EMI Calculation : अगर आप भी ईएमआई से तंग हो गए हैं तो ये खबर आपके काफी काम की हो सकती है। बता दें कि अब आप ईएमआई (EMI Rates) से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको इस बारे में बताने जा रहे हैं कि फिक्स्ड या फ्लोटिंग में से कौन सा होम लोन लेना बेहतर होने वाला है। खबर के माध्यम से जानिये इस बारे में।
घर खरीदने का सपना अब पूरा होने वाला है। अब आपको लंबे समय तक ईएमआई के बोझ से परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि अब आप फिक्स्ड रेट (fixed rate) या फ्लोटिंग रेट में से किसी एक का चयन करके पैसों की बंपर बचत कर सकते हैं। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के इस दौर में सही विकल्प चुनना आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।
जानिये क्या होती है फिक्स्ड ब्याज दर
फिक्स्ड रेट होम लोन में पूरी लोन अवधि या तय समय तक ब्याज दर स्थिर बनी रहती है। इसका सीधे तौर पर ये मतलब होता है कि आपकी EMI (Home loan EMI) हर महीने लगभग समान रहेगी। अगर आपने 8 प्रतिशत की दर पर लोन लिया है तो बाजार में दरें बढ़ने या घटने का आपकी EMI पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
फिक्स्ड ब्याज दर से होगा ये लाभ
EMI रहेगी स्थिर :
जब EMI तय और स्थिर रहती है तो फिर हर महीने आपको समान राशि (loan EMI calculation) का भुगतान करना होता है। इसकी वजह से घरेलू बजट की योजना बनाना आसान हो जाता है और अचानक बढ़ते खर्च का दबाव नहीं पड़ता।
ब्याज दर बढ़ने के जोखिम से सुरक्षा :
स्थिर EMI होने पर बाजार में ब्याज दरें बढ़ने का प्रभाव आपकी किस्त पर नहीं देखने को मिलता है। इसकी वजह से लोन अवधि के दौरान वित्तीय अनिश्चितता कम रहती है और आप सुरक्षित महसूस करते हैं।
फिक्स्ड ब्याज दर के नुकसान-
शुरुआत में दरें आमतौर पर फ्लोटिंग से थोड़ी ज्यादा :
फिक्स्ड ब्याज दर वाले लोन में शुरुआती दरें अक्सर फ्लोटिंग रेट (loan EMI calculation Update) की तुलना में थोड़ी ज्यादा होती है। इसकी वजह ये है कि बैंक भविष्य में ब्याज दर बढ़ने के जोखिम को पहले से ही कवर कर लेते हैं।
कम ब्याज का फायदा तुरंत नहीं :
फिक्स्ड रेट लोन में बाजार की ब्याज दर कम होने पर भी आपकी EMI वही रहती है। इसका मतलब है कि दरों में गिरावट का सीधा लाभ आपको तब तक नहीं मिलता है, जब तक आप लोन को रीफाइनेंस न करवा लें।
जानिये क्या है फ्लोटिंग ब्याज दर
फ्लोटिंग रेट बाजार के साथ बदलती रहती है। अधिकतर बैंक इसे रेपो रेट से कनेक्ट कर देते हैं। इसे Reserve Bank of India के द्वारा तय किया जाता है। जब RBI रेपो रेट को कम करती है तो फिर आपकी EMI या लोन अवधि कम हो सकती है और बढ़ने पर EMI बढ़ सकती है।
फ्लोटिंग ब्याज दर का लाभ
शुरुआती दरें अक्सर फिक्स्ड से कम :
फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन में शुरुआत में ब्याज दर आमतौर पर फिक्स्ड रेट से कम हो जाती है। इससे शुरुआती EMI कम रहती है और लोन लेना थोड़ा किफायती लग सकता है।
ब्याज दर घटने पर सीधा लाभ :
अगर बाजार में ब्याज दरें कम होती हैं तो फिर फ्लोटिंग रेट लोन में आपकी EMI (Loan EMI) या लोन अवधि कम कर सकती है। इसका मतलब है कि दरों में गिरावट का लाभ आपको सीधे तौर पर मिल जाता है।
फ्लोटिंग ब्याज दर के नुकसान
EMI में उतार-चढ़ाव :
फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन में बाजार की दरों के मुताबिक ही EMI बदल सकती है। ब्याज दर बढ़ने पर आपकी मासिक किस्त में भी उछाल आता है। इसकी वजह से वित्तीय दबाव का अहसास हो सकता है।
लंबी अवधि में अनिश्चितता :
लंबी अवधि के लोन में ब्याज दरों (Home loan intrest Rate) का रुख पहले से तय नहीं होता है। ऐसे में कुल भुगतान राशि का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है, इससे भविष्य की वित्तीय योजना प्रभावित हो सकती है।
जानिये कौन सा विकल्प है बेहतर
अगर आपकी आय स्थिर है और आप जोखिम नहीं लेना चाहते हैं तो फिर फिक्स्ड रेट बेहतर हो सकता है। साथ ही में अगर आप बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हैं और भविष्य में दरें घटने (Home loan) की उम्मीद देखते हैं, तो फिर आपके लिए फ्लोटिंग फायदेमंद हो सकता है। कई बैंक हाइब्रिड विकल्प भी देते हैं, जिसमें शुरुआती कुछ साल फिक्स्ड और बाद में फ्लोटिंग दर लागू होती है।
