अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने “स्टेट ऑफ द यूनियन” संबोधन में एक बेहद विवादित दावे किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 के सैन्य संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़े स्तर पर तबाही को टाला। ट्रंप ने दावा किया कि अगर उन्होंने समय रहते कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो करीब 3.5 करोड़ (35 मिलियन) लोगों की मौत हो सकती थी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने उन्हें ऐसा बताया था।
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि उनके दूसरे कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ बड़े युद्धों को रोकने का दावा किया है, जिसमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष भी शामिल है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर अमेरिका ने दखल नहीं दिया होता तो भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर जनहानि होती।
डोनाल्ड ट्रंप ने कही ये बात
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा,
“पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था, 35 मिलियन लोगों की मौत हो सकती थी, अगर मेरी भागीदारी नहीं होती।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी कूटनीति ने दोनों देशों को एक बड़े विनाश से बचाया।
यह बयान खासतौर पर इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि ट्रंप ने इसे एक ऐसे संदर्भ में बताया जो अब तक सार्वजनिक या आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
उनके आरोप के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने उन्हें बताया था कि उन्होंने हस्तक्षेप कर पाकिस्तान के लाखों लोगों की जान बचाई।
आलोचना और प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक विश्लेषकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई नए सूत्रों का कहना है कि यह बयान एक तरह का राजनीतिक दावा हो सकता है और इसके बारे में कोई स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। कुछ विश्लेषकों ने कहा कि ट्रंप ने अपने बयान में शब्दों की गलत व्याख्या की है और शायद उनका वास्तविक तात्पर्य यह था कि उन्होंने संघर्ष को शांत करने में कुछ भूमिका निभाई।
भारत सरकार की ओर से भी पिछले मामलों में डोनाल्ड ट्रंप के इसी तरह के दावों को नकारा जा चुका है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अमेरिका का कोई बड़ा मध्यस्थ भूमिका नहीं थी और जिसने संघर्ष को रोका, वह दोनों देशों के सैन्य संवाद और हॉटलाइन संचार के दम पर.
ऑपरेशन सिंदूर और विवाद
“ऑपरेशन सिंदूर” वह सैन्य तनाव था जो मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चला था। इस संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों में मौजूदा तनाव बढ़ गया था और तब सीज़फायर समझौते के जरिये संघर्ष रोक दिया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान विश्व राजनीति में काफी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह एक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सीधे तौर पर दक्षिण एशियाई संघर्ष के संदर्भ में किया गया दावा है, और इसने कई सवाल खड़े कर दिये हैं कि सत्य क्या है और कितनी “कूटनीतिक भूमिका” वास्तव में निभाई गयी।
