Gold Price Crash Alert : सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद अब लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। अब एक्सपर्ट ने सोने की कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। बताया जा रहा है कि 2027 तक सोने की कीमतों (Gold Rate Crash Alert) में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिसको लेकर एक्सपर्ट ने चेतावनी जारी की है। आइए खबर के माध्यम से विस्तार से जानते हैं इस बारे में-
फेस्टिवल सीजन की शुरुआत के साथ ही सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। अब बीते कुछ दिनों के ताबड़तोड़ उछाल के बाद सोने की कीमतों ने हाई रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन अब इस गिरावट के चलते सोने की कीमतों (Gold Price Crash Alert) ऑल टाइम हाई से नीचे आ गई है। खबर के माध्यम से जानिए कि 2027 तक सोने की कीमतें कहां पहुंच सकती है।
MCX पर गोल्ड का भाव
जनवरी 2026 में सोने की कीमतों (Gold Rate on MCX ) ने 1,80,000 रुपये के पार जाकर हाई रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन फरवरी महीने में इसमे गिरावट देखने को मिली है। 13 फरवरी को MCX पर गोल्ड का भाव (MCX Gold Rates) 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यानी देखा जाए तो सोने का भाव रिकॉर्ड हाई से तकरीबन 24,500 रुपये नीचे आ गया है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में सोना अपने शिखर से 10.50 प्रतिशत कम होकर $5,046 पर आ गया है।
आगे क्या रहेगी सोने की चाल
जानकारो का कहना है कि सोने की कीमतों (gold prices Falls)में तूफानी तेजी पर अब ब्रेक लग गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस एक बार फिर अमेरिका के साथ डॉलर में ट्रेड शुरू कर सकता है। बीते कुछ सालों से रूस और चीन मिलकर डी-डॉलराइजेशन की लिडिंग कर रहे थे और सोने का स्टोर जमा कर रहे थे।
अब बताया जा रहा है क पुतिन प्रशासन 7 मुख्य सेक्टरों में अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी करना चाहता है, जिसमे डॉलर बेस्ड पेमेंट सिस्टम (dollar based payment system)में वापसी बेहद जरूरी है। यह कदम रूस-यूक्रेन वॉर को समाप्त करने के किसी सीक्रेट एग्रीमेंट का पार्ट होने की संभावना है। बता दें कि अगर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश वापस डॉलर में बिजनेस शुरू करता है, तो ये सोने की मांग के लिए चुनौतीभरा हो सकता है।
किन कारणों से बढ़े थे सोने के दाम
सोने की कीमतों (gold prices) को नई ऊचाईयों पर पहुंचाने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की अहम भूमिका रही है। SEBI रजिस्टर्ड एक्सपर्ट का कहना है कि जब से डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से व्हाइट हाउस पहुंचे और टैरिफ पॉलिसी की शुरुआत की गई है, तब से देशों ने सोने को सेफ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन मानकर खरीदी शुरू की है।
उनका कहना है कि BRICS देशों के बैंक दुनिया का 50 प्रतिशत से अधिक सोना खरीद रहे थे, जिसके चलते बाजार में कमी हो गई थी और दामों (Sone ke Rate) में इजाफा देखा जा रहा था, लेकिन अब अगर रूस वापस डॉलर की ओर वापसी लेता है तो इससे ये बैंक अपना जमा किया हुआ सोना बाजार में सेल कर सकेंगे। इससे बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ने के साथ ही कीमतों में कमी आएगी।
2027 के आखिर तक कहां पहुंचेगा सोना
एक्सपर्ट का कहना है कि सोना अपना रिकॉर्ड हाई लेवल (gold record high level) पर पहुंच चुका है, अब इसमें जो भी थोड़ी बहुत तेजी आती है, वो एक डेड कैट बाउंस होगी। उन्होंने अनुमान जताया है कि देशभर में 2027 के आखिर तक सोने का भाव (Sone Ke Bhav) 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ सकता हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2027 के आखिर तक सोने का भाव $3,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने निवेशकों को कहा है कि अब सोने को सुरक्षित निवेश मानना थेाड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
जानिए क्या रही है ट्रंप की पॉलिसी
इसके साथ ही क्रेमलिन के एक इंटरनल मेमो से यह पता चल रहा है कि रूस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जीवाश्म ईंधन (fossil fuels), प्राकृतिक गैस और कच्चे माल के इलाकों में बड़ी पोर्टनरशिप देख रहा है। ट्रंप की पॉलिसी हमेशा यही रही है कि डॉलर को मजबूत किया जाए। रूस को इस बारे में पता है कि अगर उसे अमेरिकी मार्केट और टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना है तो उसके लिए उसे डॉलर को अपनाना ही होगा।
