8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों में उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांगों और सुझावों के साथ आयोग के सामने पहुंच रहे हैं। इसी बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसने वेतन संशोधन की बहस को नया मोड़ दे दिया है।
IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग कर्मचारी स्तरों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी है। यह प्रस्ताव मौजूदा “सभी कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर” की व्यवस्था से बिल्कुल अलग माना जा रहा है।
IRTSA ने क्यों उठाई अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग?
अब तक अधिकतर कर्मचारी संगठनों ने सभी कर्मचारियों के लिए एक ही फिटमेंट फैक्टर लागू करने की बात कही है। लेकिन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन का मानना है कि अलग-अलग जिम्मेदारियों और पदों के हिसाब से वेतन संशोधन भी अलग होना चाहिए।
IRTSA का तर्क है कि निचले, मध्यम और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर तय करने से ज्यादा संतुलित वेतन संरचना तैयार की जा सकती है।
यही वजह है कि संगठन ने 2.92 से लेकर 4.38 तक पांच अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है।
किस लेवल के लिए कितना फिटमेंट फैक्टर मांगा गया?
IRTSA ने अपने प्रस्ताव में विभिन्न पे-लेवल के लिए ये फिटमेंट फैक्टर सुझाए हैं:
| कर्मचारी स्तर | प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर |
|---|---|
| Level 1 से 5 | 2.92 |
| Level 6 से 8 | 3.50 |
| Level 9 से 12 | 3.80 |
| Level 13 से 16 | 4.09 |
| Level 17 से 18 | 4.38 |
इस प्रस्ताव के मुताबिक वरिष्ठ पदों पर ज्यादा फिटमेंट फैक्टर लागू होगा, जिससे उनकी बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या बदल सकता है वेतन ढांचा?
अगर सरकार IRTSA के इस मॉडल पर विचार करती है, तो 8वें वेतन आयोग के तहत पहली बार अलग-अलग कैटेगरी के कर्मचारियों के लिए अलग वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तकनीकी और उच्च जिम्मेदारी वाले पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को ज्यादा लाभ मिल सकता है।
टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए नई कैडर संरचना का सुझाव
IRTSA ने सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए नई कैडर संरचना का भी प्रस्ताव दिया है। संगठन ने विभिन्न पदों के लिए शुरुआती वेतन इस प्रकार सुझाए हैं:
| पद | प्रस्तावित पे लेवल | सुझाया गया वेतन |
|---|---|---|
| जूनियर इंजीनियर | Level-7 | ₹1,57,400 |
| सीनियर सेक्शन इंजीनियर (Gr-B) | Level-8 | ₹1,66,800 |
| असिस्टेंट मैनेजर (Gr-B) | Level-9 | ₹2,01,600 |
| मैनेजर (Gr-B) | Level-10 | ₹2,13,000 |
| सीनियर मैनेजर (Gr-A) | Level-11 | ₹2,57,000 |
फिटमेंट फैक्टर क्यों है इतना अहम?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक वेतन को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है।
इसका सीधा असर इन चीजों पर पड़ता है:
- बेसिक सैलरी
- पेंशन
- DA (महंगाई भत्ता)
- HRA और अन्य भत्ते
- एरियर
फॉर्मूला इस प्रकार होता है:
नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर
यानी जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होगा, कर्मचारियों की सैलरी उतनी ज्यादा बढ़ेगी।
क्या सरकार मान सकती है यह प्रस्ताव?
फिलहाल सरकार सभी कर्मचारी संगठनों के सुझावों पर विचार कर रही है। हालांकि अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करना सरकार के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार किसी संतुलित मॉडल पर विचार कर सकती है, ताकि कर्मचारियों को राहत भी मिले और सरकारी खजाने पर अत्यधिक बोझ भी न पड़े।
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें?
केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि नया वेतन आयोग:
- बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी
- बेहतर पेंशन व्यवस्था
- महंगाई के अनुसार वेतन संशोधन
- तकनीकी कर्मचारियों के लिए अलग लाभ
जैसे कई बड़े बदलाव लेकर आ सकता है।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए प्रस्तावों के आधार पर तैयार किया गया है। 8वें वेतन आयोग को लेकर अंतिम फैसला केंद्र सरकार और आयोग की आधिकारिक सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा।
