नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का ऐलान मोदी सरकार ने जनवरी 2025 में कर दिया था। लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक इसका ठोस खाका तैयार नहीं हो सका है। टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) यानी वे मुद्दे जिन पर आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करेगा, अब तक फाइनल नहीं हुए हैं। यही कारण है कि कर्मचारियों को नई सैलरी का फायदा 2026 से मिलने की उम्मीद के बावजूद असल में 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है।
8वें वेतन आयोग की धीमी शुरुआत
जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा की थी। यह वह प्रक्रिया है जो हर 10 साल में दोहराई जाती है, जिसके तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा होती है।
देशभर के 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर इस ऐलान के बाद से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
लेकिन अब तक न तो ToR जारी हुआ है और न ही आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति हुई है। कर्मचारी संगठनों ने कई बार सरकार से जानकारी मांगी है, जबकि वित्त मंत्रालय का कहना है कि अभी राज्यों और संगठनों से इनपुट लिए जा रहे हैं।
7वें वेतन आयोग से मिली सीख
अगर 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की टाइमलाइन देखें तो स्थिति साफ हो जाती है कि पूरी प्रक्रिया लंबी होती है।
- घोषणा: 25 सितंबर 2013 को UPA सरकार ने 7वें वेतन आयोग का ऐलान किया।
- ToR जारी: 5 महीने बाद, फरवरी 2014 में।
- सदस्यों की नियुक्ति: मार्च 2014 में आयोग का गठन हुआ।
- रिपोर्ट सबमिशन: नवंबर 2015 को सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई।
- लागू होना: जून 2016 में सिफारिशों पर अमल हुआ, और इन्हें 1 जनवरी 2016 से लागू माना गया।
कुल मिलाकर 33 महीने यानी लगभग 2 साल 9 महीने लगे।
8वें वेतन आयोग की संभावित टाइमलाइन
अगर यही पैटर्न दोहराया गया, तो कर्मचारियों के लिए नई सैलरी लागू होने में लगभग 3 साल लग सकते हैं।
- जनवरी 2025 → घोषणा
- अगस्त 2025 (मान लें) → ToR जारी और आयोग का गठन
- 2027 के अंत → रिपोर्ट सबमिशन
- जनवरी 2028 → सिफारिशें लागू
इसका मतलब है कि कर्मचारियों को असल वेतन लाभ और एरियर 2028 में ही मिलेगा, हालांकि इसे 1 जनवरी 2026 से लागू मानकर बकाया राशि भी दी जाएगी।
कर्मचारी संगठनों की चिंता
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि देरी से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
NC-JCM (National Council of Joint Consultative Machinery) ने सरकार को जो प्रस्ताव सौंपा है, उसमें वेतन संरचना सुधार, भत्तों की बढ़ोतरी और पेंशन में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। संगठन चाहते हैं कि सरकार तुरंत ToR जारी कर काम को गति दे।
क्या हो सकता है अलग?
यह जरूरी नहीं कि 8वें वेतन आयोग में भी 7वें जैसी लंबी देरी हो। अगर सरकार प्राथमिकता दे और आयोग तेजी से रिपोर्ट सौंप दे तो 2026 के भीतर भी सिफारिशें लागू हो सकती हैं। लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखकर फिलहाल ऐसा संभव नहीं लग रहा।
निष्कर्ष
पिछले अनुभव बताते हैं कि वेतन आयोग की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। अगर 8वें वेतन आयोग के लिए भी 7वें जैसा ही पैटर्न अपनाया गया, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि लागू होने के बाद बढ़ा हुआ वेतन और एरियर 1 जनवरी 2026 से ही मिलेगा।
