Expressway News : देश के एक्सप्रेसवे पर सफर अब और भी स्मार्ट और सुरक्षित होने वाला है। बता दें कि अब नई तकनीक के तहत वाहनों के बीच सीधा कम्युनिकेशन (V2X technology) संभव बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें 6G नेटवर्क अहम भूमिका निभाएगा। इस हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के जरिए गाड़ियां एक-दूसरे को सड़क पर होने वाली गतिविधियां सांझा कर सकेंगे। आइए जानते हैं इस बारे में।
देश के एक्सप्रेसवे अब हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार अब एक नये सिस्टम की शुरुआत करने वाली है। इसके तहत एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाले वाहन आपस में सीधे कम्युनिकेशन (6G sensor network trials) कर सकेंगे। अब 6G नेटवर्क तकनीक के सहारे गाड़ियां ट्रैफिक, दुर्घटना, मौसम और सड़क की स्थिति जैसी अहम जानकारियां रियल टाइम में साझा करेंगीी। इसकी वजह से सफर करना और भी ज्यादा आरामदायक हो जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे पर पूरा होगा काम-
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर कारें आपस में बात करने वाली है। इसके तहत सड़क पर लगे सेंसरों के जरिये वाहन एक-दूसरे को सूचना भेजने में सक्षम होंगे। भारत में स्मार्ट कारों और लीविंग इंटेलिजेंट नेशनल हाईवे की मदद से सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।
6जी सेंसर नेटवर्क का ट्रायल हुआ शुरू-
दिसंबर 2026 में दुनिया के सबसे लंबे 6जी सेंसर नेटवर्क ट्रायल की शुरुआत अब की जाने वाली है। योजनाओं के तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के नीचे और बगल में लाखों सेंसर (Delhi Mumbai Expressway News) बिछाए जाने वाले हैं। जोकि फर्राटा भरती कारों को रेड लाइट, साइनबोर्ड, राहगीर, वाहन आदि की पहचान करने में सक्षम बनाने वाली है। इस तकनीक को व्हीकल टू एवरीथिंग संचार माध्यम कहा जाता है।
एक्सपर्ट्स ने कही ये बात-
एक्सपर्ट्स ने बताया है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एवं दूरसंचार मंत्रालय के बीच इसको लेकर सहमति बनाई जा रही है। इसके तहत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के तीसरे चरण पर 6जी सेंसर नेटवर्क का दुनिया का पहला सबसे बड़ा हाईवे ट्रायल (Delhi Mumbai Expressway updates) किया जा रहा है। इसके तहत अवरोध या दुर्घटना होती है तो 6जी नेटवर्क के जरिए पीछे आ रही गाड़ियों के ब्रेक अपने-आप लग जाने वाले हैं। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया है कि 6जी ट्रायल का पहला प्रोटोटाइप दिसंबर 2026 तक वडोदरा-मुंबई खंड पर शुरू हो जाएगा।
जानिये क्या है वी2एक्स टैक्नोलोजी-
व्हीकल टू एवरीथिंग तकनीक के जरिए वाहन एक-दूसरे को वास्तविक समय में जानकारी साझा कर सकते हैं। विंडशील्ड पर एक डिजिटल डिस्प्ले लगाया जाता है। जोकि आसपास (Delhi Mumbai Expressway latest news) की अन्य गाड़ियों, ट्रैफिक लाइट और सड़क सेंसर से मिल रहे डेटा को दिखता है। हरी, नीली और सफेद लाइनें लगातार जानकारी का आदान-प्रदान कर रही है।
यहां पर मौजूद है ऐसी सड़क तकनीकी-
सड़क परिवहन की भविष्यगामी तकनीक में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान सबसे आगे रहने वाला है। चीन 5जी पर वी2एक्स में सबसे आगे है, वे 2026 तक कई शहरों को 6जी ट्रायल (6G sensor networks) के लिए तैयारी कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया सेफरूट 6जी तकनीकी को अपना रहे हैं। सेटेलाइट और जमीनी 6जी नेटवर्क से वाहन सुदूर पहाड़ी इलाके या सुरंग में भी नेटवर्क को बनाये रखने वाला है। इसके साथ ही में जापान माइक्रोसेकंड लेटेंसी (6G sensor) तकनीक का मुख्य जोर सटीकता पर है। इसमें वाहन 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर भी आपस में टकराएंगे नहीं।
सिर्फ इतने घंटे में कवर हो जाएगी 1350 किलोमीटर की दूरी-
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे लंबी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना बनकर सामने आ रही है। 1,350 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पूरा होने पर यह देश की राजधानी दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai News) से कनेक्ट होने वाला है और दोनों महानगरों के बीच यात्रा समय को फिलहाल 24 घंटे से घटाकर सिर्फ 12 घंटे कर देता है। दिल्ली से शुरू होने वाला ये एक्सप्रेसवे 5 राज्यों- हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरने वाला है।
प्रगति पर पहुंचा एक्सप्रेसवे का निर्माण-
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल नवंबर में गुजरात के सूरत में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते कहा था कि हम सभी बाधाओं को दूर कर परियोजना (Expressway Project) को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क अच्छी तरह तैयार हुई है। हम लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके छोटी–मोटी कमियों को भी दूर कर रहे हैं।
यात्रा करनी हो जाएगी सुविधाजनक-
इसके साथ ही में गडकरी ने बताया था कि भविष्य में इस सड़क पर इलेक्ट्रिक ट्रक और बसें दौड़ाया जा सकता है। हम इस परियोजना (6G sensor on Expressway) में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी शामिल करेंगे इसकी वजह से परिवहन लागत कम हो सके। ये सड़क तैयार होने के बाद निर्यात के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने वाला है। लोगों की यात्रा और भी ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगी।
