केंद्र सरकार के 1.1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले देशभर में विभिन्न कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से चर्चा कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार किया जा रहा है।
इस बीच एक महत्वपूर्ण विषय “फैमिली यूनिट फॉर्मूला” भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जो कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है।
क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला?
वेतन आयोग कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखता है। इसके लिए एक विशेष गणना पद्धति अपनाई जाती है, जिसे फैमिली यूनिट फॉर्मूला कहा जाता है।
यह मॉडल Aykroyd Formula पर आधारित है, जिसके जरिए भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों का अनुमान लगाकर न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाता है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार एक परिवार को 3 यूनिट माना जाता है, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे बदलने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने क्या सुझाव दिया?
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि मौजूदा समय में जीवनयापन की लागत काफी बढ़ चुकी है। महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए परिवार की जरूरतों का आकलन पुराने फॉर्मूले से नहीं किया जा सकता।
इसी कारण नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के सामने परिवार की गणना को 5 यूनिट तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के अनुसार:
- कर्मचारी: 1 यूनिट
- जीवनसाथी: 1 यूनिट
- पहला बच्चा: 0.8 यूनिट
- दूसरा बच्चा: 0.8 यूनिट
- माता-पिता: 0.8 यूनिट
इस तरह कुल 5.2 यूनिट बनती हैं, जिसे व्यावहारिक रूप से 5 यूनिट माना जा सकता है।
न्यूनतम वेतन ₹69,000 तक बढ़ाने की मांग
NC-JCM के अनुसार यदि 5 यूनिट परिवार मॉडल को स्वीकार किया जाता है, तो न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाना चाहिए।
यूनियन ने इसके लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर का भी सुझाव दिया है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.57 है और न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 निर्धारित है।
यदि नया प्रस्ताव मंजूर होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
फिटमेंट फैक्टर का क्या होगा असर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक पे को संशोधित वेतन में बदला जाता है।
उदाहरण के लिए:
₹18,000 × 3.833 = ₹68,994
यानी वर्तमान न्यूनतम वेतन लगभग ₹69,000 तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
किन लोगों को मिलेगा फायदा?
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने की संभावना है।
भारत में अब तक कुल सात वेतन आयोग गठित किए जा चुके हैं। पहला वेतन आयोग वर्ष 1946 में बना था और उसके बाद लगभग हर 10 वर्ष में नया आयोग गठित किया जाता रहा है।
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और माना जा रहा है कि इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों को एरियर का लाभ भी मिल सकता है।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग के तहत फैमिली यूनिट फॉर्मूला में बदलाव की मांग ने कर्मचारियों के बीच नई उम्मीदें जगा दी हैं। यदि परिवार की यूनिट संख्या बढ़ाने और 3.833 फिटमेंट फैक्टर के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में बड़ा इजाफा संभव है। फिलहाल सभी की नजरें आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।
