8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों में आठवें वेतन आयोग को लेकर इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। अब हाल ही में सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को तय करने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि आठवें पे कमीशन (8th Pay Commission) के लागू होने पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में तकरीबन 66 प्रतिशत का उछाल आ सकता है।
सरकार ने नवंबर 2025 में ही आठवें पे कमीशन का गठन कर दिया था। अब तो वेतन आयोग की ओर से कर्मचारियों, पेंशनरों और संगठनों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। अब हाल ही में सरकारी कर्मचारियों (Central Employees News) और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन को तय करने के लिए सरकार ने नोटिस जारी कर दिया है। खबर में जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
कब हुआ था 8वें पे कमीशन का गठन
सरकार की ओर से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद कर्मचारियों, पेंशनरों और संगठनों से सुझााव की मांग की हैं। सरकार की ओर से इस बारे में एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर दिया गया है। नोटिस के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से 3 नवंबर 2025 को एक प्रस्ताव के माध्यम से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन कर दिया गया था। आयोग का मकसद केंद्र सरकार के कर्मचारियों (Eighth Pay Commission) और पेंशनरों के सैलरी, अलाउंस और पेंशन से जुड़े स्ट्रक्चर की समीक्षा करना है।
कब तक जमा होंगे सुझाव
आयोग की ओर से कर्मचारी संघों, पेंशनर संगठनों, संस्थानों और इच्छुक व्यक्तियों से यह कहा है कि वे अपनी मांगें और सुझाव ऑनलाइन सब्मिट करवा दें। इसके लिए एक ऑनलाइन फॉर्म भी मौजूद कराया गया है, जिसे आयोग की वेबसाइट और MyGov पोर्टल पर फिल किया जा सकता है। आयोग की ओर से क्लियर किया गया है कि सभी प्रस्ताव सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ही स्वीकृत होंगे। डाक, ई-मेल या पीडीएफ के रूप में जो सुझाव भेजे जाएंगे, उनपर विचार नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक नोटिस के मुताबिक सुझाव और प्रस्ताव 30 अप्रैल 2026 तक जमा करने की तारीख तय की गई हैं। उसके बाद आयोग प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर आगे की सिफारिशें तैयारी की जाएंगी।
कितनी बढ़ेगी कर्मियों की सैलरी
अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांगो को स्वीकार कर लेती है तो केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी (salaries and pensions of government employees) में बंपर इजाफा हो सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी लगभग 66 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इससे केवल कर्मचारियों की सैलरी ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि न्यूनतम सैलरी तय करने का पुराना फॉर्मूला में भी बदलाव किया जा सकता है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार मौजूदा व्यवस्था आज के परिवारों के खर्च करने की पावर और जिम्मेदारियों को सही तरीके से शो नहीं करती है।
किस फॉर्मूले पर बेसड है कर्मियों की न्यूनतम सैलरी
जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी का हिसाब 1956 के एक फॉर्मूले पर बेसड (Calculation of minimum salary of employees) हो सकता है। यह तरीका 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन में निर्धारित किया गया था और इसे तीन सदस्यीय परिवार मॉडल भी कहते हैं। इस फॉर्मूले में एक परिवार में तीन सदस्य (कर्मचारी, कर्मचारी का जीवनसाथी और एक बच्चा। कर्मचारी यूनियनों के अनुसार अब यह मॉडल पुराना हो चुका है और आज के परिवारों की वास्तविक स्थिती को नहीं दर्शाता है। यूनियनों ने सुझाव दे दिया है कि परिवार की संख्या तीन से बढ़ाकर 5 मानी जाए। उनके अनुसार बढ़ती महंगाई और माता-पिता के साथ ही कई बच्चों की जिम्मेदारी के चलते पुराना फॉर्मूला अब पर्याप्त नहीं है।
