Cooler Buying Tips: गर्मियों में कूलर की मांग चरम पर होती है। बाजार में लोहे और प्लास्टिक दोनों प्रकार के कूलर बड़ी संख्या में मिलते हैं। लेकिन जब खरीदारी की बात आती है तो ग्राहक दुविधा में पड़ जाते हैं – कौन सा कूलर ज्यादा बेहतर है? कौन ज्यादा ठंडी हवा देगा? किसमें बिजली की बचत होगी? आइए, आज हम इन दोनों प्रकार के कूलर की खूबियों और खामियों को विस्तार से समझते हैं। ताकि आप अपने लिए सही विकल्प चुन सकें।
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लोहे वाले कूलर की खूबियां
लोहे के कूलर पारंपरिक रूप से सबसे अधिक बिकते हैं। इनके कुछ प्रमुख फायदे:
- इनमें ज्यादा कैपेसिटी वाले मोटर और पंखे लगे होते हैं। जिससे तेज और ठंडी हवा मिलती है।
- पानी की क्षमता अधिक होती है। जिससे बार-बार पानी भरने की जरूरत नहीं पड़ती।
- लोहे के कूलर की एयर थ्रो पावर अधिक होती है। जिससे कमरा जल्दी ठंडा हो जाता है।
- सही देखभाल की जाए तो ये टिकाऊ भी होते हैं।
लोहे वाले कूलर की कमियां
जहां फायदे हैं, वहीं कुछ कमियां भी हैं:
- जंग लगने की समस्या आम है, खासतौर पर नमी में।
- ये कूलर भारी होते हैं जिससे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल हो जाता है।
- शोर ज्यादा करते हैं और बिजली की खपत भी अधिक होती है।
- लोहे की बॉडी होने से करंट लगने का खतरा भी बना रहता है।
प्लास्टिक वाले कूलर की खूबियां
प्लास्टिक के कूलर आधुनिक डिज़ाइन और सुविधाओं के साथ आते हैं। इनके फायदे:
- ये कूलर हल्के होते हैं, जिससे इन्हें कहीं भी आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है।
- कम बिजली खपत होती है। जिससे बिजली का बिल कम आता है।
- प्लास्टिक होने के कारण जंग नहीं लगता और इनका रख-रखाव आसान होता है।
- कम शोर करते हैं और साफ-सफाई में भी आसान होते हैं।
प्लास्टिक वाले कूलर की कमियां
हालांकि ये सुविधाजनक हैं लेकिन कुछ बातें ध्यान देने योग्य हैं:
- इनमें लोहे के कूलर की तरह तेज हवा नहीं मिलती, खासकर बड़े कमरों में।
- कम पावरफुल मोटर और पंखे होने के कारण एयर फ्लो भी सीमित रहता है।
किसे खरीदना बेहतर रहेगा?
आपकी ज़रूरत और बजट के अनुसार दोनों कूलर फायदेमंद साबित हो सकते हैं:
- अगर आप चाहते हैं कि कूलर कम बिजली खर्च करे, हल्का हो और पोर्टेबल हो, तो प्लास्टिक वाला कूलर अच्छा है।
- अगर आपको ज्यादा कूलिंग चाहिए और जगह स्थिर है, तो लोहे वाला कूलर बेहतर रहेगा।
