केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। आयोग ने अब अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 13 और 14 मई को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय (MoD), रेल मंत्रालय (MoR), कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
इन बैठकों को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आयोग सीधे तौर पर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों से जुड़े स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर रहा है।
दिल्ली की बैठक क्यों मानी जा रही है खास?
8वें वेतन आयोग की टीम अब जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को समझने की कोशिश कर रही है। रक्षा क्षेत्र और रेलवे से जुड़े कर्मचारी संगठनों के साथ हो रही चर्चा में नए वेतन ढांचे, भत्तों, सर्विस कंडीशन और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि इन्हीं बैठकों और सुझावों के आधार पर आयोग सरकार को सैलरी और पेंशन सुधार को लेकर अपनी सिफारिशें देगा।
कब तक आ सकती है आयोग की रिपोर्ट?
केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी कब लागू होगी। सरकार ने आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया है।
यदि अंतिम रिपोर्ट आने में देरी होती है, तो कर्मचारियों को राहत देने के लिए आयोग एक अंतरिम रिपोर्ट (Interim Report) भी पेश कर सकता है।
सैलरी बढ़ाने से पहले किन बातों पर होगा विचार?
8वां वेतन आयोग केवल कर्मचारियों की मांगों के आधार पर फैसला नहीं करेगा। आयोग को देश की आर्थिक स्थिति, सरकारी खर्च, वित्तीय अनुशासन और भविष्य में बढ़ने वाले पेंशन बोझ जैसे कई अहम पहलुओं का भी आकलन करना होगा।
इसके अलावा आयोग यह भी देखेगा कि सरकारी और निजी क्षेत्र के वेतन के बीच संतुलन बना रहे और राज्य सरकारों के बजट पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
न्यूनतम बेसिक पे ₹65,000 करने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने इस बार न्यूनतम बेसिक सैलरी को वर्तमान ₹18,000 से बढ़ाकर ₹65,000 करने की बड़ी मांग रखी है।
महाराष्ट्र के कर्मचारी और पेंशनर संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए मौजूदा वेतन ढांचा अब पर्याप्त नहीं रह गया है। उनका तर्क है कि ‘एकरायड फॉर्मूला’ (Aykroyd Formula) के अनुसार एक सामान्य परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेसिक पे में बड़ा संशोधन जरूरी है।
फिटमेंट फैक्टर 3.8 करने की मांग
8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.8 करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इससे कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन में बड़ा सुधार होगा। साथ ही यह कर्मचारियों की क्रय शक्ति को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
नई सैलरी तय करने का फॉर्मूला:
नई बेसिक सैलरी=पुरानी बेसिक सैलरी×फिटमेंट फैक्टर\text{नई बेसिक सैलरी} = \text{पुरानी बेसिक सैलरी} \times \text{फिटमेंट फैक्टर}नई बेसिक सैलरी=पुरानी बेसिक सैलरी×फिटमेंट फैक्टर
DA में हर बार कम से कम 4% बढ़ोतरी की मांग
कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी बड़ा सुझाव दिया है। उनका कहना है कि हर छह महीने में DA में कम से कम 4% की वृद्धि सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों और पेंशनर्स पर कम पड़े।
50% होते ही DA को बेसिक पे में मर्ज करने का प्रस्ताव
संगठनों ने यह भी मांग की है कि जैसे ही DA 50% तक पहुंचे, उसे स्वतः बेसिक पे में जोड़ दिया जाए।
इससे कर्मचारियों की मूल सैलरी बढ़ेगी और उसका सीधा फायदा HRA, TA, पेंशन और अन्य भत्तों पर भी पड़ेगा।
सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 5% करने की मांग
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को हर साल 3% वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है। अब इसे बढ़ाकर 5% करने का प्रस्ताव दिया गया है।
इसके अलावा संशोधित बेसिक पे को अगले ₹1000 के राउंड फिगर में तय करने की भी मांग की गई है, ताकि वेतन संरचना ज्यादा सरल और लाभकारी बन सके।
HRA में भी बड़े बदलाव की तैयारी
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने बड़ा संशोधन सुझाया है।
मौजूदा X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए HRA दरों को:
- 10% से बढ़ाकर 12%
- 20% से बढ़ाकर 24%
- 30% से बढ़ाकर 36%
करने की मांग की गई है।
संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में बढ़ते किराए को देखते हुए HRA में संशोधन बेहद जरूरी हो गया है।
कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं
दिल्ली में चल रही बैठकों और लगातार हो रही चर्चाओं ने देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजर आयोग की अगली बैठकों और संभावित सिफारिशों पर टिकी हुई है।
