंड पर ज्यादा है ट्रेनों का भार
अभी फिलहाल में तो दिल्ली-अंबाला रेलखंड (Delhi-Ambala railway line) अपनी कैपेसिटी से तकरीबन 66 प्रतिशत ज्यादा ट्रेनों का भार झेल रहा है। अभी तो इस रूट पर हर रोज 150 से ज्यादा ट्रेनें संचालित की जाती है, जिनमें लोकल ट्रेनों के साथ ही शताब्दी, राजधानी, वंदे भारत और लंबी दूरी की कई ट्रेनों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी संचालन किया जाता है।
यहां पर ज्यादा ट्राफिक और जाम के चलते ट्रेनों को आउटर या छोटे स्टेशनों पर रूकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। नई रेल लाइन (Haryana new railway line) बिछाए जाने से आवागमन सुगम होने के साथ ही संचालन का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
कैसे सामरिक दृष्टि से जरूरी है रेलखंड
यह रेलखंड इसलिए भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी रास्ते से जम्मू-कश्मीर और पंजाब तक ट्रेनों का संचालन (Trains running to Punjab) होता है। अब दिल्ली से श्रीनगर तक रेल कनेक्टिविटी की शुरुआत से इस रास्ते पर ट्रेनों की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में काफी लंबे समय से अतिरिक्त रेल लाइनों की जरूरत महसूस हो रही थी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnav) का कहना है कि इस प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट चार साल पहले ही तैयार की गई थी और अब इसके निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। ज्यादातर जगहों पर रेलवे की भूमि मौजुद नहीं है, जिस वजह से भूमि अधिग्रहण की जरूरत सीमित रहने वाली है।
पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा
इस प्रोजेक्ट के तहत रास्ते पर दो रेल ओवर ब्रिज (two rail over bridge) और 79 रेल अंडर ब्रिज को बनाया जाएगा, जिससे रेल और सड़क यातायात दोनों बेहतर हो सकेंगे और रेल दुर्घटनाओं के कम आसार होंगे।
इन नई रेल लाइनों (new rail lines) के बिछाए जाने से श्री माता वैष्णो देवी, श्रीनगर आदि कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होगी और इसके साथ ही कई अन्य फायदे भी होंगे। इससे उत्तर भारत के थर्मल पावर प्लांट तक कोयला की सप्लाई में तेजी आएगी और कृषि गोदामों से माल ढुलाई का काम तेज होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे सड़कों पर माल परिवहन का भार कम होगा।
रेल कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक होगी मजबूत
इस प्रोजेक्ट (Haryana Railway Projects) के पूरा होते ही हर साल तकरीबन 43 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है, जो देखा जाए तो तकरीबन 1.7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अगले चरण में अंबाला से जालंधर तक तीसरी रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव है और चौथी रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे उत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी पहले से कहीं ज्याद मजबूत होगी।
