ऐसे में आज हम आपको शास्त्रों में बताए गए कुछ उन श्लोकों के अर्थ बताने जा रहे हैं जो आपको संक्रमण से दूर रखने का ज्ञान देते हैं. अर्थात हमारे शात्रों में संक्रमण से बचाव के उपाय पहले से ही मौजूद हैं.
हाथ से परोसा भोजन ना खाए

लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च। लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत्। धर्मसिंधु में लिखे इस श्लोक का अर्थ हैं आपको नमक, घी, तेल या फिर कोई अन्य व्यंजन, पेय पदार्थ या फिर खाने का कोई भी सामान तब नहीं खाना हैं जब वो हाथ से परोसा गया हो. इसलिए आपको हमेशा चम्मच से परोसा गया खाना ही खाना चाहिए.
ऐसे कपड़े ना पहने

न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयात्। विष्णुस्मृति में वर्णित इस श्लोक का मतलब हैं कि आपको एक बार पहने गए कपड़ों को बिना धोए दोबारा नहीं पहनना चाहिए. इन कपड़ों में वातावरण में मौजूद जीवाणु और विषाणु लग सकते हैं इसलिए इन्हें धोने के बाद ही दोबारा धारण किया जाना चाहिए.
मुंह और सिर को ढके

घ्राणास्ये वाससाच्छाद्य मलमूत्रं त्यजेत् बुध:। नियम्य प्रयतो वाचं संवीताङ्गोऽवगुण्ठित:। वाधूलस्मृति और मनुस्मृति में बतलाए गए इस श्लोक का अर्थ हैं कि आपको अपने नाक, मुंह और सिर को ढककर रखना चाहिए. इसके साथ ही मौन रहकर मल मूत्र त्यागना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो संक्रमण के खतरे कम हो जाते हैं.
इन घटनाओं के बाद स्नान करे

चिताधूमसेवने सर्वे वर्णा: स्नानम् आचरेयु:। वमने श्मश्रुकर्मणि कृते च। विष्णुस्मृति में लिखे इस श्लोक में बताया गया हैं कि शमशान से आने के बाद, उल्टी होने के बाद, दाढ़ी बनवाने के बाद और बाल कटवाने के बाद घर में प्रवेश करते ही आपको सवर्प्रथम स्नान करना चाहिए. ऐसा करने से संक्रमण नहीं होता हैं.
गिले कपड़े से बॉडी ना पोछें

अपमृज्यान्न च स्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभि:। मार्कण्डेय पुराण में लिखे गए इस श्लोक का मतलब हैं कि आपको अपने शरीर को कभी भी गिले कपड़े से नहीं पोछना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो स्किन में संक्रमण का चांस बढ़ जाता हैं. इसलिए हमेशा सूखे कपड़े यानी तौलिए से ही अपनी बॉडी को पोंछना चाहिए.
उम्मीद करते हैं कि आप हमारे शास्त्रों में बताए गए इन तरीकों पर गौर अवश्य करेंगे. खासकर कोरोना वायरस के इस माहोल में ये आदतें काफी कारगर सिद्ध हो सकती हैं. यदि आपको हमारी ये जानकारी पसंद आई तो इसे दूसरों के साथ साझा करना ना भूले. इस तरह बाकी लोग भी सुरक्षित रह सकेंगे.
