FMCG Price Hike 2025: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध ने भारत सहित वैश्विक बाजारों में आर्थिक चिंता को गहरा कर दिया है. एफएमसीजी कंपनियां आशंका जता रही हैं कि इस संकट के कारण कच्चे तेल और अन्य आवश्यक कच्चे माल की कीमतों में तेज़ी आ सकती है. जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे साबुन, बिस्किट, खाद्य तेल, प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हो सकती हैं.
गोदरेज का अलर्ट
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ अधिकारी कृष्णा खटवानी ने इस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर सिन्थोल साबुन और गुडनाइट जैसे उत्पादों की लागत पर पड़ेगा. उन्होंने चेताया कि FMCG उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं. जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त भार आएगा.
डिमांड रिकवरी को लग सकता है ब्रेक
पिछले पांच तिमाहियों से कमज़ोर मांग का सामना कर रही कंपनियों को आरबीआई की दरों में कटौती, सरकारी टैक्स राहत और समय पर मानसून जैसी वजहों से हाल ही में डिमांड में सुधार की उम्मीद जगी थी. लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध इस उभरती हुई रिकवरी पर ब्रेक लगाने का खतरा बन गया है.
प्लास्टिक पैकेजिंग भी महंगी हो सकती है
बिसलेरी इंटरनेशनल के सीईओ एंजेलो जॉर्ज ने बताया कि यदि मिडिल ईस्ट की एनर्जी सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो पेट्रो-डेरिवेटिव उत्पादों की लागत में भारी इज़ाफा होगा. इससे प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हो जाएगी और बोतलबंद पानी उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है.
बिसलेरी का मिडिल ईस्ट विस्तार भी प्रभावित
बिसलेरी ने हाल ही में दुबई की एक प्रमुख रिटेल चेन के साथ साझेदारी की थी और पश्चिम एशिया व अफ्रीका में कारोबार विस्तार की घोषणा की थी. लेकिन भू-राजनीतिक तनाव इस योजना को भी धीमा कर सकता है. जिससे कंपनी की वैश्विक रणनीति प्रभावित हो सकती है.
इन्वेंटरी रणनीति भी खतरे में
कई कंपनियां छह महीने की इन्वेंटरी पहले से रखती हैं. लेकिन तेल आपूर्ति में रुकावट या कीमतों में अस्थिरता इस रणनीति को अप्रभावी बना सकती है. इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और शहरी उपभोक्ता बाजार में पुनरुत्थान की संभावना घट सकती है.
डाबर की सतर्क निगरानी
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. उन्होंने बताया कि खाद्य मुद्रास्फीति में हाल में गिरावट और सरकारी प्रोत्साहन से बाजार में मांग बढ़ने की संभावना थी. लेकिन अब इन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं.
सरकार और कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय
मिडिल ईस्ट संकट ने भारतीय उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. जहां कंपनियां डिमांड में तेजी की उम्मीद कर रही थीं. वहीं कच्चे माल की लागत और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं ने अब उनकी योजना पर असर डालना शुरू कर दिया है.
