ईरान-अमेरिका युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद तेल-गैस की किल्लत के जख्म अभी ताजा हैं। LPG कतारों के बाद अब सोने-चांदी का आयात रुक गया। 5 टन सोना-8 टन चांदी कस्टम में अटका। शादी सीजन में दामों पर ब्रेक लग सकता है।
ईरान-अमेरिका युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल-गैस की सप्लाई चेन चरमरा गई, भारत में LPG सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगीं और कच्चे तेल की भारी किल्लत हुई। लेकिन जैसे ही यह संकट थमने की कगार पर पहुंचा, एक नया संकट सामने आ खड़ा हुआ – सोने-चांदी का आयात अचानक रुक गया। रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकों ने सरकारी निर्देशों की देरी के चलते विदेशी सप्लायर्स से सोना-चांदी की नई खरीदारी पूरी तरह रोक दी है। करीब 5 मीट्रिक टन सोना और 8 मीट्रिक टन चांदी कस्टम क्लियरेंस के अभाव में बंदरगाहों पर अटकी पड़ी है।
नया संकट: LPG के बाद सोने की किल्लत?
यह संकट अक्षय तृतीया के ठीक पहले पैदा हुआ है, जब शादी-विवाह का सीजन जोरों पर है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा खरीदार है। अपनी जरूरत का 90 फीसदी से ज्यादा सोना आयात पर निर्भर देश में यह रुकावट घरेलू बाजार को हिला सकती है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) हर साल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ मिलकर चुनिंदा बैंकों को सोने-चांदी आयात की मंजूरी देता है।
2025 का अंतिम आदेश 31 मार्च को समाप्त हो गया, लेकिन नया निर्देश जारी न होने से बैंकों ने सतर्कता बरतते हुए सभी नए ऑर्डर कैंसल कर दिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 1 अप्रैल से गोल्ड इंपोर्ट के नए आवेदन रद्द हो चुके हैं। फिलहाल MMTC और IIBX जैसे चुनिंदा चैनलों से सीमित आपूर्ति हो रही है, लेकिन यह मांग को पूरा करने के लिए नाकाफी है।
सरकारी मंजूरी में देरी से फंसा सोने का आयात
इस आयात रुकावट का असर उपभोक्ताओं पर सीधा पड़ेगा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट कहती है कि 2025 में भारत की सोने की मांग 710.9 मीट्रिक टन रही, जो पिछले पांच सालों का न्यूनतम स्तर था। अप्रैल-जून का शादी सीजन सोने की खरीदारी का पीक टाइम होता है, जब ज्वेलर्स टन भर सोना बिक्री करते हैं। सप्लाई कम होने से दिल्ली, मुंबई जैसे सर्राफा बाजारों में कीमतें चढ़ सकती हैं। पिछले सीजन में ही मांग बढ़ने से 10 ग्राम सोने के दाम 3,500 रुपये तक उछले थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिका है, ETF निवेश और सेंट्रल बैंक खरीदारी से समर्थन मिल रहा है। भारत में रुपये की मजबूती से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन शॉर्टेज से स्थानीय दबाव बढ़ेगा। ज्वेलरी इंडस्ट्री, जो 50 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है, पर भी संकट गहरा सकता है। कई ज्वेलर्स नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं, जिससे शादियों का बजट बिगड़ रहा है।
गोल्ड इंपोर्ट अटकने से आप पर क्या असर होगा?
भारत अपना सोना मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जो 45 फीसदी से ज्यादा सप्लाई देता है। इसके बाद UAE (12-15 फीसदी), दक्षिण अफ्रीका, पेरू, घाना, उज्बेकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया का नंबर आता है। ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक व्यापार पहले ही प्रभावित है, ऊपर से DGFT की देरी ने बाजार को और असुरक्षित कर दिया। सरकार ने हाल ही में FTA के दुरुपयोग पर अंकुश लगाते हुए सोना-चांदी-प्लैटिनम उत्पादों के आयात पर भी पाबंदी लगाई है, जो समस्या को और जटिल बनाता है।
भारत कहां-कहां से आयात करता है सोना?
ज्वेलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी बताते हैं कि छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। “अगर सप्लाई न आई तो शादी सीजन में ब्लैक मार्केट फल सकता है,” एक मुंबई ज्वेलर ने कहा। सरकार को तत्काल नया आदेश जारी करने की जरूरत है, वरना आर्थिक नुकसान बड़ा होगा। फिलहाल उपभोक्ता पुराना सोना रिसाइकल कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक यह चलन टिकेगा नहीं। क्या यह संकट शादी सीजन की चमक फीकी कर देगा? बाजार सांस थामे इंतजार कर रहा है।
