Hexagon Alliance: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आज यानी 25 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 9 बजे इज़रायल के लिए दो दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक व सुरक्षा सहयोग को नई उंचाइयों पर ले जाने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा से पहले इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़े रणनीतिक प्रस्ताव का खुलासा किया है, जिसे उन्होंने ‘Hexagon Alliance’ नाम दिया है।
नेतन्याहू का ‘Hexagon Alliance’ क्या है?
नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि
“वह मध्य पूर्व तथा उसके आसपास एक नया बहुउद्देश्यीय गठबंधन तैयार करना चाहते हैं, जिसमें भारत को एक प्रमुख साथी के रूप में शामिल किया गया है। इस प्रस्तावित ‘Hexagon’ में इज़रायल, भारत, ग्रीस, साइप्रस के साथ-साथ कई अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कट्टरपंथी विचारों, आतंकवाद और अस्थिरता को रोकने के लिए देशों के बीच रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।”
नेतन्याहू ने इसे एक ऐसी साझेदारी बताया है जो क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देगी और आतंकवादी चुनौतियों का सामना करने में सहयोग करेगी। हालांकि अभी तक किसी भी देश ने इस ब्लॉक को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन इसका संकेत वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव का है।
नरेंद्र मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक से भारत को फायदा
भारत को इस प्रस्तावित गठबंधन में शामिल करना नेतन्याहू द्वारा भारत को एक ग्लोबल पावर के रूप में मान्यता देने जैसा माना जा रहा है। इस कदम से भारत को मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है और यह सहयोग कई क्षेत्रों में विस्तृत हो सकता है — जिसमें रक्षा, खुफिया साझेदारी, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सुरक्षा शामिल हैं।
बिलकुल इसी तरह की विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग से भारत को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और अधिक मजबूती से स्थापित करने का अवसर मिल सकता है। खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में सुरक्षा तथा आर्थिक सहयोग के नए ढांचे बन रहे हैं और वैश्विक शक्ति समीकरण बदल रहा है।
पाकिस्तान, तुर्की और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ
इस प्रस्ताव का प्रत्यक्ष प्रभाव पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों पर भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन खासकर उन देशों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है जो क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। तुर्की के नेतृत्व वाले समूहों को इस नए ब्लॉक के कारण अपने रणनीतिक हितों में रूकावट का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल भारत-इज़रायल के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
