कोरोना महामारी के समय केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनधारकों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी को अस्थायी रूप से रोक दिया था। यह रोक मार्च 2020 से लागू हुई और पूरे 18 महीनों तक जारी रही। इसके चलते जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की तीन किस्तें अटक गईं। इस कदम से सरकार को उस समय खजाने पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिली।
क्या कहा सरकार ने?
केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद थी कि हालात सामान्य होने पर रुकी हुई किस्तें वापस मिलेंगी। कर्मचारी संगठनों ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया। लेकिन, सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि उस अवधि की बकाया डीए/डीआर किश्तों का भुगतान नहीं किया जाएगा।
संसद में सरकार का बयान
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि कोविड काल में न सिर्फ कर्मचारियों, बल्कि सांसदों के यात्रा भत्ते और पेंशन में भी कटौती की गई थी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 2020-21 में देश का राजकोषीय घाटा 9.2% तक पहुंच गया था। हालांकि अब 2025-26 के बजट अनुमान में यह घटकर 4.4% पर आने की उम्मीद है। इसके बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि उस समय रोकी गई डीए-डीआर की किश्तें अब जारी नहीं होंगी।
वर्तमान में डीए की स्थिति
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता 55% पर चल रहा है। अनुमान है कि जुलाई-दिसंबर 2025 की अवधि में इसमें 3% और बढ़ोतरी होगी, जिससे यह 58% तक पहुंच सकता है। माना जा रहा है कि यह नई दर दिवाली से पहले लागू की जाएगी।
