Indian Air Force जल्द ही अपने जंगी बेड़े को और ज्यादा ताकतवर बनाने जा रही है। भारत और फ्रांस के बीच 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी रक्षा डील अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार जल्द ही फ्रांस को आधिकारिक Letter of Request (LOR) भेज सकती है, जिसके बाद यह मेगा डिफेंस डील लगभग तय मानी जा रही है।
यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान चीन से पांचवीं पीढ़ी के J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। ऐसे में भारत भी अपनी वायु शक्ति को तेजी से मजबूत करने में लगा है।
करीब ₹3.25 लाख करोड़ की हो सकती है डील
सूत्रों के अनुसार, इस रक्षा सौदे की अनुमानित लागत करीब ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी फाइटर जेट डील्स में से एक हो सकती है।
LOR यानी Letter of Request एक औपचारिक सरकारी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा खरीद प्रक्रिया की शुरुआत की जाती है।
90 राफेल भारत में होंगे तैयार
प्रस्तावित समझौते के तहत:
- 114 में से लगभग 90 राफेल फाइटर जेट भारत में बनाए जाएंगे
- बाकी 24 विमान फ्रांस से सीधे उड़ान योग्य स्थिति में मिलेंगे
इस प्रोजेक्ट में फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation और भारतीय रक्षा कंपनियों के बीच साझेदारी होगी।
सरकार का फोकस:
- Make in India
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
- और स्वदेशी तकनीक बढ़ाने पर है।
बताया जा रहा है कि इन विमानों में करीब 50% स्वदेशी उपकरण और कंपोनेंट शामिल किए जा सकते हैं।
एयर चीफ मार्शल का फ्रांस दौरा अहम
A. P. Singh जून की शुरुआत में फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि यह दौरा इस रक्षा समझौते को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके बाद:
- अंतिम कीमत पर बातचीत
- सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की मंजूरी
- और औपचारिक हस्ताक्षर
की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
भारतीय नौसेना भी खरीद रही है राफेल मरीन
Indian Navy भी अलग से 26 Rafale Marine फाइटर जेट खरीद रही है।
इनका इस्तेमाल:
- एयरक्राफ्ट कैरियर संचालन
- समुद्री सुरक्षा
- और लंबी दूरी के ऑपरेशन
के लिए किया जाएगा।
भारतीय वायुसेना के पास अभी कितने राफेल हैं?
भारत पहले से:
- 36 राफेल फाइटर जेट का संचालन कर रहा है
ये विमान 2016 में हुए भारत-फ्रांस रक्षा समझौते के तहत खरीदे गए थे।
राफेल विमानों ने:
- लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता
- एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर
- और मल्टीरोल ऑपरेशन
में भारतीय वायुसेना की ताकत को काफी बढ़ाया है।
भारतीय वायुसेना को क्यों चाहिए इतने फाइटर जेट?
Indian Air Force को वर्तमान में:
- लगभग 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत है
लेकिन अभी:
- केवल करीब 29 स्क्वाड्रन सक्रिय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- चीन और पाकिस्तान के खिलाफ दो मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए
- भारत को तेजी से अपनी लड़ाकू क्षमता बढ़ानी होगी।
पाकिस्तान और चीन को लेकर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान:
- चीन से 40 J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की दिशा में काम कर रहा है।
इसके अलावा चीन लगातार:
- आधुनिक लड़ाकू विमान
- एयर डिफेंस सिस्टम
- और ड्रोन तकनीक
को मजबूत कर रहा है।
ऐसे में भारत भी:
- राफेल
- तेजस
- AMCA
- और अन्य आधुनिक प्रोजेक्ट्स
पर तेजी से काम कर रहा है।
तेजस और AMCA पर भी बढ़ा फोकस
सरकार ने Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को तेजस Mk-1A लड़ाकू विमानों की डिलीवरी तेज करने के निर्देश दिए हैं।
रक्षा मंत्रालय को उम्मीद है कि:
- इस वित्तीय वर्ष में 10 तेजस विमान वायुसेना को सौंपे जा सकते हैं।
वहीं भारत का महत्वाकांक्षी:
- Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) प्रोजेक्ट
भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
2035 तक मिल सकता है स्वदेशी स्टील्थ फाइटर
AMCA कार्यक्रम के तहत:
- भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट विकसित कर रहा है।
सरकार ने इसके लिए:
- Tata Advanced Systems Limited
- Larsen & Toubro
- Bharat Forge
जैसी भारतीय कंपनियों को शामिल किया है।
निष्कर्ष
114 राफेल फाइटर जेट की संभावित डील भारत की वायु शक्ति को नई मजबूती दे सकती है। चीन और पाकिस्तान से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह सौदा भारतीय वायुसेना के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। साथ ही Make in India और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।
